ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल को पार, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

मुंबई 

ब्रेंट क्रूड की कीमत आज 30 मार्च 2026 को 116.4 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई. ये पिछले सेशन से 3.41% बढ़ गई है. WTI क्रूड भी 103.1 डॉलर पर पहुंच गया है. इस महीने ब्रेंट में 59% की तेज उछाल आया है, जो 1990 के गल्फ वॉर के बाद सबसे तेज मंथली उछाल है. ईरान युद्ध में हूती विद्रोहियों के शामिल होने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरे और अमेरिका द्वारा मध्य पूर्व में सैनिक बढ़ाने से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। 

भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर बड़ा खतरा बन गया है. ब्रेंट क्रूड विश्व का सबसे मेन ऑयल बेंचमार्क है, जिसकी कीमत पर दुनिया भर के तेल के दाम निर्भर करते हैं। 

क्यों ब्रेंट क्रूड के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल अहम लेवल है?
जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल पार करता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए ‘मिडफ्लाइट टर्बुलेंस’ जैसा होता है. सामान्य व्यापार ठप पड़ जाता है और लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो बड़ा नुकसान हो सकता है. इस बार स्थिति पहले से अलग है. मार्च 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के समय ब्रेंट 117.2 डॉलर था और डॉलर 76.24 रुपये पर था, तो एक बैरल तेल की कीमत भारतीय रुपए में 8,935 रुपये थी. मार्च 2026 में ब्रेंट 118.4 डॉलर पर था लेकिन डॉलर 93.35 रुपये पर पहुंच गया, जिससे एक बैरल तेल 11,052 रुपये का हो गया, यानी 23.6% महंगा. तेल डॉलर में खरीदा जाता है, इसलिए रुपए की कमजोरी भारत को ज्यादा नुकसान पहुंचाती है. भारत अपनी जरूरत का 85% तेल बाहर से मंगाता है, इसलिए यह कीमत सीधे इंपोर्ट बिल बढ़ाती है.
100 डॉलर तेल दुनियाभर में महंगाई को कैसे प्रभावित करता है?
जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार करता है तो दुनिया भर में महंगाई बढ़ जाती है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और खेती की लागत बढ़ जाती है. इससे हर चीज का दाम ऊपर जाता है – खाना, सफर और सामान. कई देशों में मुद्रास्फीति (इन्फ्लेशन) 4-5% या उससे ज्यादा पहुंच सकती है। 

भारत में भी यही असर पड़ता है. अगर तेल की औसत कीमत 100 डॉलर पर बनी रही तो GDP ग्रोथ 6% से नीचे आ सकती है और महंगाई बढ़ सकती है. सरकार को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करनी पड़ सकती है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि 100 डॉलर तेल भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को 1.9-2.2% तक बढ़ा सकता है. लंबे समय तक यह स्थिति बनी रही तो फैक्टरियां प्रभावित होंगी, रोजगार पर असर पड़ेगा और आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा। 

ब्रेंट क्रूड की कीमत भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को कैसे प्रभावित कर सकती है?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रूड की कीमत, डॉलर की दर, रिफाइनरी मार्जिन और सरकार की ड्यूटी पर निर्भर करती हैं. 100 डॉलर से ऊपर क्रूड होने पर रिफाइनरी को कच्चा तेल महंगा पड़ता है, जिसका असर अंत में पेट्रोल पंप पर पड़ता है। 

पिछले सालों में सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखीं, जिससे जब क्रूड सस्ता था तो फायदा हुआ, लेकिन अब महंगा होने पर नुकसान हो रहा है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें क्रूड बढ़ने के अनुपात में नहीं बढ़ी हैं, लेकिन पूर्ण रूप से महंगाई से बचना मुश्किल है. अगर क्रूड 100 डॉलर के ऊपर टिका रहा तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं या सरकार को ड्यूटी काटनी पड़ सकती है, जिससे राजस्व कम होगा. भारत सरकार के पास 60 दिनों का तेल स्टॉक है, इसलिए तुरंत कमी नहीं होगी. लेकिन लंबे समय तक युद्ध चला तो आयात बिल 20-25 बिलियन डॉलर अतिरिक्त बढ़ सकता है. इससे रुपया और कमजोर हो सकता है और महंगाई बढ़ेगी। 

इस बार 100 डॉलर तेल पहले से ज्यादा दर्द दे रहा है क्योंकि रुपया कमजोर है और तेल डॉलर में महंगा पड़ रहा है. आम लोगों को पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों पर असर दिखेगा. सरकार को सतर्क रहना होगा. ड्यूटी में बदलाव, स्टॉक मैनेजमेंट और ऑप्शन ऊर्जा पर जोर देकर इस चुनौती से निपटना होगा. अगर युद्ध जल्दी थमा तो राहत मिल सकती है, वरना अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। 

More From Author

Realme 16: भारत का पहला सेल्फी मिरर स्मार्टफोन 2 अप्रैल को होगा लॉन्च

मुख्यमंत्री साय की त्वरित कार्रवाई: दिव्यांग चंदूलाल को मिली मदद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.