युवा विधायक ने सदन में उठाई मांग, माननीयों के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें

भोपाल
 राजस्थान की शिव विधानसभा से विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी चाहते हैं कि एक ऐसा बिल लाया जाए जिससे ये तय हो कि केवल गरीब आदमी के नहीं जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी सरकारी स्कूल में ही पढ़ेंगे. मध्य प्रदेश के अटेर से विधायक हेमंत कटारे का सुझाव है कि लाड़ली बहना योजना जैसी तमाम फ्री बीज तत्काल बंद होनी चाहिए. मध्य प्रदेश विधानसभा में युवा विधायकों के सम्मेलन में बतौर वक्ता आए इन विधायकों ने ब्यूरोक्रेसी को सबसे बड़ा खतरा बताया और कहा कि इनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। 

बिल लाएं कि माननीय के बच्चे भी सरकारी स्कूल में जाएं
राजस्थान की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक रवीन्द्र सिंह भाटी भोपाल में हुए इस सम्मेलन के सबसे युवा विधायक हैं. छात्र राजनीति से सीधे चुनाव के मैदान में उतरे रवीन्द्र की विधानसभा का इलाका अंतर्राष्ट्रीय बार्डर से सटा हुआ है. रवीन्द्र ने सरकारी स्कूलों की बेहतरी से लेकर विधायकों के शिक्षित होने का मु्द्दा उठाया. उन्होंने कहा कि क्यों ना ऐसा बिल लाया जाए कि जो जनप्रतिनिधि हैं, उनके बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ें। 

भाटी ने कहा कि छत्तीसगढ के विधायक छत्तीसगढ में ये मंग करें, मध्य प्रदेश के विधायक मध्य प्रदेश में ये बिल लाएं. भारत को विकसित करना है तो गरीब का बेटा ही सरकारी स्कूल में क्यों पढ़े. भाटी ने सवाल किया कि यहां कितने माननीय सदस्य हैं जो अपने गांव के स्कूल में जाकर ये देखते होंगे कि स्कूल में कितने मास्टर हाजिरी दे रहे हैं और कितने गैर हाजिर हैं? यहां बैठे कितने विधायकों की किसी बिल को में लाने में भूमिका थी। 

भाटी ने कहा, हैरत की बात ये है कि हमें सरपंच पढ़े लिखे चाहिए, लेकिन विधायक नहीं. उन्होंने सवाल किया कि 1947 से 2047 तक विकसित भारत क्या इन जनप्रतिनिधियों के भरोसे बन पाएगा?

विधायक बोले- मैं परवाह नहीं करता कौन नाराज होगा, फ्री बीज़ बंद होनी चाहिए

मध्य प्रदेश के अटेर से कांग्रेस के विधायक हेमंत कटारे ने कहा कि जनप्रतिनिधियों के सामने ये संकट भी रहता है कि आपने ऐसा बोला तो महिलाएँ नाराज़ हो जाएंगी. ये वर्ग नाराज हो जाएगा. मैं इसकी परवाह नहीं करता. जो सही है वो कहता हूं. और जो कहता हूं उससे मुकरता नहीं हूं. कटारे ने कहा कि आप किसी महिला के खाते में दस हजार रुपए डालकर भी उसे कैसे सशक्त बना देंगे? वह सशक्त होगी जब उसे रोजगार दीजिएगा, स्किल सिखाइए। 

कटारे ने कहा कि ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही होनी चाहिए. ज्यूडिशियरी की भी जवाबदेही होनी चाहिए. हमारी जवाबदेही है, पांच साल अच्छा काम करेंगे तो पांच साल बाद फिर मौका मिलेगा नहीं तो चले जाएंगे. उन्होंने कहा कि मैंने गूगल से फैक्ट चेक किया कि मध्य प्रदेश के 230 विधायकों की औसत आयु 58 वर्ष है. युवाओं को और प्रोत्साहन मिलना चाहिए। 

टिकट महिला पुरुष देखकर नहीं दी जाती, जेंडर की लड़ाई छोड़ के आएं
छत्तीसगढ़ की बीजेपी विधायक भावना बोहरा ने जेंडर का मुद्दा उठाया और कहा कि राजनीति में जेंडर को लेकर महिला जनप्रतिनिधियों को अपना आकलन नहीं करना चाहिए. टिकट मिलती है तो महिला या पुरुष देखकर नहीं मिलती. उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण अपनी जगह है. लेकिन आप किसी से कम नहीं हैं, ये मानकर आगे बढ़ें. और सबसे जरूरी बात आप डमी ना बन जाएं. नेतृत्व करने की आपकी क्षमता से आप आगे बढ़ेंगी. परिवार की दखलंदाजी नहीं होना चाहिए। 

नशेड़ियों और अवैध धंधों के लिए फोन नहीं करूंगा: गुरवीर सिंह
वहीं राजस्थान के सादुलशहर से बीजेपी विधायक गुरवीर सिंह ने एक और गंभीर मुद्दे पर अपनी बात रखी है, जो युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, और वह है नशाखोरी। दरअसल गुरवीर सिंह का क्षेत्र पाकिस्तान सीमा पर है, जहां से ड्रोन के जरिए लगातार नशा गिराया जाता है। उन्होंने बताया है कि पैसे के लालच में युवा भटक जाते हैं, जिसका नुकसान गुजरात, पंजाब से लेकर जम्मू-कश्मीर तक देखने को मिलता है। उन्होंने चिंता जताई है कि उनके क्षेत्र में 16-17 साल के बच्चे इंजेक्शन या मेडिकेटेड नशे से अपनी जान गंवा रहे हैं।

गुरवीर सिंह ने कहा कि “मैं जब विधायक बना था तो सादुलशहर की जनता के सामने पहला संकल्प गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब के सामने लिया था कि मैं जब तक सेवा में हूं मेरा एक भी फोन किसी नशेड़ी या अवैध धंधे के लिए नहीं जाएगा। मैं उस संकल्प पर बिल्कुल अटल हूं।”

दरअसल गुरवीर सिंह ने उन परिवारों के दर्द को भी साझा किया है, जिन्होंने अपने बच्चों को नशे की वजह से खोया है। उन्होंने कहा है कि अक्सर उन्हें ऐसे फोन आते हैं, जहां विवाहित लड़कों की पत्नियां और माता-पिता मदद मांगते हैं। सूचना मिलते ही सरकार और पुलिस की तरफ से कठोर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी बताया है कि केंद्र सरकार की ओर से एक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, और एयरफोर्स स्टेशन ड्रोन को निष्क्रिय करने पर काम कर रहे हैं, जिससे जल्द ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकेगा। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि राजनीतिक मतभेद भुलाकर नशे के खिलाफ मिलकर काम करें।

हर चुनाव लोकतंत्र की मंडी लगती है: सिद्धार्थ कुशवाह
वहीं मध्य प्रदेश के सतना से कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवा
ह ने लोकतंत्र के भविष्य को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि कई बार ऐसा लगता है कि क्या 2047 तक हमारा लोकतंत्र बचेगा भी या नहीं। जिस तरह हर चुनाव में लोकतंत्र की मंडी लगाई जाती है और चुनाव जीतने के लिए असाधारण प्रयास किए जाते हैं, उसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि आने वाले चुनावों में क्या होगा।

कुशवाह ने देश के पहले वोटर, हिमाचल के शिक्षक नेगी जी का जिक्र करते हुए कहा है कि जब करोड़ों लोग वोट डालते हैं, तो वे क्या सोचकर वोट डाल रहे हैं। आज राजनीतिक दल चुनाव लड़ने पर करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, तो आने वाले समय में क्या होगा? क्या यह लोकतंत्र व्यवसाय के रास्ते पर चल रहा है? उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने बहुत सारे जनप्रतिनिधियों को देखा है, जो हैं तो जनसेवा में, लेकिन उनका पूरा समय अपने कारोबार को खड़ा करने में लगा रहता है। घंटे-दो घंटे छोड़कर उनका पूरा ध्यान खुद को स्थापित करने में लगा रहता है, बजाय जनता की सेवा के।

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