तेल-गैस की तलाश में मेगा गेम शुरू, कीमतों में गिरावट और निवेश का मौका

नई दिल्ली
 भारत सरकार ने तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लेते हुए देश के 2.62 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोल दिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. सरकार का मकसद साफ है कि आने वाले वर्षों में देश को ऊर्जा के मामले में ज्यादा आत्मनिर्भर बनाया जाए और घरेलू उत्पादन को बढ़ाया जाए। 

क्या है पूरा फैसला और कितना बड़ा है इसका दायरा: सरकार ने कुल 2,62,817 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को एक्सप्लोरेशन के लिए खोला है, जिसमें जमीन के साथ साथ समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं. यह कोई छोटा कदम नहीं है, बल्कि भारत के कुल सेडिमेंटरी बेसिन का बड़ा हिस्सा अब कंपनियों के लिए उपलब्ध हो गया है. इसका मतलब है कि अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा इलाकों में तेल और गैस की तलाश की जा सकेगी।  OALP मॉडल क्या है और कंपनियों को कैसे फायदा मिलेगा: यह पूरा प्रोसेस ओपन एकरेज लाइसेंसिंग प्रोग्राम यानी OALP के तहत किया जा रहा है. इस मॉडल की खास बात यह है कि इसमें सरकार खुद ब्लॉक ऑफर करने के बजाय कंपनियों को यह आजादी देती है कि वे अपनी पसंद के इलाकों को पहचान कर वहां के लिए बोली लगा सकें. इससे कंपनियों की दिलचस्पी बढ़ती है और एक्सप्लोरेशन ज्यादा टारगेटेड तरीके से हो पाता है। 

किन इलाकों में होगा एक्सप्लोरेशन और क्या है संभावना: इस फैसले के तहत 26 सेडिमेंटरी बेसिन के ब्लॉक्स को शामिल किया गया है. ये वही इलाके होते हैं जहां भूगर्भीय संरचना ऐसी होती है कि तेल और गैस मिलने की संभावना ज्यादा रहती है. हालांकि संभावना होना और असल में रिजर्व मिलना दो अलग बातें हैं, इसलिए हर ब्लॉक में सफलता की गारंटी नहीं होती। समुद्र पर बढ़ता फोकस और समुद्र मंथन पहल: सरकार इस बार खासतौर पर डीप सी एक्सप्लोरेशन पर जोर दे रही है, जो प्रधानमंत्री के समुद्र मंथन इनिशिएटिव का हिस्सा है. बंगाल की खाड़ी और अरब सागर जैसे इलाकों में बड़ी संभावनाएं मानी जाती हैं, लेकिन यहां काम करना तकनीकी रूप से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और महंगा होता है। 

विदेशी और निजी कंपनियों के लिए बड़ा मौका: इस कदम के जरिए सरकार ने साफ तौर पर ग्लोबल ऑयल और गैस कंपनियों को भारत में निवेश के लिए न्योता दिया है. रिलायंस, ओएनजीसी के अलावा बीपी, शेल, टोटल और एक्सॉन जैसी विदेशी कंपनियां भी इसमें दिलचस्पी दिखा सकती हैं. इससे न सिर्फ निवेश आएगा बल्कि नई तकनीक और विशेषज्ञता भी देश में आएगी। 

भारत की आयात निर्भरता कम करने की कोशिश: भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था पर बड़ा बोझ डालता है. अगर घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ता है, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और वैश्विक कीमतों में उतार चढ़ाव का असर भी कम होगा. यही इस फैसले के पीछे की सबसे बड़ी रणनीतिक सोच है। 

चुनौतियां भी कम नहीं हैं, समय और लागत दोनों भारी: तेल और गैस की खोज कोई आसान या जल्दी होने वाली प्रक्रिया नहीं है. इसमें कई साल लग जाते हैं और भारी निवेश करना पड़ता है. कई बार कंपनियों को सालों की मेहनत के बाद भी कुछ नहीं मिलता, इसलिए जोखिम भी काफी ज्यादा होता है। 

कब दिखेगा असर और क्या है आगे की तस्वीर: इस फैसले का असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि एक्सप्लोरेशन से लेकर प्रोडक्शन तक पहुंचने में 5 से 10 साल तक का समय लग सकता है. लेकिन अगर कुछ बड़े रिजर्व मिलते हैं, तो आने वाले समय में भारत की ऊर्जा स्थिति मजबूत हो सकती है और देश को आयात पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। 

 

More From Author

बांगलादेश से मालदीव तक, इन देशों ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोला, अब मदद की गुहार

GST कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल! सरकार के खजाने से मिलने वाली सुविधाएं जानें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.