12वें चरण की शराब दुकान नीलामी कल, आबकारी विभाग को मिलेगा पांच हजार करोड़ का राजस्व, टेंडर आज 2 बजे खुलेंगे

भोपाल 

मध्यप्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत 1 अप्रैल से शराब के नए ठेके भले ही शुरू हो गए हों, लेकिन अब भी 650 समूह और दुकानें नीलामी से बाहर हैं। हालांकि इनमें से कई दुकानों को होल्ड पर रखा गया है, जिन्होंने आरपी से 20 प्रतिशत से ज्यादा पर आॅफर दिए हैं। कई बची हुई दुकानों के लिए बुधवार को 11वें राउंड की नीलामी आयोजित की गई।

आबकारी विभाग के अनुसार, 11वें राउंड में 21 शराब दुकानें 130.97 करोड़ रुपए में बिकीं, जबकि इनका कुल रिजर्व प्राइस (आरपी) 150.60 करोड़ रुपए था। यानी इस राउंड में नीलामी आरपी से कम दर पर हुई। वहीं 10वें और 11वें राउंड में आरपी से 20 प्रतिशत से अधिक कम दर पर आए ऑफर को फिलहाल होल्ड पर रखा गया है। इनके बारे में सरकार एक-दो दिनों  में निर्णय लेगी। जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, वहां फिलहाल आबकारी अमले द्वारा अस्थाई रूप से शराब की बिक्री की जा रही है, ताकि राजस्व प्रभावित न हो। विभाग के सामने अब भी सालाना लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जिसके लिए करीब 5,080 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाना बाकी है।

प्रदेश में कुल 3,553 शराब दुकानें हैं, जिनमें से अब तक 11 राउंड 1200 समूहों और दुकानों की नीलामी पूरी हो चुकी है। बची हुई दुकानों के लिए अब 12वें राउंड की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 3 अप्रैल दोपहर 2 बजे तक ई-टेंडर भरे जाएंगे और इसके तुरंत बाद टेंडर खोले जाएंगे।

 बीओक्यू की शर्त फिर लागू, 30 
फीसदी कम पर दे सकते हैं ऑफर

12वें राउंड में इस बार केवल ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी, यानी नीलामी (आॅक्शन) नहीं होगी। साथ ही बीओक्यू की शर्त को फिर से लागू कर दिया गया है। अब ठेकेदारों को आरपी से 30 प्रतिशत कम तक आॅफर देने की अनुमति होगी। इससे पहले के राउंड में यह सीमा हटा दी गई थी, जिसके चलते कई जगह 50 प्रतिशत तक कम आॅफर आए थे।

आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ई-टेंडर में ऑफसेट प्राइस आरक्षित मूल्य से अधिकतम 30% कम तक ही मान्य होगा। यानी 70% से कम का कोई भी ऑफर स्वीकार नहीं किया जाएगा, जिससे न्यूनतम बोली की सीमा तय की गई है।

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 10वें और 11वें चरण में प्राप्त ऐसे प्रस्ताव, जो आरक्षित मूल्य के 80% या उससे अधिक हैं, उन्हें स्वीकृति प्रक्रिया में शामिल किया जाए। वहीं 80% से कम के उच्चतम ऑफर्स को फिलहाल होल्ड पर रखा जाएगा। ऐसे आवेदकों को दोबारा ईएमडी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

समूह और इकाई स्तर पर होगी नीलामी इस चरण में शराब दुकानों की नीलामी समूह के साथ-साथ समूह में शामिल प्रत्येक दुकान के लिए अलग-अलग भी की जाएगी। राजस्व संतुलन बनाए रखने के लिए जिला समितियां सीमित संख्या में समूहों का पुनर्गठन करेंगी, जिसे आबकारी आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। जिन जिलों का आरक्षित मूल्य 200 करोड़ रुपए से अधिक है, वहां किसी भी समूह का मूल्य जिले के कुल आरक्षित मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं रखा जाएगा।

ई-टेंडर का शेड्यूल ऑनलाइन टेंडर फॉर्म डाउनलोड और ऑफर जमा करने की प्रक्रिया आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई है, जो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे तक चलेगी। टेंडर खोलने की प्रक्रिया 3 अप्रैल को दोपहर 2:05 बजे से शुरू होगी।

अब तक 1200 समूहों की नीलामी 29 मार्च तक 1200 समूहों की नीलामी पूरी हो चुकी है, जिससे लगभग 15,409.94 करोड़ रुपए का राजस्व तय हुआ है। यह आरक्षित मूल्य से 3.61% अधिक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में इसमें 24.34% की वृद्धि दर्ज की गई है।

राज्य स्तर पर 19,952.89 करोड़ रुपए के लक्ष्य में से अब तक 77.23% नीलामी हो चुकी है, जबकि करीब 5,080.35 करोड़ रुपए का कार्य अभी शेष है। विभाग को उम्मीद है कि लगातार ई-टेंडर प्रक्रिया के जरिए राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रहेगी।

अब तक की नीलामी का आंकड़ा
–  वर्ष 2026-27 लक्ष्य: 19,952 करोड़ रुपए
– कुल नीलामी: 1200 समूह
– रिजर्व प्राइस: 14,872.54 करोड़ रुपए
– प्राप्त राजस्व: 15,409.94 करोड़ रुपए
– आरपी से वृद्धि: 3.61 प्रतिशत
– पिछले वर्ष से वृद्धि: 24.34 प्रतिशत
– अभी बाकी राजस्व: 5,080 करोड़ रुपए

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