नई दिल्ली
ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप सरकार कुछ दवा कंपनियों पर टैरिफ लगाने के बारे में सोच रही है. अगर ये कंपनिया ट्रंप सरकार की शर्त नहीं मानती हैं, तो उन्हें 100 फीसदी तक टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है. खासकर उन कंपनियों पर, जो अमेरिका में अपनी दवाएं इम्पोर्ट करती हैं. इसका मतलब है कि भारत से भी अमेरिका भेजे जाने वाले दवाओं पर इसका असर पड़ सकता है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, अगर दवा निर्माता कंपनियां अमेरिका में कम कीमतों की गारंटी देने वाले समझौतों पर नहीं पहुंच पाती हैं, तो ट्रंप प्रशासन गुरुवार को ही उन पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकता है. ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आयातित ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ये शुल्क 100 प्रतिशत तक लागू हो सकता है. यह पहल व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत की गई जांच के बाद की गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एक बयान ने भारतीय शेयर बाजार के फार्मा सेक्टर में हलचल मचा दी. ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका में आने वाली ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाओं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस खबर के सामने आते ही निवेशकों में घबराहट दिखी और कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर Sun Pharmaceutical Industries पर देखा गया, जिसके शेयर करीब 4-5% तक टूटकर 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गए. वहीं, Divi’s Laboratories, Biocon, Lupin, Dr. Reddy’s Laboratories, Cipla और Zydus Lifesciences जैसे बड़े नामों में भी 2 से 4% तक की गिरावट देखने को मिली. निफ्टी फार्मा इंडेक्स भी करीब 2.5% नीचे फिसल गया।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं, तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा. उनका फोकस “मेड इन अमेरिका” को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार बढ़ाना है. यही वजह है कि इस तरह के टैरिफ को ट्रंप लगाने की तैयारी कर रहे है. हालांकि, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिखी है, वह ज्यादा सेंटिमेंट आधारित है. भारत से अमेरिका को जो दवाएं भेजी जाती हैं, उनमें ज्यादातर हिस्सा जेनरिक दवाओं का होती है. ये सस्ती दवाएं होती हैं और अभी तक टैरिफ का फोकस ब्रांडेड और पेटेंट दवाओं पर ही है. इसलिए सीधे तौर पर सभी कंपनियों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है।
किन फार्मा कंपनियों पर सबसे ज्यादा असर?
फिर भी कुछ कंपनियां ज्यादा प्रभावित दिखीं. जैसे सन फार्मा अमेरिका में कुछ स्पेशलिटी और ब्रांडेड दवाएं भी बेचती है. इसी वजह से उसके शेयरों पर दबाव ज्यादा रहा. वहीं Divi’s Laboratories और Laurus Labs जैसी कंपनियां API (एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स) बनाती हैं, जिनका निर्यात अमेरिका और यूरोप में होता है, इसलिए उनमें भी हल्की कमजोरी दिखी।
जेनरिक दवाओं का हिस्सा 90% से ज्यादा
हालांकि, एक पॉजिटिव पहलू यह भी है कि कई भारतीय कंपनियां पहले से ही अमेरिका में निवेश कर रही हैं. Biocon ने हाल ही में न्यू जर्सी में अपनी यूनिट शुरू की है. ऐसे में जिन कंपनियों का लोकल प्रेजेंस है, उन पर टैरिफ का असर सीमित रह सकता है. भारत हर साल अमेरिका को करीब 10.5 अरब डॉलर की दवाएं निर्यात करता है, जिसमें 90% से ज्यादा हिस्सा जेनरिक दवाओं का होता है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अभी निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. यह गिरावट कम समय के लिए भी हो सकती है. अगर कंपनियां अमेरिका में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं और स्ट्रैटजी में बदलाव करती हैं, तो भविष्य में इसका फायदा भी मिल सकता है।
ट्रंप का यह बयान बाजार के लिए एक झटका जरूर है, लेकिन भारतीय फार्मा सेक्टर की बुनियादी मजबूती अभी भी बरकरार है. आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि टैरिफ नीति किस हद तक लागू होती है और कंपनियां इसके अनुसार खुद को कैसे ढालती हैं।
