अमरावती
आंध्र प्रदेश के विकास और पहचान के लिए आज का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। वहां के सीएम एन. चंद्रबाबू नायडू ने मंगलवार को अमरावती को राज्य की एकमात्र स्थाई राजधानी की बनाया है। यह घोषणा 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) अधिनियम, 2026' को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद की गई है। जानकारी के लिए बता दें कि पहले हैदराबाद, प्रदेश की राजधानी थी।
संसद से राष्ट्रपति तक का सफर
हाल ही में संपन्न हुए संसद के बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने 'आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम संशोधन विधेयक 2026' पेश किया था। इस विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में भारी बहुमत से पारित किया गया। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब अमरावती को राजधानी के रूप में कानूनी और संवैधानिक वैधता प्राप्त हो गई है।
सीएम नायडू ने जताया आभार
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी खुशी साझा करते हुए लिखा "आंध्र प्रदेश की जनता की ओर से, मैं माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। उनकी मंजूरी से हमारी राजधानी का बरसों पुराना सपना आज हकीकत बन गया है।" उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और विधेयक का समर्थन करने वाले सभी सांसदों को धन्यवाद दिया। नायडू ने विशेष रूप से उन किसानों को इस जीत का श्रेय दिया, जिन्होंने राजधानी के निर्माण के लिए अपनी जमीनें दी थीं।
'तीन राजधानी' का विवाद खत्म
पिछली सरकार के दौरान आंध्र प्रदेश में तीन राजधानियों (विशाखापत्तनम, अमरावती और कुरनूल) का प्रस्ताव लाया गया था, जिससे राज्य में प्रशासनिक असमंजस की स्थिति पैदा हो गई थी। नायडू के नेतृत्व वाली TDP-NDA सरकार ने अब यह साफ कर दिया है कि राज्य का पूर्ण प्रशासनिक, विधायी और न्यायिक केंद्र केवल अमरावती ही होगा। अमरावती को अब एक अत्याधुनिक 'सिंगापुर मॉडल' शहर के रूप में विकसित करने की तैयारी है, जो राज्य के समग्र विकास और निवेश का मुख्य केंद्र बनेगा।
