ईरान का तीखा रुख: अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, वार्ता में क्यों आई रुकावट

तेहरान. 
अमेरिका और ईरान की बातचीत विफल हो चुकी है। इसके बाद तमाम बयान आ रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ का भी बयान आया है। ईरानी डेलीगेशन का हिस्सा रहे, गालिबाफ ने स्पष्ट कहाकि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने रविवार को इस बारे में बयान जारी करते हुए कहाकि ईरानी डेलीगेशन में शामिल मेरे साथियों ने बेहद सकारात्मक पहल की। गालिबाफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि लेकिन दूसरी तरफ से बातचीत में विश्वास ही नहीं दिखाया गया। वहीं, ईरान के पूर्व वित्तमंत्री जरीफ ने वार्ता खत्म होने का दोष अमेरिका पर डाला है।

ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहाकि अमेरिका ने अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की। इसी वजह से यह वार्ता विफल रही। जरीफ ने 2015 की परमाणु वार्ता में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। जरीफ ने कहाकि कोई भी वार्ता, कम से कम ईरान के साथ, केवल आपकी शर्तों के आधार पर सफल नहीं होगी। उन्होंने आगे कहाकि अमेरिका को यह सीखना होगा कि आप ईरान पर शर्तें थोप नहीं सकते। सीखने में अभी भी बहुत देर नहीं हुई है।

कूटनीति कभी खत्म नहीं होती
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहाकि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का एक जरिया है। उन्होंने कहाकि किसी भी हालात में, कूटनीतिक तंत्र को ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और हितों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहाकि कूटनीति उन लोगों के साथ खड़ी है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं और हर तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं। बाकाई ने कहाकि ये बातचीत ईरान पर थोपे गए 40-दिनों के युद्ध के बाद अविश्वास और शक के माहौल में हुई थी। उन्होंने कहाकि इसलिए, यह उम्मीद नहीं थी कि बातचीत किसी आम सहमति तक पहुंचेगी।

दोनों पक्ष लौटे अपने घर
अमेरिकी पक्ष ने वार्ता असफल रहने का कारण बताते हुए कहाकि उसने ईरान के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा। अमेरिका का प्रतिनिधित्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर कर रहे थे। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ एवं विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कुल 71 लोग शामिल थे। वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने देश लौट चुके हैं।

21 घंटे तक चली बात
वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहाकि हम पिछले 21 घंटे से बात कर रहे हैं। हमने कई अहम मुद्दों पर बात की। बुरी खबर यह है कि हमारे बीच समझौता नहीं हो सका। मुझे लगता है कि यह हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे कहा था कि आपको यहां नेक नीयत से आना होगा और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। हमने वैसा ही किया, लेकिन दुर्भाग्य से, हम कोई भी प्रगति नहीं कर पाए। उन्होंने कहाकि 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई।

अब होर्मुज पर भी सवाल
ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्रीय योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल था। दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत के बावजूद समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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