जयपुर
राजस्थान में पिछले कुछ समय से सरकारी संस्थानों और न्यायिक परिसरों को निशाना बनाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार सुबह प्रदेश की 'लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत' यानी राजस्थान विधानसभा और जयपुर-बीकानेर के जिला व सत्र न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियां घंटों तक हलकान रहीं, हालांकि सघन तलाशी के बाद कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला
विधानसभा को RDX से उड़ाने की धमकी
दहशत की शुरुआत सोमवार सुबह उस वक्त हुई जब जयपुर स्थित विधानसभा सचिवालय के आधिकारिक ईमेल पर एक संदेश प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि अगले 3 घंटे में विधानसभा भवन को आरडीएक्स से उड़ा दिया जाएगा। इस सूचना के बाद परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया और आनन-फानन में कर्मचारियों को भवन से बाहर निकाला गया। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने चप्पे-चप्पे को खंगाला, लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई विस्फोटक नहीं मिला।
जयपुर सेशन कोर्ट: सुनवाई के बीच मची भगदड़
जयपुर जिला एवं सत्र न्यायालय को भी उनके ऑफिशियल आईडी पर इसी तरह का धमकी भरा मेल प्राप्त हुआ। गौरतलब है कि सोमवार से ही अदालतों का समय बदलकर सुबह 7:30 से दोपहर 1:00 बजे तक का हुआ है। ऐसे में जिस वक्त धमकी मिली, कोर्ट परिसर अधिवक्ताओं और परिवादियों से खचाखच भरा हुआ था।
पुलिस ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरे परिसर को खाली कराया। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सुरक्षा एजेंसियों ने घंटों तक सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्च के दौरान हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया, जिससे न्यायिक कामकाज पूरी तरह प्रभावित रहा।
बीकानेर में फिर लौटी दहशत
राजधानी के साथ-साथ बीकानेर के जिला एवं सत्र न्यायालय को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली। बीकानेर में यह सूचना मिलते ही न्यायिक और प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सूचना पर बार एसोसिएशन ने तत्काल अलर्ट जारी किया। यहां भी सुरक्षा एजेंसियों ने एडवोकेट चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के कक्ष और कोर्ट रूम की बारीकी से जांच की। कई घंटों की मशक्कत के बाद जब कुछ नहीं मिला, तब जाकर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
जांच के घेरे में 'डिजिटल टेरर'
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये सभी धमकियां ईमेल के जरिए भेजी गई थीं। पुलिस अब साइबर सेल की मदद से इन ईमेल्स के आईपी एड्रेस को ट्रेस करने में जुटी है। प्राथमिक तौर पर इसे शरारत माना जा रहा है, लेकिन बार-बार महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को इस तरह निशाना बनाए जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
