Day: August 8, 2026

  • RBI New Rule: EMI डिफॉल्ट पर स्मार्टफोन होगा लॉक, भुगतान के बाद कितनी देर में खुलेगा?

    RBI New Rule: EMI डिफॉल्ट पर स्मार्टफोन होगा लॉक, भुगतान के बाद कितनी देर में खुलेगा?

    नई दिल्ली

    आजकल EMI पर स्मार्टफोन खरीदना बेहद आम हो गया है. लेकिन कई बैंक और फाइनेंस कंपनियां किस्त न चुकाने पर फोन को रिमोटली लॉक कर देती हैं. अब इस बढ़ते चलन पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सख्त नियम जारी किए हैं. नए नियमों के तहत बैंक कब किसी डिवाइस को लॉक कर सकते हैं, कौन-कौन सी सुविधाएं लॉक होने के बाद भी चालू रहेंगी और भुगतान के बाद कितनी देर में फोन अनलॉक करना होगा, यह सब तय कर दिया गया है। 

    RBI का यह नया फ्रेमवर्क 1 जनवरी 2027 से लागू होगा. यह लोन रिकवरी और रिकवरी एजेंट्स से जुड़े संशोधित दिशा-निर्देशों का हिस्सा है और पहली बार टेक्नोलॉजी आधारित रिकवरी पर विस्तार से नियम बनाए गए हैं। 

    RBI का नया नियम
    RBI ने पाया कि कई बैंक और फाइनेंस कंपनियां EMI डिफॉल्ट होने पर टेक्नोलॉजी की मदद से फाइनेंस किए गए स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप को रिमोटली लॉक कर रही हैं. हालांकि, बैंक को अपना पैसा वसूलने का अधिकार है, लेकिन RBI चाहता है कि इस तकनीक का इस्तेमाल ग्राहकों को परेशान करने या अनुचित रिकवरी के लिए न किया जाए. इसी वजह से डिवाइस लॉक करने का पूरा प्रोसेस, नोटिस, समय-सीमा और ग्राहक के अधिकार तय किए गए हैं। 

    क्या बैंक किसी भी फोन को लॉक कर सकते हैं?
    इसका एक शब्द में जवाब है- नहीं. RBI ने साफ किया है कि रिमोट लॉकिंग केवल उसी डिवाइस पर लागू होगी जिसके लिए लोन लिया गया हो। 

    अगर आपने पर्सनल लोन, कंज्यूमर लोन या किसी अन्य कारण के लिए लोन लिया है, तो बैंक आपके मौजूदा स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप को रिमोटली लॉक नहीं कर सकता है। 

    एक EMI छूटते ही फोन नहीं होगा लॉक
    RBI के नए नियमों के अनुसार, सिर्फ एक EMI मिस होने पर बैंक तुरंत फोन लॉक नहीं कर सकते हैं. डिवाइस पर पहली तरह की पाबंदी तभी लगाई जा सकती है, जब लोन अकाउंट कम से कम 30 दिन तक ओवरड्यू रहे. इसके बाद भी बैंक को स्टेप बाय स्टेप कार्रवाई करनी होगी. अगर लोन 60 दिन तक बकाया रहता है, तभी बैंक या फाइनेंस कंपनी डिवाइस को पूरी तरह लॉक कर सकती है. इसका मतलब है कि ग्राहकों को भुगतान करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा और तुरंत फोन बंद नहीं किया जा सकेगा। 

    फोन लॉक होने पर भी नहीं होगा पूरा बेकार
    RBI ने साफ निर्देश दिए हैं कि फोन पूरी तरह बेकार नहीं बनाया जा सकता है. लॉक होने के बाद भी कुछ जरूरी सुविधाएं चालू रहना अनिवार्य होगा. इनमें इनकमिंग कॉल, SMS, SOS और इमरजेंसी कम्युनिकेशन, नौकरी और काम से जुड़े जरूरी फीचर्स शामिल हैं.  इसका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि EMI लेट होने पर भी ग्राहक पूरी तरह दुनिया से कट न जाए। 

    बैंक आपका निजी डेटा नहीं देख सकते
    RBI ने प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी है. डिवाइस लॉक करने वाली टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए बैंक या फाइनेंस कंपनी सभी डेटा तक पहुंच नहीं बना सकती है. इनमें कॉन्टैक्ट लिस्ट, फोटो-वीडियो, SMS, कॉल लॉग, लोकेशन हिस्ट्री, लोन रिकवरी से असंबंधित कोई भी निजी जानकारी शामिल हैं. साथ ही, इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक को डेटा सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। 

    फोन लॉक करने से पहले नोटिस देना होगा
    फोन लॉक करने से पहले बैंक को ग्राहक को सूचना देना जरूरी होगा. लोन मंजूर करते समय ही यह साफ बताया जाएगा कि डिवाइस रिमोटली लॉक किया जा सकता है. इसके अलावा, लॉकिंग लागू करने से पहले भी ग्राहक को अग्रिम सूचना देकर बकाया चुकाने का मौका देना होगा। 

    भुगतान के बाद कितनी देर में फोन अनलॉक होगा?
    अगर ग्राहक बकाया राशि चुका देता है या लोन अकाउंट सेटल कर देता है, तो बैंक को आमतौर पर एक घंटे के भीतर डिवाइस अनलॉक करना होगा. RBI ने कहा है कि अनावश्यक देरी नहीं की जानी चाहिए. अगर भुगतान के बाद भी तय समय में फोन अनलॉक नहीं किया जाता, तो बैंक या फाइनेंस कंपनी को ग्राहक को मुआवजा देना होगा। 

    RBI के अनुसार, हर घंटे की देरी पर 250 रुपये मुआवजा मिलेगा. कुल मुआवजा बकाया लोन राशि से अधिक नहीं होगा. यह पहली बार है जब टेक्नोलॉजी आधारित रिकवरी के लिए RBI ने तय राशि का मुआवजा निर्धारित किया है. RBI ने ये भी साफ किया है कि डिवाइस लॉकिंग तकनीक ग्राहक के अन्य अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी. ग्राहक पहले की तरह लोन की प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर कर सकेगा। 

  • Indore News: गंदे पानी की समस्या होगी दूर, ₹1214 करोड़ की परियोजना से बदलेगी शहर की तस्वीर

    Indore News: गंदे पानी की समस्या होगी दूर, ₹1214 करोड़ की परियोजना से बदलेगी शहर की तस्वीर

    इंदौर

    इंदौर शहर में गंदे पानी की समस्या से राहत दिलाने के लिए नगर निगम ने 1,214.54 करोड़ रुपये की जल प्रदाय और ड्रेनेज परियोजना तैयार की है। इस योजना के तहत 30 साल पुरानी और जर्जर ड्रेनेज पाइपलाइन को शहर की 40 से अधिक बस्तियों में बदला जाएगा। भारत सरकार के अर्बन चैलेंज फंड के तहत इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और करीब 302.70 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता भी स्वीकृत की गई है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार होने के बाद इसे राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

    परियोजना में 907.74 करोड़ रुपये जल प्रदाय और 305.80 करोड़ रुपये ड्रेनेज व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार, नई पाइपलाइन बिछने से ड्रेनेज का गंदा पानी पेयजल लाइन में मिलने की समस्या खत्म होगी और हजारों परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होगा। शेष राशि राज्य सरकार और नगर निगम द्वारा जुटाई जाएगी। मंजूरी के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और चरणबद्ध तरीके से कार्य पूरा किया जाएगा।

    परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1214.54 करोड़
    भारत सरकार द्वारा आयोजित अर्बन चैलेंज फंड की एपेक्स कमेटी की बैठक में इंदौर नगर निगम द्वारा प्रस्तुत जल प्रदाय एवं ड्रेनेज परियोजना का विस्तृत परीक्षण किया गया। कमेटी ने निगम की सभी प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान कर दी है। स्वीकृत परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 1214.54 करोड़ रुपए में से 907.74 करोड़ रुपए की जल प्रदाय परियोजना और 305.80 करोड़ की ड्रेनेज परियोजनाएं शामिल हैं।

    25% राशि केंद्र देगा, बाकि राज्य शासन और निगम जुटाएगा
    अर्बन चैलेंज फंड के प्रावधानों के अनुसार कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत यानी लगभग 302.70 करोड़ रुपए केंद्रीय सहायता के रूप में प्राप्त होगा। बाकी फंड राज्य शासन और निगम को जुटाना होगा।

    शहरवासियों की दूर होगी गंदे पानी की समस्या
    निगम जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग के प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू के अनुसार, शहर की गहन और पुरानी बस्तियों में ड्रेनेज की पाइप लाइन बदलने के साथ अन्य काम करने के लिए भारत सरकार ने 302.70 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत कर दी है। ये राशि काम की प्रोग्रेस के हिसाब से टुकड़ेटु कड़े में निगम को मिलेगी। इस राशि से शहर की 40 से ज्यादा बस्तियों में जर्जर और क्षतिग्रस्त हुई ड्रेनेज की पाइप लाइन को बदला जाएगा। फिलहाल, इसकी डीपीआर बनाई जा रही है।

    गंदे पानी की समस्या से मिलेगी निजात
    बताया जा रहा है कि, जैसे ही डीपीआर बनेगी वैसे ही राज्य शासन को भेजकर मंजूरी ली जाएगी और फिर टेंडर जारी किए जाएंगे। सालों पुरानी जर्जर और क्षतिग्रस्त ड्रेनेज लाइन के बदले से शहरवासियों को जहां राहत मिलेगी, वहीं गंदा पानी आने की समस्या भी दूर होगी।

    नगर निगम ने दिया प्रजेंटेशन, एपेक्स कमेटी ने दी हरी झंडी
    बैठक के दौरान इंदौर नगर निगम ने जल प्रदाय वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण, सीवर नेटवर्क के विस्तार तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन से संबंधित विस्तृत प्रजेंटेशन प्रस्तुत किया। इसमें वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक एवं नवाचार आधारित तकनीकों के उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

    भारत सरकार द्वारा आयोजित अर्बन चैलेंज फंड की एपेक्स कमेटी ने इन जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं की जांच की। समिति ने नगर निगम की सभी प्रमुख परियोजनाओं को स्वीकृति दे दी है। इनमें 907.74 करोड़ रुपये की जल प्रदाय परियोजनाएं और 306.80 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजनाएं शामिल हैं।

    नर्मदा के चौथे चरण और सीवरेज लाइन के काम में आएगी राशि
    अर्बन चैलेंज फंड के प्रविधानों के तहत परियोजना लागत का 25 प्रतिशत यानी 302.70 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के रूप में प्राप्त होगा। इस राशि से नर्मदा के चौथे चरण के अंतर्गत जल वितरण के लिए लाइन डालने का कार्य और सीवरेज लाइन डालने का कार्य किया जाएगा।

    केंद्र सरकार ने की इंदौर की तकनीकों की सराहना
    बैठक में केंद्र शासन के अधिकारियों ने नगर निगम इंदौर द्वारा प्रस्तुत जल प्रदाय एवं सीवरेज क्षेत्र की आधुनिक, नवाचार आधारित एवं भविष्य उन्मुख तकनीकों की सराहना की। उपचारित जल के पुनः उपयोग, टर्शियरी ट्रीटमेंट प्लांट, पीपीपी मॉडल तथा भूजल संरक्षण से जुड़े प्रविधानों को अन्य शहरों के लिए भी अनुकरणीय बताया।

  • स्वतंत्रता दिवस पर बड़ी सौगात, चीन बॉर्डर के पास बसे गांवों में पहली बार रोशन होंगे घर

    स्वतंत्रता दिवस पर बड़ी सौगात, चीन बॉर्डर के पास बसे गांवों में पहली बार रोशन होंगे घर

    पिथौरागढ़

    देश जब 15 अगस्त को आजादी का पर्व मना रहा होगा, तब भारत-चीन सीमा पर बसे उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में मुनस्यारी का रडगाड़ी, बुगडियार गांव अंधेरे से आजादी का जश्न मनाएगा। चीन सीमा से 35 से 40 किमी हवाई दूरी पर स्थित इस माइग्रेशन गांव तक बिजली की लाइन बिछ गई है। ट्रांसफार्मर भी लगा दिया गया है। स्वतंत्रता दिवस पर जैसे ही इसका औपचारिक शुभारंभ होगा, वैसे ही यह क्षेत्र पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगा उठेगा।

    गर्मियों में मुनस्यारी के निचले इलाकों से जनजाति समुदाय के ग्रामीण अपने मवेशियों को लेकर रड़गाडी और बुगडियार में रहते हैं। बिजली न होने पर ग्रामीण ढिबरी, लालटेन, मोमबत्ती और सोलर लालटेन के भरोसे रातें काटने को मजबूर थे।

    लंबे समय से बिजली की थी मांग
    मल्ला जोहार विकास समिति के अध्यक्ष श्रीराम सिंह धर्मसक्तू ने कहा कि लंबे समय से इन गांवों को बिजली सेवा से जोड़ने की मांग उठ रही थी। माइग्रेशन गांवों में बिजली सेवा की सुविधा मिलने से बड़ी राहत होगी। यूपीसीएल मुनस्यारी के एसडीओ सद्दाम अली ने बताया कि रड़गाडी और बुगडियार तक लाइन बिछा दी गई है। अन्य माइग्रेशन गांवों को जल्द बिजली सेवा से जोड़ा जाएगा, यहां निर्माण कार्य जारी है।

    सुविधाओं में भारत से काफी आगे चीन के गांव
    मुनस्यारी। भारतीय गांवों में जहां सड़क, बिजली की सेवा अब पहुंच रही है। वहीं चीन ने पिछले एक दशक में सीमांत क्षेत्रों में मॉडल विलेज रणनीति के तहत बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास किया है। वहां के गांवों में चौबीसों घंटे बिजली, हाई-स्पीड इंटरनेट, पक्के दो-मंजिला मकान और सीधी सड़क कनेक्टिविटी है। वहां नागरिक आबादी को बसाने के लिए भारी सब्सिडी और सुविधाएं दी जाती हैं।

    शेष माइग्रेशन गांव भी जल्द होंगे रोशन
    मुनस्यारी। रडगाड़ी, बुगडियार के बाद माइग्रेशन गांव मिलम, लास्पा, मर्तोली, बल्जिू, बुर्फू, मापा, टोला, गनघर आदि जल्द बिजली सुविधा से जोड़े जाएंगे। योजना के तहत 21 करोड़ से लीलम से करीब 62 किमी लंबी लाइन बिछाई जानी है।

    सेना को होगा फायदा
    बिजली लाइन शुरू होने का लाभ केवल ग्रामीणों को ही नहीं सेना, आईटीबीपी और बीआरओ को होगा। दरअसल बुगडियार सुरक्षा बलों का मुख्य केंद्र है। सुरक्षा बलों को सीमा पर पहरा देने के लिए सोलर, जनरेटर के भरोसे नहीं रहना होगा।

  • पाकिस्तान की नई रणनीति! दो मुस्लिम देशों के साथ बना नया मोर्चा, ‘इस्लामिक NATO’ पर बढ़ी चर्चा

    पाकिस्तान की नई रणनीति! दो मुस्लिम देशों के साथ बना नया मोर्चा, ‘इस्लामिक NATO’ पर बढ़ी चर्चा

    नई दिल्ली

    इस्लामिक नाटो का मंच सजकर तैयार हो गया है। पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन की तर्ज पर अब सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच एक ऐसी ही साझेदारी हो रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो तीनों देश शुक्रवार को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं। जेद्दा में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की बैठक के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। भारत इस समझौते पर करीब से नजर रखेगा।

    बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही संकेत दे चुके थे कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मौजूदा रक्षा समझौते का दायरा बढ़ाकर इसमें कतर और तुर्की को भी शामिल किया जा सकता है। इसके बाद से ही इस्लामिक नाटो की चर्चाएं तेज हो गई थीं। बीते मई में पाकिस्तानी चैनल हम न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में आसिफ ने कहा था कि इस गठबंधन पर अलग-अलग स्तरों पर बातचीत चल रही है और भविष्य में इसमें कतर और तुर्की भी शामिल हो सकते हैं। गौरतलब है कि पिछले साल पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच एक बड़ा रक्षा समझौता हुआ था। इसके तहत किसी भी एक देश पर हमले को दोनों पर हमला माना जाएगा। अब इस समझौते में तुर्की भी शामिल हो सकता है।

    इस्लामिक नाटो में किसकी क्या भूमिका?
    जानकारों की मानें तो इस समूह में तीनों देशों की भूमिका भी तय हो गई है। इस्लामिक नाटो को खड़ा करने में जहां सऊदी अरब वित्तीय सहायता देगा, वहीं पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल और मैनपावर देगा। तुर्की अपनी सैन्य विशेषज्ञता और घरेलू रक्षा उद्योग का योगदान दे सकता है। अंकारा स्थित थिंक टैंक TEPAV के रणनीतिकार निहत अली ओजकान के मुताबिक, "जैसे-जैसे अमेरिका इस क्षेत्र में अपने और इजरायल के हितों को प्राथमिकता दे रहा है, बदलते समय में ये देश अपने दोस्तों और दुश्मनों की पहचान करने के लिए नए तरीके विकसित कर रहे हैं।”

    भारत के लिए खतरा?
    इस्लामिक नाटो का यह विचार भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक संवेदनशील स्थिति पैदा करता है। कंगाली और आर्थिक मंदी झेल रहा पाकिस्तान इस ब्लॉक के जरिए खुद को इस्लामिक दुनिया में एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है। वहीं तुर्की भी कश्मीर मुद्दे पर जहर उगलता रहा है। अब तुर्की और पाकिस्तान की नजदीकी से भारत को खतरा हो सकता है।

    वहीं भारत और सऊदी अरब के बीच संबंधों की बात करें तो पिछले कुछ सालों में रिश्ते मजबूत हुए हैं। दूसरी तरफ पाकिस्तान संग सऊदी की साझेदारी के बाद भारत ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ भी अहम रक्षा समझौता किया है। अब भारत के लिए यह देखना अहम होगा कि सऊदी अरब इस समझौते को केवल अपने ईरान-विरोधी एंगल तक सीमित रखता है, या पाकिस्तान इसे भारत-विरोधी एजेंडे के लिए इस्तेमाल करने में कामयाब होता है।

  • PM किसान योजना की 24वीं किस्त से पहले बड़ी खबर, पात्र किसानों के खाते में आएंगे ₹4,000; जानें कैसे

    PM किसान योजना की 24वीं किस्त से पहले बड़ी खबर, पात्र किसानों के खाते में आएंगे ₹4,000; जानें कैसे

    नईदिल्ली 
    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के लिए बड़ी खबर है. बहुत से किसानों को अभी भी 23वीं किस्त के 2,000 रुपये नहीं मिले हैं. किसी का पेमेंट टेक्निकल दिक्कत की वजह से अटक गया तो किसी के डॉक्यूमेंट्स या e-KYC पूरे नहीं थे. ऐसे में अब किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि अगर पिछली किस्त नहीं मिली तो क्या अगली किस्त भी अटक जाएगी? और क्या अगली किस्त के साथ पिछली किस्त के 2,000 रुपये भी मिलेंगे?

    अगर आपकी 23वीं किस्त किसी वजह से अटक गई थी, तो पिछली किस्त की राशि अगली किस्त के साथ मिल सकती है. ऐसे में कुछ किसानों के खाते में 2,000 रुपये की जगह सीधे 4,000 रुपये आ सकते हैं। 

    किन किसानों को मिल सकते हैं 4,000 रुपये?
    पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को साल में 6,000 रुपये मिलते हैं. यह रकम 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है. हालांकि ऐसा नहीं है कि 24वीं किस्त में 4,000 रुपये सभी किसानों को नहीं मिलेंगे. यह रकम उन पात्र किसानों को मिल सकती है, जिनकी 23वीं किस्त किसी टेक्निकल या दूसरी वजह से रुक गई थी. अगर 23वीं किस्त का पैसा अटक गया था और अब आपकी सभी जरूरी काम पूरी हो गई हैं, तो पिछली 2,000 रुपये की राशि अगली किस्त के 2,000 रुपये के साथ मिल सकती है। 

    पीएम किसान योजना के नियमों के अनुसार, जिस वजह  से किस्त के पैसे अटके थे वो समस्या दूर होते ही रोकी गई किस्त और उसके बाद की सभी बकाया किस्तों का पैसा एक साथ दे दिया जाएगा. यानी आप पिछली किस्त के साथ-साथ आने वाली सभी अगली किस्तों का लाभ पाने के पूरे हकदार होंगे। 

    इन वजहों से अटक सकते हैं किस्त के पैसे
    किसानों की किस्त रुकने की कई वजहें हो सकती हैं. सबसे बड़ी वजह e-KYC का पूरा न होना है. इसके अलावा जमीन का सत्यापन यानी लैंड सीडिंग न  होने, आधार और बैंक खाते में गड़बड़ी या बैंक डिटेल गलत होने की वजह से भी पैसा अटक सकता है.अगर आपके आवेदन में नाम, अकाउंट नंबर, IFSC या दूसरी जानकारी गलत है, तो इसे ठीक कराना जरूरी है। 

    अगली किस्त समय पर चाहिए तो e-KYC जरूर कराएं
    PM Kisan का लाभ लेने के लिए e-KYC जरूरी है. जिन किसानों की e-KYC अधूरी है, उन्हें अगली किस्त का फायदा नहीं मिलेगा. किसान PM Kisan के ऑफिशियल पोर्टल या नजदीकी CSC सेंटर पर जाकर e-KYC पूरी कर सकते हैं। 

    लैंड सीडिंग भी है जरूरी
    अगर e-KYC पूरी है लेकिन पैसा फिर भी नहीं आया है, तो Land Seeding का स्टेटस जरूर चेक करें. जमीन का रिकॉर्ड आपके नाम और सरकारी रिकॉर्ड से सही तरीके से मैच होना जरूरी है. अगर लैंड सीडिंग में दिक्कत है, तो अपने क्षेत्र के पटवारी, लेखपाल या संबंधित राजस्व अधिकारी से संपर्क कर जमीन का रिकॉर्ड वेरीफाई कराएं। 

    आधार और बैंक खाते की डिटेल भी चेक करें
    पीएम किसान की राशि DBT के जरिए सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. इसलिए बैंक अकाउंट का आधार से लिंक होना और DBT एक्टिव होना जरूरी है. बैंक खाते की डिटेल में गलती होने पर भी किस्त अटक सकती है. इसके अलावा योजना के तहत Farmer ID और सरकारी रिकॉर्ड में नाम की सही जानकारी भी जरूरी है। 

    PM Kisan की 24वीं किस्त कब आएगी?
    अभी सरकार ने पीएम किसान योजना 24वीं किस्त की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है. हालांकि, पिछली किस्तों के चार महीने के अंतराल वाले पैटर्न को देखें तो 24वीं किस्त अक्टूबर 2026 में आने की उम्मीद है. अंतिम तारीख सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी। 

    अगली किस्त के पैसे आएंगे या नहीं, ऐसे चेक करें स्टेटस
    किसान PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर Know Your Status ऑप्शन से अपना स्टेटस चेक कर सकते हैं. रजिस्ट्रेशन नंबर डालने के बाद e-KYC, Land Seeding और Eligibility Status जैसी जानकारी देखी जा सकती है. अगर इनमें से किसी के आगे 'No' दिखाई दे रहा है, तो इसका मतलब है कि आपका कोई न कई जरूरी काम पूरा नहीं किया है. इसे जल्दी से ठीक करा लें। 

    23वीं किस्त नहीं मिली तो क्या करें?
    अगर 23वीं किस्त का पैसा अब तक नहीं मिला है, तो घबराने की जरूरत नहीं है. पहले अपने e-KYC, लैंड सीडिंग, आधार और बैंक अकाउंट की जानकारी चेक करें. इसमें जरूरी सुधार करने के बाद पात्र किसानों को अटकी हुई राशि अगली किस्त के साथ मिलने की संभावना है. लेकिन अगर फिर बी कोई दिक्कत आता है तो किसान PM Kisan की आधिकारिक हेल्पलाइन या जिला कृषि कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।