मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व नौरादेही को भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता, अब होगी रिसर्च

सागर
 देश में सबसे ज्यादा भेड़िये मध्यप्रदेश में है. खास बात ये है कि मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) भारतीय भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के तौर पर जाना जाता है. मध्यप्रदेश को वुल्फ स्टेट का दर्जा दिलाने में नौरादेही का अहम योगदान है. खास बात ये है कि यहां पर भेड़ियों पर रिसर्च भी चल रही है. जबलपुर स्थित स्टेट फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (SFRI) पर रिसर्च कर रही है.

तीन भेड़ियों पर होगी रिसर्च
2023 में शुरू हुआ ये प्रोजेक्ट दो साल के लिए है. इसी कड़ी में नौरादेही टाइगर रिजर्व ने यहां के भेड़ियों पर रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (National Tiger Conservation Authority) से मांगी है. अनुमति मिलते ही नौरादेही टाइगर रिजर्व के तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा और रिसर्च को आगे बढ़ाया जाएगा. इस रिसर्च का उद्देश्य बाघ और तेंदुए जैसे जानवरों के बीच भेड़ियों का जीवन, उनका पसंदीदा खान पान, रहवास और उनकी दिनचर्या के बारे में जानना है.

नौरादेही भारतीय भेड़िये और ग्रे वुल्फ का प्राकृतिक आवास
नौरादेही को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिले फिलहाल एक साल ही बीता है. अगर नौरादेही की बात करें, तो टाइगर के पहले इसकी पहचान भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में थी. नौरादेही को 1975 में भेड़ियों के प्राकृतिक आवास के रूप में अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया था. करीब 1197 वर्ग किमी वाले नौरादेही वन्य जीव अभ्यारण्य के लोगो (Logo) में भी ग्रे वुल्फ नजर आता था.

नौरादेही टाइगर रिजर्व में भेड़ियों पर रिसर्च

देशभर में 2022 में भेड़ियों की गणना करायी गयी थी. जिसमें सबसे ज्यादा भेड़ियों के साथ मध्यप्रदेश को पहला स्थान मिला था. मध्‍य प्रदेश में 772, राजस्‍थान में 532 और गुजरात में 494 भेड़िए पाए गए थे. इसके अलावा अन्य राज्यों में इनकी संख्या काफी कम थी. भारतीय वन्य जीव संस्थान द्वारा की गयी इस गणना में भारत में कुल 3170 भेड़िए पाए गए थे. जिनमें से करीब 20 प्रतिशत मध्य प्रदेश में ही थे.

भेड़ियों पर दो साल की रिसर्च नौरादेही में
राज्य वन अनुसंधान संस्थान द्वारा फरवरी 2024 में भारतीय भेड़ियों पर रिसर्च नौरादेही टाइगर रिजर्व में शुरू की गयी थी. जानकार बताते हैं कि, ''मध्यप्रदेश में ग्रे वुल्फ का सबसे बड़ा आवास नौरादेही टाइगर रिजर्व है. यहां पर भेड़िए आसानी से देखे जा सकते हैं. यहां बाघों की संख्या बढ़ने के बाद ये रिसर्च शुरू की गयी. जिसका एक उद्देश्य ये भी है कि बाघों के यहां आने के बाद इनके रहन-सहन,जीवन, खान पान पर क्या असर हुआ है.''

तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की मांगी अनुमति
नौरादेही टाइगर रिजर्व में चल रही रिसर्च के लिए तीन भेड़ियों को पहली बार रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति एनटीसीए (नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी) से मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. एसएफआरआई के शोधकर्ता वैज्ञानिकों ने तय किया है कि नौरादेही में भेड़िए झुंड में रहते हैं. अलग-अलग झुंड वाले तीन भेड़ियों का चयन करके रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा. रेडियो काॅलर पहनाने के बाद उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी.

इस शोध से टाइगर रिजर्व के मैनेजमेंट में मिलेगी मदद
नौरादेही टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. एए अंसारी बताते हैं कि, ''मध्य प्रदेश शासन के आदेश पर SFRI (State Forest Research Institute) ने भेड़ियों के अध्ययन के लिए शोध परियोजना स्वीकृत की. दो वर्ष में होने वाले इस अध्ययन के तहत तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाकर मॉनीटरिंग की जानी है. इसका उद्देश्य नौरादेही का जो एरिया है, इसमें भेड़ियों के व्यवहार पर अध्ययन किया जाए. कैसे वह शिकार करता है, शिकार में क्या पसंद है, कब और कितने दिन में शिकार करता है. इनके रहवास, ये किस तरह झुंड में रहते हैं और कैसी इनकी दिनचर्या है. इन सबका अध्ययन करने के लिए रेडियो काॅलर पहनाया जाएगा.''

''इससे हमें ये फायदा होगा कि नौरादेही टाइगर रिजर्व का मैनेजमेंट करने में हमे मदद मिलेगी. इसलिए तीन भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाने की अनुमति मांगी गयी है. अनुमति मिलते ही एसएफआरआई और टाइगर रिजर्व प्रबंधन ये काम करेगा. मध्यप्रदेश में पहली बार भेड़ियों को रेडियो काॅलर पहनाया जा रहा है.''

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