करीला धाम मेले में इस बार प्रयागराज महाकुंभ की तरह व्यवस्थाएं करने की तैयारी की गई

अशोकनगर
 मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के करीलाधाम पर रंग पंचमी पर मेला आयोजित होता है। इस मेले को लेकर प्रशासन में तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। मेले की व्यवस्थाओं को लेकर पत्रकारों से चर्चा में कलेक्टर ने पूरी जानकारी दी। करीला धाम मेले में इस बार प्रयागराज महाकुंभ की तरह व्यवस्थाएं करने की तैयारी की गई है।

कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस बार मेले में नजर रखने 100 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। वहीं, आने वाले श्रद्धालुओं के पीने के पानी के लिए अस्थाई नल, टंकी और नए बोर भी कराए गए हैं। साथ ही 250 पानी के चलित टैंकर भी रहेंगे। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर अस्थाई अस्पताल और 12 एंबुलेंस भी तैनात रहेंगी।

हर साल आयोजित होता है मेला

उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष रंगपंचमी पर अशोकनगर जिले के करीला धाम पर तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी रंगपंचमी पर यह मेला आयोजित होगा। जिसमें देश दुनिया से लाखों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। मेले में व्यवस्थाएं जुटाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्थाएं की जा रही है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस की तरफ से कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है। वहीं, सुरक्षा के लिए जिले के साथ-साथ बाहर से भी पुलिस बल की मांग की गई है।

महिलाओं के लिए रुकने बनेगा विशाल पंडाल

मेले में इस बार प्रशासन ने नवाचार करते हुए महिलाओं के लिए एक विशाल पांडाल भी बनाया जा रहा है। जिसमें महिलाओं को रोकने के लिए व्यवस्थाएं होंगी। साथ ही वहीं गद्दे और अन्य व्यवस्थाएं भी की जा रही है। यहां प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।

20 लाख श्रद्धालुओं के आने का अनुमान

कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी ने बताया कि प्रदेश का यह मेला विश्व प्रसिद्ध है। इसमें देश दुनिया से तीन दिन में लगभग 20 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को देखते हुए प्रशासन ने कई तैयारियां की है। इसमें सड़क व्यवस्था, पेयजल व्यवस्था, बिजली व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही यहां तीन दिन समस्त जिले के जिला अधिकारी करीला में रहकर व्यवस्थाएं देखेंगे।

यात्री किराया होगा निर्धारित

कलेक्टर ने मेले में नवाचार करते हुए कुंभ मेले की तर्ज पर तैयारी के प्रयास किया जा रहे हैं। इसके तहत मेले की ओर जाने वाले समस्त बस संचालकों के लिए निर्देश दिए गए हैं। जिसमें कहा गया है कि वह करीला के लिए प्रति यात्री किराया फिक्स करते हैं। इससे अतिरिक्त कोई भी बस वाला ज्यादा पैसे नहीं लेना। यदि कोई एक्स्ट्रा पैसे लेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ अस्थाई शौचालय में भी सफाई कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा रही है।

रंग पंचमी पर करीला धाम में लगेगा विशाल मेला

देशभर में होली और रंग पंचमी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। जिसके लिए अभी से ही तैयारी हो चुकी है। यह फाल्गुन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। अभी से ही बाजार रंग-बिरंगे गुलाल, कपड़े, पिचकारी, मिठाइयों से सज-धज कर तैयार हैं। लोग घरों की साफ-सफाई में जुटे हुए हैं। बच्चों में खासकर ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है। इस दिन से हिंदू के नए साल का शुभारंभ होता है। लोग अपनी पुरानी दुश्मनी को भूलाकर एक-दूसरे को गले लगाते हैं और नए सिरे से रिश्ते की शुरुआत करते हैं। वहीं, अशोकनगर जिले के करीला धाम में हर साल की तरह इस साल भी रंग पंचमी के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाएगा।

मुंगावली तहसील अंतर्गत जसैया गांव में स्थित करीला धाम में माता जानकी (सीता जी) और उनके पुत्र लव-कुश की जन्मस्थली है, जहां हर साल रंग पंचमी के अवसर पर यहां भव्य मेला आयोजित किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु आकर दर्शन करते हैं।

लाखों श्रद्धालु पहुंचने की उम्मीद

मंदिर पुजारी के अनुसार, इस ऐतिहासिक मेले की खासियत यह है कि यहां ऋषि वाल्मीकि की दिव्य गुफा के द्वार वर्ष में केवल एक बार इसी दिन खुलते हैं, जहां श्रद्धालु दीपक और अखंड जलती धूनी के दर्शन कर सकते हैं। रंग पंचमी के अवसर पर इस पवित्र स्थल पर लाखों श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। इस वर्ष आयोजित होने वाले मेले में करीब 25 से 30 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इस दिन श्रद्धालु माता जानकी और लव-कुश की प्रतिमाओं के दर्शन करेंगे। मान्यता है कि इस गुफा के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।

CCTV से रखी जाएगी निगरानी

करीला ट्रस्ट समिति के अध्यक्षों ने बताया कि 19 मार्च को रंग पंचमी का मेला लगेगा। जिसके लिए शासन-प्रशासन द्वारा सभी तैयारिया पूर्ण कर ली गई है। इसमें पेयजल व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था, स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ प्रांगण में मंदिर में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में पूरा आयोजन होगा, ताकि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना ना घटे।

पौराणिक मान्यता

रामायण काल से जुड़ा यह स्थान ऋषि वाल्मीकि की तपस्थली माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने माता सीता का त्याग किया था, तब वे यहीं ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में आकर रहने लगी थीं। यहीं पर लव और कुश का जन्म हुआ। बड़े होने के बाद उन्होंने अपनी शिक्षा एवं शस्त्र विद्या की शिक्षा प्राप्त की। इस धाम से जुड़ी एक विशेष मान्यता यह भी है कि जब लव-कुश का जन्म हुआ था, तब स्वर्ग से अप्सराएं यहां उतरीं और उन्होंने नृत्य किया। इसी परंपरा के तहत, आज भी श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां राई नृत्य करवाते हैं।

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