कुलगाम में आतंकियों की मदद करने वाले दो सहयोगी गिरफ्तार, सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई

पुलवामा

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी है. पुलवामा में सक्रिय आतंकवादी के घरों को भारतीय सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया है. नई कार्रवाई में घाटी के अंदर सक्रिय आतंकियों के दो और घरों को ध्वस्त कर दिया गया है. जून 2023 से लश्कर के सक्रिय कैडर एहसान अहमद शेख के दो मंजिला घर को सुरक्षा बलों ने आईईडी का उपयोग करके उड़ा दिया है. वह पुलवामा के मुर्रान का रहने वाला है.

ऐसी ही एक अन्य कार्रवाई में 2 साल पहले लश्कर में शामिल हुए शाहिद अहमद के घर को शोपियां के चोटीपोरा इलाके में विस्फोट कर उड़ा दिया गया है. पहलगाम हमले के बाद पिछले 48 घंटे में कुल 6 आतंकियों के घरों को ध्वस्त किया जा चुका है.

आतंकियों के 5 घर ध्वस्त
इसके अलावा, कल रात कुलगाम के क्विमोह में ज़ाकिर गनी के तीसरे घर को सुरक्षा बलों ने ध्वस्त कर दिया, वह 2023 में लश्कर में शामिल हो गया था. पहलगाम आतंकी हमले के बाद से सक्रिय लश्कर कैडर के आतंकियों के कुल 5 घरों को उड़ा दिया गया है.

जिसकाभारतीय सेना मुंहतोड़ जवाब दिया। इसी बीच खबर मिली है कि कुलगाम जिले के कैमोह इलाके में सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक, कुलगाम के थोकरपोरा में पुलिस ने दो आतंकी सहयोगियों को गिरफ्तार किया। जवनोपन का कहना है कि, ये लोग हमले में आतंकवादियों के मददगार है। पहलगाम हमले के बाद सेना और पुलिस आतंकियों की कमर तोड़ने में लगी है। कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के घरों को ध्वस्त किया जा रहा है।

लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी एहसान अहमद शेख का दो मंजिला घर पुलवामा के मुर्रान में IED से उड़ा दिया गया। वह जून 2023 से सक्रिय था। वहीं, शाहिद अहमद का घर शोपियां के चोटीपोरा में विस्फोट से ढहा दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक पांच आतंकियों के घर तोड़े जा चुके हैं।

LoC पर तनाव और भारत की जवाबी कार्रवाई

25-26 अप्रैल 2025 की रात को पाकिस्तानी सेना ने LoC पर बिना उकसावे के कई जगहों पर फायरिंग की। यह सीजफायर उल्लंघन 2021 के बाद से कम देखा गया था, लेकिन पहलगाम हमले के बाद तनाव बढ़ गया है। भारतीय सेना ने बयान जारी कर कहा, "हमारे सैनिकों ने छोटे हथियारों से उचित जवाब दिया। भारतीय पक्ष से कोई हताहत नहीं हुआ।" सेना ने संयम बरतते हुए जवाबी कार्रवाई की।

गौरतलब है कि, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन मीडो में हुए हमले में 26 लोग मारे गए। शुरुआती जांच में पता चला कि 5-7 आतंकी शामिल थे, जिन्हें पाकिस्तान में ट्रेनिंग दी गई थी। दो स्थानीय आतंकियों ने उनकी मदद की। हमले की जिम्मेदारी रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जो लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा है। जांच में पाकिस्तान से लिंक की पुष्टि हुई है।

    आदिल गोजरी (बिजबेहरा)
    आसिफ शेख (त्राल)
    अहसान शेख (पुलवामा)  
    शाहिद कुट्टे (शोपियां)
    जाकिर गनी (कुलगाम)
    हारिस अहमद (पुलवामा)

शुक्रवार की रात सुरक्षा बलों ने कुलगाम के क्विमोह में जाकिर गनी के घर को उड़ा दिया, वह 2023 में लश्कर में शामिल हुआ था. इसके साथ ही सुरक्षा बलों ने बिजबेहरा में सुरक्षा बलों ने आदिल थोकर के घर को उड़ा दिया. वहीं, त्राल में कल सुरक्षा बलों ने आसिफ शेख के घर को उड़ा दिया.

पुलवामा में आतंकी का घर ध्वस्त करने से पहले पहलगाम हमले में शामिल स्थानीय आतंकी आदिल हुसैन थोकर के अनंतनाग जिले के बिजबेहरा के गोरी इलाके में स्थित घर को सुरक्षा बलों ने बम से उड़ा दिया था.

आदिल थोकर उर्फ ​​आदिल गुरी के रूप में पहचाने जाने वाले इस आतंकी पर पहलगाम की ​बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में पाकिस्तानी आतंकवादियों की मदद करने का आरोप है.

वहीं, इस हमले में शामिल दूसरे स्थानीय आतंकी आसिफ शेख के त्राल स्थित घर को जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया. सैन्य सूत्रों ने बताया कि स्टील टिप वाली गोलियों, एके-47 राइफलों और बॉडी कैमरा पहने हुए लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के चार आतंकवादियों के एक समूह ने 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों के बीच हिंदुओं को निशाना बनाया और उन पर गोलियों की बौछार कर दी. इस आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें से ज्यादातर पर्यटक थे और भारत के अलग-अलग राज्यों से जम्मू-कश्मीर घूमने पहुंचे थे.

आतंकवादियों में दो स्थानीय भी शामिल थे. सूत्रों ने बताया कि दोनों स्थानीय आतंकियों की पहचान बिजबेहरा निवासी आदिल हुसैन थोकर और त्राल निवासी आसिफ शेख के रूप में हुई है.

टेरर कैंप में ली थी ट्रेनिंग

सैन्य सूत्रों के मुताबिक, आदिल ने साल 2018 में अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए वैध तरीके से पाकिस्तान की यात्रा की थी. अपने पाकिस्तान प्रवास के दौरान उसने टेरर कैम्प में ट्रेनिंग ली थी और पिछले साल जम्मू-कश्मीर लौटा था. पहलगाम हमले के कुछ चश्मदीदों ने बताया​ कि कुछ आतंकी आपस में पश्तून भाषा में बातचीत कर रहे थे. सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि हमले में शामिल सभी आतंकवादी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के हैं. हालांकि द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने भी इस हमले की जिम्मेदारी ली है. उन्होंने कहा कि टीआरएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक मुखौटा आतंकी संगठन है, जिसका इस्तेमाल हमले को एक स्वदेशी समूह के काम के रूप में दिखाने के लिए किया गया.

 

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