मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा- जल-संरक्षण प्रशासन के साथ प्रत्येक नागरिक की सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी

भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि "जल स्रोतों का संरक्षण केवल प्रशासन का कार्य नहीं, यह प्रत्येक नागरिक की सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी है।" जल संकट आज वैश्विक चिंता का विषय है और भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह विषय और भी अधिक गंभीर हो जाता है। मध्यप्रदेश सरकार ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के माध्यम से इस चुनौती को अवसर में बदलने की प्रेरणास्पद पहल की है। जल-संरक्षण केवल अभियान नहीं, अपितु पर्यावरणीय पुनरुत्थान और सांस्कृतिक चेतना का समवेत संगम है।

जन-भागीदारी से जल संरचनाओं को नवजीवन
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में 30 अप्रैल से प्रारंभ किया गया “जल गंगा संवर्धन’’ अभियान एक बहु-स्तरीय आयोजन है। इसका उद्देश्य राज्य के जल स्रोतों जैसे नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को पुनर्जीवित करना और उन्हें सतत रूप से संरक्षित करना है। यह अभियान सरकारी योजना से आगे बढ़कर अब जन-आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश की नदियों, तालाबों, झीलों, पुराने कुओं, बावड़ियों और जल-धाराओं को सहेज कर उन्हें पुनर्जीवन देना है। इन जल स्रोतों की गाद निकासी, सफाई, सीमांकन और पुनर्जीवन की कार्य-योजना बनाई गई है, जिसमें जन-भागीदारी से श्रमदान भी किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक लोग स्वयं आगे आकर जल स्रोतों की सफाई कर रहे हैं। नदियों के किनारे विशेष रूप से देशी प्रजातियों के पौधों का रोपण कर जल-स्तर बढ़ाने और मृदा क्षरण को रोकने का कार्य किया जा रहा है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य किया जा रहा है। स्कूल और कॉलेजों में जल-संरक्षण पर जन-जागरण अभियान, रैलियाँ, निबंध प्रतियोगिताएँ, जल संवाद और ‘जल प्रहरी’ जैसी अवधारणाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। ड्रोन से सर्वेक्षण, वैज्ञानिक तरीके से जलग्रहण क्षेत्र की मैपिंग, भू-जल पुनर्भरण तकनीकों का उपयोग आदि भी अभियान का हिस्सा हैं।

इस अभियान के अंतर्गत प्रदेश के प्रत्येक जिले में हज़ारों जल स्रोतों की सफाई की जा रही है। अभियान में राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व के साथ ही जन-प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, स्वयं-सेवकों, एनजीओ और आम नागरिकों की सामूहिक सहभागिता और सक्रियता ने अभियान को जन-अभियान बना दिया है। ‘जल दीप यात्रा’, ‘जल संकल्प’ कार्यक्रमों और धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से जल-संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। इस कार्य में म.प्र. जन-अभियान परिषद भी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

जल गंगा संवर्धन अभियान में हजारों जल स्रोत पुनर्जीवित होने लगे हैं। वर्षाकाल में इसके प्रभावी परिणाम देखने को मिलेंगे। अनेक स्थानों पर भूजल स्तर में सुधार के संकेतों के साथ ही जलग्रहण क्षेत्रों में बढ़ती हरियाली और मिट्टी में नमी का स्तर सकारात्मक परिवर्तन लायेगा। अभियान से समाज में सकारात्मक मनोवृत्ति का विकास भी हुआ है। अभियान अंतर्गत संचालित गतिविधियों से जन-मानस में जल-संरक्षण के लिए नई चेतना और व्यवहार में बदलाव देखा जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत स्थायी जल प्रबंधन संरचनाओं जैसे चेक डैम, परकोलेशन टैंक, जल पुनर्भरण, कुएं-बावड़ी आदि के पुनरुद्धार की योजना बनाई जा रही हैं। अभियान के सफल संचालन और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग और मूल्यांकन प्रणाली विकसित की गई है। सभी गतिविधियों की जीआईएस आधारित ट्रैकिंग और इंपैक्ट वैल्युएशन से परिणामों की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।

अभियान को स्थायी जन-आंदोलन बनाने के लिए राज्य सरकार इसे एक समयबद्ध आयोजन मात्र न मानते हुए जन-सहयोग से सतत अभियान के रूप में विकसित कर रही है। जल गंगा संवर्धन अभियान मध्यप्रदेश के जल संसाधनों का संरक्षण करने की दिशा में एक दूरदर्शी पहल है। साथ ही यह सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्य और नागरिक कर्त्तव्यों को जोड़ने वाला एक व्यापक अभियान भी है। जन-भागीदारी से जन्मा यह अभियान भविष्य की पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और जल-सम्पन्न मध्यप्रदेश देने की ओर एक सशक्त कदम है।

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