DCP सुनीति को संयुक्त राष्ट्र में प्रतिनियुक्ति, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी, UP पुलिस का करेंगी प्रतिनिधित्‍व

लखनऊ
उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईपीएस अधिकारी सुनीति को संयुक्त राष्ट्र (UN) में प्रतिनियुक्ति की मंजूरी मिल गई है। गृह मंत्रालय (MHA) से स्वीकृति मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार आगामी चार दिनों में उन्हें कार्यमुक्त कर देगी। फिलहाल सुनीति नोएडा कमिश्नरेट में पुलिस उपायुक्त (DCP) के पद पर तैनात हैं।

कौन हैं आईपीएस सुनीति?
मूल रूप से चंडीगढ़ की रहने वाली सुनीति का प्रशासनिक सफर अनुशासन, सेवा भाव और प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा है। उन्होंने कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन जल्द ही उन्होंने तकनीकी क्षेत्र को छोड़कर सिविल सेवा का रास्ता चुना और भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुईं।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने गौतम बुद्ध नगर में एएसपी (ग्रामीण) और एसपी (साइबर क्राइम) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। खासकर साइबर अपराध की रोकथाम और तकनीकी जांच में उनकी दक्षता के लिए उन्हें विभाग में एक अलग पहचान मिली।

उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए गर्व का क्षण
संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्था में प्रतिनियुक्ति किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी जिम्मेदारी और सम्मान का अवसर होती है। सुनीति की यह नियुक्ति न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश पुलिस बल के लिए भी गर्व का विषय है।

चंडीगढ़ की रहने वाली हैं सुनीति
तेज तर्रार आईपीएस सुनीति का जन्म चंडीगढ़ में 18 नवंबर, 1986 को हुआ। वह एक मिडिल क्लास में पली-बढ़ी हैं। उनके पिता सुरेश कुमार इंजीनियर और मां अनिला गृहिणी हैं। सुनीति ने अपनी शुरुआती शिक्षा सरकारी स्कूल से शुरू की। पांचवीं क्लास के बाद साइकिल से स्कूल जाना उनके जीवन में एक जरूरी बदलाव लेकर आया। माता-पिता ने सुनीति को हमेशा खुलकर जीने की आजादी दी। उन्होंने वर्ष 2002 में सीबीएसई बोर्ड से दसवीं की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन में उत्तीर्ण की।

2013 में तीसरे प्रयास में क्रैक किया यूपीएससी एक्‍जाम
सुनिति ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से कम्प्यूटर साइंस से बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नोएडा की एक कंपनी में जॉब भी की है। तब उनका सालाना पैकेज 10 लाख रुपये था। सुनीति के लिए नौकरी तो थी, लेकिन सुकून नहीं था। उनके अंदर देश सेवा करने का जुनून सवार हुआ। सुनीति ने कंपनी के अमेरिका भेजे जाने के ऑफर को ठुकराते हुए यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी और परीक्षा क्रैक कर अपने सपने को साकार कर आईपीएस बन गईं। यूपीएसएसी की परीक्षा में दो बार सुनीति को विफलता हाथ लगी। लेकिन इसके बाद वह अपनी मेहनत और लगन से तीसरे प्रयास में 2013 में सफल हो गईं।

पहली पोस्टिंग मथुरा में
आईपीएस बनने के बाद सुनीति की पहली पोस्टिंग 2015 में यूपी के मथुरा जिले में हुई। फिर सहारनपुर में एसीपी और और सीओ सिटी के पद पर जिम्मेदारी दी गई। इस बीच उन्होंने बतौर सीओ सिटी सहारनपुर में हत्या व लूट के कई संगीन मामलों को सॉल्व किया। उनके कामों को देखते हुए शासन ने सुनीति को नोएडा में एसपीआरए का पद सौंपा। आईपीएस सुनीति ने अपने निडर अंदाज से 50-50 हजार रुपये के दो कुख्यात इनामी अपराधियों को एनकाउंटर में गिरफ्तार किया। जरायम की दुनिया में कुख्यात भाटी गैंग के कई शूटरों को पकड़कर उन्होंने सलाखों के पीछे पहुंचाया।

नोएडा के अपराधों पर लगाया लगाम
गौतमबुद्ध नगर में क्राइम की स्थितियां अन्य जिलों से अलग थीं। यहां गुटों के बीच आपसी संघर्ष और संगठित अपराध के नेटवर्क का बोलबाला था। सुनीति ने क्राइम के नेटवर्क को तोड़ने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी निपुणता और सफल कार्रवाई के बाद वर्ष 2019 में उनको औरैया एसपी के रूप में जिले की कमान सौंपी गई। आईपीएस सुनीति के लिए उनके जीवन में यह पहला अवसर था जब उन्हें पूरे जिले की कमान उनके हाथ में थी। कानून व्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती भी थी, जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाया।

वकील हत्‍याकांड में एमएलसी को करवाया अरेस्‍ट
इस दौरान आईपीएस सुनीति के जीवन में अहम मोड़ आया। मार्च 2020 में नारायणपुर क्षेत्र में एक अधिवक्ता और उनकी बहन की हत्या हो गई। इस घटना ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी। सुनीति ने क्राइम स्थल पर पहुंचकर जब मामले की गहराई से जांच पड़ताल की, तो पता चला कि जमीन विवाद के चलते एमएलसी कमलेश पाठक पीछे से इस घटना को अंजाम दिया था। आईपीएस सुनिति ने घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाए और एमएलसी को गिरफ्तार किया।

औरैया में हेल्‍पलाइन नंबर जारी करवाया
महिला सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए आईपीएस अधिकारी ने जनपद में एक हेल्पलाइन भी जारी की। इसके अतिरिक्त, महिला आईपीएस अधिकारी ने औरैया में एक पांच वर्ष की मासूम बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में तेजी से कार्रवाई की। उन्होंने महज 24 घंटे के भीतर दोषी को अरेस्ट कर 30 दिन के अंदर सजा दिलवा दी। यह मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली बार इतनी तेजी से सुलझाया गया था। यह उनके काम के प्रति समर्पण का परिचायक था।

2016 में साथी इंजीनियर के साथ किया प्रेम विवाह
महिला आईपीएस सुनीति को कठिन मेहनत और देश सेवा के लिए डीजीपी के सिल्वर और गोल्ड मेडल से नवाजा जा चुका है। अपने कार्यकाल के दौरान 2013 बैच की आईपीएस सुनीति ने औरैया के बाद एसपी अमरोहा, एसपी कानपुर देहात, एसपी एडमिन और डीसीपी गौतमबुद्ध नगर जैसे अन्य पद भी संभाले हैं। आईपीएस सुनीति ने अपने साथी इंजीनियर के साथ वर्ष 2016 में प्रेम विवाह किया। इस निर्णय में परिवार ने उनका साथ दिया। उनके पति एक आईटी कंपनी में प्राइवेट जॉब करते है।

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