छतरपुर में 5वीं तक पढ़ीं हैं कर्नल सोफिया,एयर स्ट्राइक की ब्रीफिंग के बाद भाई को कॉल कर बोलीं- कैसा लगा, धमाका कर दिया न

 छतरपुर
 भारतीय सेना ने बीती रात पाकिस्तान में अलग-अलग 9 ठिकानों में एयर स्ट्राइक कर जवाबी हमला किया। इस हमले की जानकारी देने के लिए सेना ने बुधवार की सुबह प्रेस ब्रीफिंग की। प्रेस को ब्रीफ करने के दौरान सेना में कर्नल सोफिया कुरैशी (Sophia Qureshi), विंग कमांडर व्योमिका सिंह (Vyomika Singh) के साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री मौजूद रहे। प्रेस ब्रीफिंग करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी का संबंध छतरपुर के नौगांव बुंदेलखंड (Madhya Pradesh) से है।

कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म 1976 में पुणे में हुआ। जन्म के बाद सोफिया के पिता परिवार को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर के नौगांव में शिफ्ट हो गए। इनका पुस्तैनी मकान नौगांव में ही है। सोफिया ने प्राथमिक शिक्षा नौगांव में ही हासिल की। उन्होंने पहली से तीसरी कक्षा तक नौगांव के जीटीसी स्कूल से पढ़ाई की। कर्नल सोफिया नौगांव में पली बढ़ी। पिता फौज में होने के कारण उनका स्थानांतरण होता रहा।

कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम चर्चा में आते ही मध्य प्रदेश का सीना भी गर्व से फूल गया। जैसे ही ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना की प्रेस ब्रीफिंग हुई और सोफिया कुरैशी ने पत्रकारों को संबोधित किया तो पूरे नौगांव के साथ ही प्रदेशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। चचेरे भाई मोहम्मद रिजवान कुरैशी ने बताया कि सोफिया ने नौगांव के शासकीय आदर्श प्राथमिक शाला जीटीसी में पढ़ाई की है। वहीं रिजवान कुरैशी ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की और ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की। उन्होंने कहा कि भारत ने मुहंतोड़ जवाब दिया है। हमें गर्म है।

सोफिया कुरैशी ने बड़ौदा में आगे की पढ़ाई कर सेना ज्वाइन की। सोफिया की शादी सेना में कर्नल तजुद्दीन से हुई है। सोफिया के पिता ताज मोहम्मद कुरैशी भी आर्मी में थे। पिता से लेकर चाचा, दादा, चचेरी बहन और चचेरा भाई सेना के माध्यम से देश की सेवा कर रहे हैं।

मिशन पूरा हुआ, कैसा लगा, धमाका कर दिया न।

कर्नल सोफिया कुरैशी का जन्म रंगरेज मोहल्ले में 12 दिसंबर 1975 को हुआ। उनकी प्राथमिक शिक्षा नौगांव के शासकीय जीटीसी प्राथमिक स्कूल से हुई। नौगांव में उनके चाचा का परिवार रहता है।

बहन ने परिवार का सम्मान बढ़ाया सोफिया के चचेरे भाई मैकेनिकल इंजीनियर मोहम्मद रिजवान ने दैनिक भास्कर से बात करते हुए कहा, सोफिया कर्नल बन चुकी है। उसने नौगांव में रहकर एक से पांच तक जीटी स्कूल में पढ़ाई की। नौगांव शहर के लोगों को बेटी पर गर्व है।

रिजवान ने कहा, भारतीय सेना ने पाकिस्तान को जो मुंहतोड़ जवाब दिया है, उससे हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। पूरी दुनिया को आपरेशन सिंदूर की जानकारी बहन सोफिया ने दी, इससे परिवार का सम्मान और बढ़ गया है। आतंकवादियों ने हमारे टूरिस्ट्स को मारा था। भारत ने 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइल दागी हैं। यह बहुत जरूरी था। पुलवामा आतंकी हमले में भी हमारे कई जवान शहीद हुए थे। भारत ने बहुत सुन लिया, अब हमारी सेना मुंहतोड़ जवाब दे रही है।

सोफिया का पूरा परिवार भारतीय सेना में सोफिया के पिता ताज मुहम्मद कुरैशी बीएसएफ में सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। उनके चाचा इस्माइल कुरैशी और वली मुहम्मद भी बीएसएफ में सूबेदार रहे हैं। पिता की नौकरी के कारण सोफिया की आगे की पढ़ाई बड़ौदा और रांची में हुई।

बड़ौदा में पढ़ाई पूरी होने के बाद सोफिया का चयन भारतीय सेना में हुआ। वे लेफ्टिनेंट से कैप्टन, फिर झांसी में मेजर और गांधीनगर में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर रहीं। वर्तमान में वे कर्नल के पद पर सेवारत हैं। उनके पति ताजुद्दीन कुरैशी भी सेना में मेजर हैं।

'बेटी ने बहनों-माताओं के सिंदूर का बदला लिया' सोफिया के पिता ताज मोहम्मद कुरैशी ने कहा, हमारी बेटी ने देश के लिए बहुत बड़ा काम किया है, हमें उस पर गर्व है। पाकिस्तान को नष्ट कर देना चाहिए। मेरे दादा, पिता और मैं सभी सेना में था। अब बेटी सेना में है।

मां हलीमा कुरैशी ने कहा, बेटी ने बहनों और माताओं के सिंदूर का बदला ले लिया है। सोफिया पिता और दादा के पदचिह्नों पर चलना चाहती थीं। बचपन में ही कहती थी कि सेना में जाना है।

सोफिया ने पहले भी किया देश का नेतृत्व सोफिया ने 2016 में एक्सरसाइज फोर्स-18 में भारतीय टीम का नेतृत्व किया। यह भारत का सबसे बड़ा विदेशी सैन्य अभियान था। इसमें वह एकमात्र महिला कमांडर थीं। सोफिया ने 6 साल तक संयुक्त राष्ट्र के शांति रक्षा अभियानों (Peacekeeping Operations) में सेवा दी।

नौगांव से सोफिया का रिश्ता
मल्टीनेशनल फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज में भारतीय सेना का नेतृत्व कर चुकीं सोफिया कुरैशी का जन्म नौगांव के रंगरेज मोहल्ले में हुआ. उनके पिता ताज मोहम्मद कुरैशी BSF में सूबेदार के पद से रिटायर हुए हैं.

सोफिया का जन्म 12 दिसंबर 1975 को हुआ. उनकी प्राथमिक शिक्षा नौगांव के शासकीय जीटीसी प्राथमिक स्कूल में हुई. इसके बाद उनके पिता का स्थानांतरण बड़ौदा, रांची और फिर बड़ौदा हुआ, जिसके कारण सोफिया की शिक्षा तमाम स्थानों पर हुई.

सोफिया के चाचा इस्माइल कुरैशी और वली मोहम्मद भी बीएसएफ में सूबेदार के पद पर कार्यरत थे, जबकि उनके पिता ताज मोहम्मद भी सेना से रिटायर हुए. इस कारण उनके घर में शुरू से ही देशभक्ति का माहौल रहा. सेना में जाने की प्रेरणा सोफिया को उनके परिवार से मिली.

सोफिया कुरैशी ने बड़ौदा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होकर सेना में चयन प्राप्त किया. इसके बाद वे लेफ्टिनेंट बनीं, फिर पदोन्नति के साथ कैप्टन, झांसी में मेजर और गांधीनगर में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में कार्यरत रहीं. वर्तमान में वे कर्नल के पद पर सेना में देश की सेवा कर रही हैं.

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