भोपाल में आयोजित होगा 10वां वार्षिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉन्फ़्रेंस वैसोकॉन 2025

भोपाल में आयोजित होगा 10वां वार्षिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉन्फ़्रेंस वैसोकॉन 2025

10 और 11 मई को देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ होंगे एकत्र; वेसकुलर ईवेंट और ब्लीडिंग पर होगी चर्चा

भोपाल,
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल इस सप्ताहांत एक प्रतिष्ठित चिकित्सा आयोजन की मेज़बानी करने जा रही है। 10 और 11 मई को होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में आयोजित होने जा रही “वैसोकॉन 2025” नामक दो दिवसीय वार्षिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कॉन्फ़्रेंस में देशभर से वरिष्ठ डॉक्टर, शोधकर्ता और विशेषज्ञ जुटेंगे। यह आयोजन भोपाल इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एवं गैस्ट्रोकेयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल द्वारा किया जा रहा है और इसमें गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एवं लिवर से जुड़ी जटिल वेसकुलर स्थितियों पर चर्चा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में इंडियन सोसायटी ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एम पी चैप्टर , इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ग्रेटर भोपाल ब्रांच, इंडियन सोसाइटी ऑफ वैस्कुलर एंड इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी (एमपी चैप्टर), एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन एम पी चैप्टर, भोपाल हेमेटोलॉजी सोसाइटी और भोपाल सर्जन क्लब का सहयोग प्राप्त है। आयोजन गैस्ट्रोकेयर फाउंडेशन के तत्वावधान में किया जा रहा है, जो मध्यप्रदेश में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और संबद्ध रोगों की जानकारी एवं शोध को प्रोत्साहित करने वाला एक प्रमुख संगठन है।

कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में संक्रमण और कैंसर के साथ-साथ ब्लीडिंग (रक्तस्राव) और थ्रोम्बोसिस (खून का थक्का जमना) मानव जीवन के लिए अत्यंत गंभीर और घातक परिस्थितियाँ बन चुकी हैं। चाहे शरीर का कोई भी अंग प्रभावित हो, इन दोनों स्थितियों के मूलभूत सिद्धांत समान रहते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इन विषयों पर निरंतर समीक्षा और अद्यतन जानकारी आवश्यक है। बीते वर्षों में रक्त प्रबंधन, डायग्नोस्टिक तकनीकों और संवहनी रोगों के उपचार में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष के कॉन्फ़्रेंस का मुख्य विषय रखा गया है: “वैसोकॉन – जीआई ट्रैक और लिवर में वेसकुलर ईवेंट: सही समय पर पहचानें और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करें।”

यह वार्षिक कॉन्फ़्रेंस, जो हर वर्ष संस्थान के स्थापना दिवस पर आयोजित होती है, बुनियादी विज्ञान और नवीनतम चिकित्सा शोध को चिकित्सीय अभ्यास दिशानिर्देशों के रूप में प्रस्तुत करने का एक अनूठा मंच है। दो दिवसीय इस कॉन्फ़्रेंस में व्याख्यान, पैनल चर्चा, संगोष्ठी, वाद-विवाद, केस स्टडीज़ और वीडियो वर्कशॉप्स के माध्यम से प्रतिभागियों को उपयोगी और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा। इस बार, पारंपरिक लाइव डेमोन्स्ट्रेशन के स्थान पर उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो वर्कशॉप्स रखी गई हैं, ताकि प्रतिभागियों को एक अधिक प्रभावी और संरचित लर्निंग अनुभव मिल सके।
कॉन्फ़्रेंस में देश के विभिन्न भागों से गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, जीआई सर्जन, हेमेटोलॉजिस्ट, इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट और एंडोस्कोपिस्ट आमंत्रित किए गए हैं, जो अपने अनुभव, रिसर्च और क्लिनिकल केस प्रस्तुत करेंगे। यह कॉन्फ़्रेंस विशेष रूप से जीआई ट्रैक और लिवर से जुड़ी संवहनी समस्याओं पर केंद्रित है, जो आज की चिकित्सा में लगातार उभरते हुए क्षेत्र हैं।
कॉन्फ़्रेंस की मुख्यतः ब्लीडिंग और थ्रोम्बोसिस जैसे जटिल चिकित्सकीय मुद्दों का बहुआयामी विश्लेषण शामिल है। इसमें पीटी-आईएनआर (PT INR) की व्याख्या और उपयोगिता, थ्रोम्बोइलास्टोग्राफी का समयबद्ध और उपयुक्त उपयोग, बड़े पैमाने पर ब्लीडिंग में रक्त एवं रक्त उत्पादों का तर्कसंगत प्रयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। वेरिसील और नॉन-वेरिसील अप्पर जीआई ब्लीडिंग, बच्चों में रेक्टल ब्लीडिंग, पोर्टल वेन थ्रोम्बोसिस की जटिलताएँ, प्रक्रियात्मक ब्लीडिंग का प्रभावी प्रबंधन, तथा मेसेंटेरिक इस्किमिया में सर्जरी बनाम इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी जैसे विशिष्ट क्लिनिकल निर्णयों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। इसके अतिरिक्त बुड-चियारी सिंड्रोम में आईआर की उभरती भूमिका, एलजीआई और छोटी आंत से ब्लीडिंग, एंटीकोएग्यूलेशन या एंटीप्लेटलेट थेरेपी के मरीजों में ब्लीडिंग का प्रबंधन, हीमोपेरिटोनियम, हीमोक्लिप्स का सर्वोत्तम उपयोग, और ब्लीडिंग से पहले एंडोस्कोपी सुइट की तैयारी जैसे व्यावहारिक विषय शामिल होंगे। आधुनिक तकनीकों के संदर्भ में कॉटरी सेटिंग्स, एआई की भूमिका, और विशेष परिस्थितियों में एंटीकोएग्यूलेशन का उपयोग भी विस्तृत चर्चा के केंद्र में रहेगा। चिकित्सकों और इंटेंसिविस्ट के दृष्टिकोण से जीआई ब्लीडिंग के मामलों की केस-आधारित समीक्षा कॉन्फ़्रेंस को और भी समृद्ध बनाएगी।
कॉन्फ़्रेंस का एक विशेष सत्र कार्सिनोमा विषय पर केंद्रित होगा, जिसमें चर्चा की जाएगी कि भारत में पेट के कैंसर की निगरानी कितनी आवश्यक है, किन पॉलिप्स को हटाया जाना चाहिए और बायोप्सी के लिए कौन-सी रणनीति अपनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही वीडियो वर्कशॉप के माध्यम से ब्लीडिंग और थ्रोम्बोसिस के एंडोस्कोपिक, सर्जिकल और रेडियोलॉजिकल प्रबंधन की तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।
विशिष्ट आमंत्रित अतिथि वक्ताओं डॉ. एस.के. सरीन (दिल्ली), डॉ एस के आचार्य (भुवनेश्वर), डॉ. ए.सी. आनंद (भुवनेश्वर), डॉ. एस.पी. मिश्रा (प्रयागराज), डॉ. राजेश पुरी (दिल्ली), डॉ. मोहन राम चंदानी (हैदराबाद), डॉ. उमेश जलिहाल (बेंगलुरु), डॉ. सोनल अस्थाना (बेंगलुरु), डॉ. नीरज सर्राफ (दिल्ली), डॉ. कौशल मदान (दिल्ली), डॉ. बी.एस. रवींद्र (बेंगलुरु), डॉ. अमर मुकुंद (दिल्ली), डॉ. ज़हीर नबी (हैदराबाद), डॉ. जयंत सामंता (चंडीगढ़), डॉ. राहुल भार्गव (दिल्ली), डॉ. प्रवीण शर्मा (दिल्ली), डॉ. नितिन शेट्टी (मुंबई), डॉ. वेंकट अय्यर (भावनगर), डॉ. जगदीश आर. सिंह (हैदराबाद), डॉ. पवन के. अदला (हैदराबाद), और डॉ. प्रीतम नाथ (भुवनेश्वर) जैसे नाम शामिल है।

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