ईओडब्ल्यू ने अब तक हरमीत सलूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी और विजय जैन को गिरफ्तार किया, 8 आरोपी अभी तक पकड़ से बाहर

रायपुर
अभनपुर तहसील क्षेत्र के तत्कालीन एसडीएम निर्भय साहू, तहसीलदार शशिकांत कर्रे, राजस्व निरीक्षक रोशनलाल वर्मा, पटवारी दिनेश पटेल के अलावा गोबरानवापारा के तत्कालीन नायब तहसीलदार लखेश्वर प्रसाद किरण, पटवारी नायकबांधा जीतेंद्र लहरे, पटवारी बसंती घृतलहरे, लेखराम पटेल ऐसे नाम हैं, जिनके खिलाफ छत्तीसगढ़ के चर्चित भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाले में ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज किया है. लेकिन इन लोगों के फरार होने की वजह से घोटाले की जांच अटकी हुई है.

इस घोटाले में ईओडब्ल्यू ने अब तक हरमीत सलूजा, उमा तिवारी, केदार तिवारी और विजय जैन को गिरफ्तार किया है. इन चारों को रिमांड पर लेकर ईओडब्ल्यू पूछताछ कर चुकी है. लेकिन ईओडब्ल्यू अब तक घोटाला की जड़ तक पहुंच नहीं पाया है. घोटाला की शुरुआत कैसे और कहां से हुई, यह सबसे बड़ा सवाल है, जिसका खुलासा तभी हो पाएगा, जब सभी फरार निलंबित अधिकारी-कर्मचारी ईओडब्ल्यू की गिरफ्त में आएंगे.

NHAI अफसर भी शंक के दायरे में
इस प्रोजेक्ट का नक्शा एनएचएआई द्वारा तैयार किया गया था. इस नक्शा के आधार पर प्रभावित किसानों की जमीनों का अधिग्रहण कर उन्हें मुआवजा बांटा गया है. इस तरह अधिसूचना जारी होने से पहले अगर प्रोजेक्ट का नक्शा लीक हुआ है, तो यह संभावना जताना भी गलत नहीं होगा कि नक्शा एनएचएआई से लीक हुआ है. सवाल यह है कि नक्शा लीक हुआ है या फिर कराया गया. अगर कराया गया है, तो इस घोटाले में एनएचएआई के कुछ अफसरों के भी शामिल होने की भी संभावना है.

क्या लीक हुआ था नक्शा
जानकार बताते हैं कि भारत माला परियोजना की अधिसूचना जारी होने के बाद बैक डेट पर प्रभावित किसानों की जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़े में बांटकर उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर चढ़ा दिया गया, जिससे जमीन अधिग्रहण के रूप में कई गुना ज्यादा मुआवजा राशि का वितरण किया जा सके. जांच रिपोर्ट में बैक डेट पर किसानों की जमीन को टुकड़ों में बांटने का उल्लेख किया गया है, लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि अधिसूचना जारी होने के पहले ही जमीनों का बटांकन कर दिया गया हो. अगर ऐसा हुआ है तो इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अधिसूचना जारी होने से पहले ही प्रोजेक्ट का नक्शा लीक हुआ होगा, जिसका फायदा निलंबित हुए अधिकारी-कर्मचारियों के साथ भू-माफिया ने उठाया.

किसानों की भी मिलीभगत
भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला में अब तक यह बातें सामने आई है कि प्रभावित किसानों की जमीनों को टुकड़ों में बांटकर उन्हें कई गुना अधिक मुआवजा दिलाया गया है. मुआवजा की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंची भी है, लेकिन उसके बाद से सभी के खातों के ऊपर के मिले लाखों-करोड़ों रुपए निकाल लिए गए हैं. ये रुपए किसने निकाले, कैसे निकाले, इसकी भी जांच की जा रही है.

14 नए संदिग्धों से होगी पूछताछ
भारतमाला परियोजन में भूअर्जन के नाम पर 48 करोड़ रुपए घोटाला किए जाने के आरोप में ईओडब्ल्यू एसीबी की टीम ने जिन पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, उनसे पूछताछ में घोटाले से जुड़े 14 और संदिग्धों के नाम मिले हैं. इनमें जमीन दलाल से लेकर राजस्व विभाग के कर्मचारी और अफसर शामिल हैं. ईओडब्लू, एसीबी इन्हें नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब कर सकती है. इन संदिग्धों में ज्यादातर जगदलपुर, गरियाबंद तथा धमतरी जिले के रहवासी हैं.

बढ़ सकती है घोटाले की रकम
भारतमाला परियोजना के लिए भू-अर्जन के नाम पर घोटाले की रकम 48 करोड़ रुपए है. ऐसे में गरियाबंद, जगदलपुर सहित धमतरी में भारतमाला परियोजना के नाम पर घोटाला किया गया होगा तो घोटाले की रकम कई गुना और बढ़ सकती है. ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ जाएगा.

एक ही पैटर्न की आशंका
भारतमाला परियोजना के लिए किन इलाकों का भू-अर्जन किया जाना है, इसकी जानकारी लीक होने के बाद जमीन दलाल के साथ जमीन कारोबारी भी सक्रिय हो गए. इसके बाद जमीन दलाल और जमीन कारोबारियों ने राजस्व विभाग के अफसर, पटवारी, आरआई से साठगांठ कर किसानों से कम दर पर जमीन खरीदी और उसे टुकड़ों में बांटकर मोटी कमाई की. रायपुर के बाद जिन और नई जगहों पर किए गए भू-अर्जन में रायपुर पैटर्न में ही गड़बड़ी किए जाने की आशंका है.

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