अमेरिकी वॉरफेयर विशेषज्ञ- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत सिर्फ युद्धभूमि में ही नहीं जीता, टेक्नोलॉजी रेफरेंडम में भी मारी बाजी

वाशिंगटन
एक प्रमुख अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ ने गुरुवार को कहा कि तीव्र और बहुआयामी सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन सिंदूर' ने न केवल सीमा पार सक्रिय आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर किया, बल्कि यह भारतीय रक्षा प्रणाली में आए व्यापक बदलाव का प्रतीक भी बना। अर्बन वॉरफेयर के शीर्ष विशेषज्ञ जॉन स्पेंसर ने 'भारत का ऑपरेशन सिंदूर: युद्ध के मैदान में चीनी हथियारों की परीक्षा और भारत की जीत' शीर्षक से अपने व्यापक विश्लेषण में स्वीकार किया है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' सिर्फ़ एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि एक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, बाजार के लिए एक संकेत और एक रणनीतिक खाका था। स्पेंसर ने लिखा, "भारत ने दुनिया को दिखाया कि आधुनिक युद्ध में आत्मनिर्भरता कैसी होती है और साबित किया कि 'आत्मनिर्भर भारत' आलोचनाओं के बीच भी काम करता है।"

उन्होंने लिखा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारत की स्वदेशी रूप से विकसित हथियार प्रणालियों का मुकाबला पाकिस्तान द्वारा तैनात चीनी-आपूर्ति वाले प्लेटफार्मों से हुआ और भारत ने सिर्फ़ युद्ध के मैदान में ही जीत हासिल नहीं की, बल्कि वह प्रौद्योगिकी रेफरेंडम में भी विजयी रहा। जो सामने आया वह सिर्फ़ जवाबी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि 'मेक इन इंडिया' और आत्मनिर्भर भारत के दोहरे सिद्धांतों के तहत निर्मित एक राष्ट्रीय शस्त्रागार की रणनीतिक शुरुआत थी। वर्तमान में मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट में अर्बन वॉरफेयर अध्ययन के चेयर और अर्बन वॉरफेयर प्रोजेक्ट के सह-निदेशक स्पेंसर ने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान "भारत की संप्रभु शक्ति" के सामने "पाकिस्तान की झूठी निर्भरता" कुछ भी नहीं थी, जिसने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर आतंकी ढांचे को ध्वस्त कर दिया था।

स्पेंसर ने लिखा, "अपने द्वारा डिजाइन किए गए, बनाए गए और तैनात किए गए सटीक उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए, युद्ध के मैदान पर बेजोड़ नियंत्रण के साथ भारत ने एक संप्रभु शक्ति के रूप में लड़ाई लड़ी। पाकिस्तान ने एक प्रॉक्सी बल के रूप में लड़ाई लड़ी, जो चीनी हार्डवेयर पर निर्भर था, जो उत्कृष्टता के लिए नहीं, बल्कि निर्यात के लिए बनाया गया था। चुनौती मिलने पर ये प्रणालियां विफल हो गईं, जिससे इस्लामाबाद की रक्षात्मक मुद्रा के पीछे का रणनीतिक खोखलापन उजागर हुआ।" स्पेंसर ने यह भी बताया कि कैसे भारत का एक आधुनिक रक्षा शक्ति में परिवर्तन 2014 में शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मेक इन इंडिया' पहल शुरू की। उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट था: विदेशी हथियारों के आयात पर निर्भरता कम करना और एक विश्व स्तरीय घरेलू रक्षा उद्योग का निर्माण करना।

उन्होंने कहा, "नीति ने संयुक्त उद्यमों को प्रोत्साहित किया, रक्षा क्षेत्र में 74 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को खोला और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र के निर्माताओं को घर पर ही परिष्कृत सैन्य हार्डवेयर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। कुछ ही वर्षों में, ब्रह्मोस मिसाइल, के9 वज्र हॉवित्जर (तोप) और एके-203 राइफल जैसी प्रणालियां भारत के अंदर ही बनाई जा रही थीं। इनमें से कई का उत्पादन प्रौद्योगिकी साझेदारी के साथ किया जा रहा था, लेकिन घरेलू नियंत्रण भी बढ़ रहा था।"

प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करते हुए उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे कोविड-19 महामारी और चीन के साथ गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद 'आत्मनिर्भर भारत' सिर्फ़ एक आर्थिक नीति से बढ़कर एक राष्ट्रीय सुरक्षा सिद्धांत बन गया। उन्होंने कहा, "भारत ने प्रमुख रक्षा आयातों पर चरणबद्ध प्रतिबंध लगाए, सशस्त्र बलों को आपातकालीन खरीद शक्तियां दीं और स्वदेशी अनुसंधान, डिजाइन और उत्पादन में निवेश बढ़ाया। साल 2025 तक, भारत ने रक्षा खरीद में घरेलू सामग्री को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया है और अब लक्ष्य दशक के अंत तक इसे 90 प्रतिशत करना है।" उनका मानना ​​है कि भारत के नए सिद्धांत की परीक्षा 22 अप्रैल को पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा जम्मू-कश्मीर की बैसरन घाटी में 26 लोगों (25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक) की हत्या के बाद हुई।

इसके बाद स्पेंसर विस्तार से बताते हैं कि कैसे भारत के हथियार पाकिस्तान पर भारी पड़े। रूस के साथ संयुक्त रूप से विकसित और अब बड़े पैमाने पर भारत में निर्मित, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल रडार स्टेशनों और मजबूत बंकरों जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला करने के लिए किया गया था।

स्पेंसर कहते हैं, "इसकी गति और कम रडार क्रॉस-सेक्शन के कारण इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है।" रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारत डायनेमिक्स द्वारा विकसित जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल ने ड्रोन, क्रूज मिसाइलों और विमानों सहित कई हवाई खतरों के लिए समन्वित प्रतिक्रिया को सक्षम किया। इसे 'आकाशतीर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' के साथ एकीकृत किया गया था, जो एक एआई-संवर्धित वायु रक्षा नेटवर्क है जो रियल टाइम डेटा का संलयन प्रदान करता है। देश की पहली स्वदेशी रूप से विकसित एंटी-रेडिएशन मिसाइल रुद्रम-1 को भी पाकिस्तानी जमीनी रडार को शांत करने और नियंत्रण रेखा (एलओसी) के प्रमुख क्षेत्रों में स्थितिजन्य चेतावनी को कम करने के लिए तैनात किया गया था।
 

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