प्रदेश में पूरे मई हुई बारिश, आज भी 25 जिलों में अलर्ट, जानें अगले चार दिन कैसा रहेगा मौसम

भोपाल

प्रदेश में पूरे मई महीने बारिश हुई, अब जून में मानसून पहुंचने की संभावना है। आज 25 से अधिक जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। 4 जून तक आंधी-बारिश का अलर्ट है। कई शहरों में दिन-रात के पारे में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है।

मध्य प्रदेश में पूरे मई महीने बारिश हुई अब जून में मानसून पहुंचने की संभावना है। आज 25 से अधिक जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी टर्फ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम की एक्टिविटी है। इस वजह से अगले चार दिन यानी, 4 जून तक आंधी-बारिश का अलर्ट है। कई शहरों में दिन-रात के पारे में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। उमस भी बढ़ जाएगी।

7 से 10 जून के बीच पहुंच सकता है मानसून
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मध्य प्रदेश में मानसून 7 से 10 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। यदि पिछले 10 साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो मानसून के एंटर होने से पहले प्रदेश में तेज गर्मी का असर रहता है। सबसे ज्यादा ग्वालियर-चंबल गर्म रहता है, जबकि भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग भी जमकर तपते हैं। जून के आखिरी दिनों में ही टेम्प्रेचर से थोड़ी राहत मिलने लगती है। हालांकि, जून में रात का टेम्प्रेचर 8 से 10 डिग्री तक लुढ़क जाता है। अबकी बार भी ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है।

पूरे में महीने हुई बारिश, 53 जिले भीगे
पूरे मई महीने में मध्यप्रदेश में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा, जब प्रदेश के किसी न किसी जिले में आंधी-बारिश न हुई हो। एमपी में ऐसा पहली बार हुआ। भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर-जबलपुर समेत कुल 53 जिले भीग गए। सिर्फ निवाड़ी ही ऐसा जिला रहा, जहां बूंदाबांदी तो हुई, लेकिन दर्ज नहीं हो सकी। दूसरी ओर, मई महीने में बारिश के कई रिकॉर्ड भी टूटे। इंदौर में 139 साल में सबसे ज्यादा 4.6 इंच पानी गिरा। वहीं, उज्जैन में सबसे ज्यादा बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना। मई के आखिरी दिन भी उमरिया और बालाघाट जिले में बारिश हुई। इसे मिलाकर इस महीने करीब 2 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य बारिश से 7 गुना अधिक है। इस महीने की सामान्य बारिश 7 मिमी है।

सबसे पहले जानिए, मई में गर्मी का मिजाज इस साल अप्रैल में जितनी गर्मी थी, उतनी मई में नहीं रही। अप्रैल में कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। पिछले सालों की डेटा स्टडी से पता चलता है कि मई में निवाड़ी के पृथ्वीपुर, छतरपुर के नौगांव, खजुराहो, निवाड़ी, ग्वालियर, राजगढ़, दतिया, टीकमगढ़, सतना, दमोह, उज्जैन, गुना, शाजापुर, खंडवा, खरगोन जैसे कई शहरों में पारा 46 से 48 डिग्री सेल्सियस या इसके पार पहुंच चुका है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

प्रदेश के किसी भी शहर में दिन का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक नहीं पहुंचा। नौतपा में भी कम ही गर्मी रही। नौगांव, खजुराहो, टीकमगढ़, ग्वालियर, दमोह, शिवपुरी जैसे शहरों में ही पारा 40 डिग्री के पार पहुंचा। बाकी शहरों में इससे काफी नीचे रहा।

क्यों रहा ऐसा मौसम? मई में भीषण गर्मी की बजाय आंधी-बारिश होने के पीछे क्या वजह रही, इस बारे में मौसम वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्रन बताती हैं कि मई की शुरुआत से आखिरी तक प्रदेश में साइक्लोनिक सर्कुलेशन, वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) और टर्फ की एक्टिविटी देखने को मिली। लगातार सिस्टम एक्टिव होते रहे। इस वजह से आंधी-बारिश का दौर भी चलता रहा। आखिरी दिन भी कुछ जिलों में मौसम बदला रहा।

रिकॉर्ड टूटे, ऐसे समझे

    इंदौर में साल 1886 के मई महीने में 107.7 मिमी यानी 4.2 इंच पानी गिरा था जबकि इस बार 114.8 मिमी यानी 4.6 इंच पानी गिर गया है। इस तरह 139 साल में इंदौर का रिकॉर्ड टूट गया है।
    उज्जैन में मई की बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना है। इस बार 111.8 मिमी यानी 4.3 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। साल 2021 में कुल मासिक बारिश 65 मिमी (2.5 इंच) हुई थी। इस हिसाब से उज्जैन में मई की बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड बना है।
    देवास में मई में कभी भी इतनी बारिश नहीं हुई। यहां पर इस बार 6.3 इंच से ज्यादा पानी गिर गया।

प्रदेश में अगले चार दिन ऐसा रहेगा मौसम

    1 जूनः ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी, दतिया, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, नीमच, मंदसौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, बुरहानपुर और बैतूल में तेज आंधी चलने और बारिश की संभावना है।

    2 जून: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, देवास, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, डिंडौरी, बालाघाट, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और शिवपुरी में आंधी-बारिश का अलर्ट है।

    3 जून: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, मुरैना, भिंड,दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, दमोह, मंडला, बालाघाट, सिवनी, पांढुर्णा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, सागर, विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, सीहोर, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर, झाबुआ, रतलाम, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, सतना, मैहर, मऊगंज, कटनी, जबलपुर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी और नीमच में बारिश होने की संभावना है। यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा तक हो सकती है।

    4 जून: इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, रीवा, सतना, कटनी, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, खंडवा, बुरहापुर, आगर-मालवा, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में आंधी-बारिश का अलर्ट है।

 

जानिए कहां कितना बरसता है पानी और कब आती है गर्मी

भोपाल

राजधानी भोपाल में जून के पहले पखवाड़े तक तेज गर्मी का असर आमतौर पर देखा जाता है। पिछले 10 वर्षों के मौसम (MP Weather Update) आंकड़ों के मुताबिक, 15 जून से पहले तापमान कई बार 45 डिग्री सेल्सियस से पार पहुंच चुका है। वहीं, रात के समय न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस तक भी दर्ज किया गया है।

बारिश के आंकड़ों की बात करें तो, साल 2020 में भोपाल में रिकॉर्डतोड़ 16 इंच बारिश हुई थी, जबकि पिछले साल भी शहर में 5.5 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। यानी राजधानी में जून के महीने में गर्मी के साथ-साथ बारिश का ट्रेंड भी बना रहता है।
इंदौर

इंदौर में जून के महीने में गर्मी की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रहती है। पिछले चार वर्षों (2020 से 2023) के आंकड़ों के अनुसार, दिन का अधिकतम तापमान 39.6°C से 41.1°C के बीच रहा है। इस दौरान औसतन 20% तक मानसूनी बारिश हो जाती है। पिछले साल जून में 4 इंच से ज्यादा पानी गिरा था, जिससे मौसम सुहावना हो गया था।
ग्वालियर

ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी का असर रहता है। 2019 में तापमान 47.8°C तक पहुंच गया था, जबकि सामान्यत: यह 45°C से 46°C के बीच रहता है। मानसून की एंट्री से पहले यहां भीषण गर्मी का असर देखा जाता है। पिछले साल जून में 6 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी, जिससे आंशिक राहत जरूर मिली थी।
जबलपुर

जबलपुर को मध्यप्रदेश में मानसून (MP Weather Update) का प्रवेश द्वार माना जाता है। 2014 से 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक, यहां जून में कुल कोटे की लगभग 30% तक बारिश हो जाती है। पिछले साल यहां 10 इंच से ज्यादा पानी बरसा था। इस साल भी जबलपुर के दक्षिणी हिस्से से ही मानसून के प्रवेश की संभावना जताई जा रही है।
उज्जैन

उज्जैन में भी जून के महीने में अच्छी बारिश का रिकॉर्ड रहा है। 2015 से 2023 के बीच यहां 2.5 से 8 इंच तक वर्षा हो चुकी है। इस बार भी मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 20 जून तक उज्जैन में मानसून प्रवेश कर सकता है और अच्छी बारिश की संभावना है।

 

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