एक बार फिर डराने लगा कोरोना, 10 दिन में 250 से बढ़कर 3758 हुए केस, अबतक इतने लोगों की मौत

भोपाल

देश में एक बार फिर कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले 10 दिनों में कोविड 19 के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड-19 डैशबोर्ड के अनुसार, पिछले 10 दिन में कोरोना के मामले 257 से 3700 के पार हो गए हैं। यह आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है। अगर इसी रफ्तार से कोविड आगे बढ़ा तो आने वाले दिनों में प्रशासन की ओर से फिर से सख्ती देखने को मिल सकती है।

सिर्फ 10 दिन में 257 से 3700 पार पहुंचे मामले
स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में कोविड के 3758 एक्टिव मामले दर्ज किए गए। पिछले 10 दिनों में कोविड-19 के मामलों में 1200% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो चिंता का विषय बन चुका है। आंकड़े बताते हैं कि 22 मई 2025 को जहां देश में सिर्फ 257 सक्रिय केस थे, वहीं 26 मई तक यह आंकड़ा 1010 तक पहुंच गया। अब बीते 24 घंटों में 363 नए केस सामने आए हैं और 2 लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

अब डॉक्टरों ने मरीजों में कोरोना के लक्षण नजर आने पर उनकी ट्रैवल हिस्ट्री भी पूछ रहे हैं। दरअसल, देश में सबसे अधिक 1400 कोरोना के केस केरल से सामने आए हैं। समर वेकेशन में बड़ी संख्या में लोग मध्य प्रदेश से घूमने के लिए केरल जाते हैं।

भोपाल के सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर तिवारी ने कहा कि कोरोना वायरस का वैरिएंट JN.1 अभी वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट है यानी इस पर नजर रखी जा रही है। यह ज्यादा खतरनाक नहीं है। लेकिन तेजी से फैलता है। मरीज में हल्के लक्षण नजर आते हैं और यह सीजन रोग की तरह 3 से 5 दिन में ठीक भी हो जाता है। ऐसे में मास्क पहनने और कोविड नियमों का पालन कर इसके स्प्रेड होने की रफ्तार धीमी की जा सकती है।

कोरोना वायरस के इन वेरिएंट की वजह से बढ़ा संक्रमण

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कोरोना वायरस के संक्रमण में मौजूदा वृद्धि के पीछे 4 वेरिएंट को कारण बताया है. उन्होंने कहा कि मौजूदा उछाल ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट मुख्य रूप से एलएफ.7, एक्सएफजी, जेएन.1 और एनबी.1.8.1 के कारण है. इनमें अब तक हल्के लक्षण दिखाई दिए हैं. उन्होंने आगे कहा कि हम स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. इस समय, कुल मिलाकर, हमें निगरानी करनी चाहिए, सतर्क रहना चाहिए लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है.

एम्स भोपाल में मुफ्त आरटीपीसीआर जांच

एम्स भोपाल में कोरोना जांच के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट मुफ्त किया जा रहा है। लेकिन शहर के निजी अस्पतालों में इस जांच के लिए 900 से 1250 रुपए तक देने होते हैं। वहीं, निजी लैब में भी यही फीस लगती है। जांच की रिपोर्ट 1 से 2 दिन में मिल जाती है।

वहीं, गांधी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. पराग शर्मा के अनुसार वायरस के रोकथाम के लिए अभी से कदम उठाने होंगे। अभी इसके जितने भी वैरिएंट भारत में मौजूद हैं, सभी वैरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट हैं।

जितने ज़्यादा लोग वायरस से संक्रमित होंगे, उतनी ज़्यादा इसकी ताकत बढ़ेगी और यह नए-नए रूपों में बदलता जाएगा। इसलिए अभी से सतर्क रहना और बचाव करना जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जताई चिंता
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कोविड डैशबोर्ड पर मौजूद जानकारी के अनुसार, इस तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रशासन सख्ती बरत सकता है। सार्वजनिक स्थानों, अस्पतालों और संवेदनशील क्षेत्रों में कोविड प्रोटोकॉल को फिर से लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

देशभर में कोविड मामलों में बढ़ोतरी
दिल्ली के साथ-साथ देश के कई अन्य हिस्सों में भी कोविड के मामलों में तेजी देखी जा रही है। खासतौर पर केरल, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु से अधिक मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि ज्यादातर मामलों में लक्षण हल्के हैं और गंभीर बीमारी या मौत का जोखिम कम है। रविवार तक के आंकड़े बताते हैं कि केरल में 1400 कोरोना के मामले चल रहे हैं, वहीं महाराष्ट्र में 485 और दिल्ली में 436 मामले।

ओमिक्रॉन वेरिएंट के नए स्वरूपों का फैलाव
वैश्विक स्तर पर कोविड मामलों की इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के नए रूप हैं। इनमें JN.1 वेरिएंट की शाखाएं LF.7 और NB1.8 प्रमुख हैं। JN.1, जिसे ‘पिरोला’ स्ट्रेन भी कहा जाता है, BA.2.86 वेरिएंट से निकला है और यह शरीर की मौजूदा इम्यूनिटी को पार कर सकता है। हालांकि इस नए वेरिएंट के लक्षण अब तक ओमिक्रॉन जैसे ही पाए गए हैं, लेकिन यह अधिक तेजी से फैलता है।

केरल जैसी जांच हो तो एमपी में बढ़ सकते हैं केस

मध्यप्रदेश में अगर केरल की तरह कोरोना की जांच शुरू कर दी जाए, तो संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय जिन मरीजों में वायरल जैसे लक्षण दिख रहे हैं, उनमें से कई कोरोना पॉजिटिव हो सकते हैं।

केरल में लक्षण दिखते ही RT-PCR जांच की जा रही है, इसी वजह से वहां कुल मामलों की संख्या 1400 तक पहुंच गई है। वहीं मध्यप्रदेश की स्थिति अलग है- यहां सरकारी अस्पतालों में RT-PCR जांच की सुविधा नहीं है। केवल निजी लैब में यह जांच हो रही है, जिसकी लागत 1200 से 1500 रुपए तक है।

एम्स भोपाल ने कहा- इंदौर से कोई सैंपल नहीं आया

इंदौर में कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच जिला स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि पॉजिटिव मरीजों के सैंपल जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए एम्स भोपाल भेजे गए हैं, ताकि यह पता चल सके कि प्रदेश में कोरोना का कौन-सा वैरिएंट एक्टिव है।

लेकिन जब इस संबंध में एम्स भोपाल से संपर्क किया गया, तो वहां के अधिकारियों ने साफ कहा कि अब तक इंदौर से कोई भी सैंपल जांच के लिए नहीं भेजा गया है।

कोरोना वायरस हर साल आएगा, सतर्क रहना जरूरी

एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस के नए वैरिएंट हर साल इस मौसम में फिर से आएंगे। इनसे पूरी तरह बचना संभव नहीं है, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत जरूर है।

उन्होंने कहा, “जब भी आप भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाएं तो मास्क जरूर पहनें। अगर दो से तीन दिन तक बुखार या सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण रहें या सांस लेने में दिक्कत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। अन्यथा बेवजह घबराने की जरूरत नहीं है।”

डॉ. सिंह ने साफ किया कि यह वक्त डरने का नहीं, बल्कि सावधानी बरतने का है ताकि संक्रमण को रोका जा सके।

गले का इन्फेक्शन बढ़ा, बोलने में हो रही दिक्कत

हमीदिया अस्पताल के नाक, कान और गला विशेषज्ञ डॉक्टर यशवीर जेके बताते हैं कि गले के इन्फेक्शन के मरीज बढ़ रहे हैं। ये आम बात है जब गर्मी के बाद बारिश जैसा मौसम होता है।

इस बीमारी की शुरुआत गले में खराश और दर्द से होती है। अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो गले की समस्या बढ़ जाती है और बोलने में भी तकलीफ होती है।

इसलिए गले में कुछ भी परेशानी हो तो जल्दी डॉक्टर के पास जाएं।

मरीज मास्क पहनने में झिझक रहे, डॉक्टर ने जताई चिंता

श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. शर्मा के मुताबिक, ओपीडी में आने वाले 15 से 20 फीसदी मरीजों में कोविड जैसे लक्षण दिख रहे हैं। इन्हें मास्क पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन उनमें से सिर्फ एक-दो मरीज ही अगली बार फॉलोअप पर मास्क लगाकर आते हैं।

जब कारण पूछा जाता है तो कुछ कहते हैं कि लोग उन्हें अलग नजर से देखते हैं, जिससे उन्हें शर्म आती है। कई मरीज गर्मी की वजह से मास्क नहीं पहन पाते हैं। डॉक्टर इसे बहुत चिंता की बात बता रहे हैं।

JN.1 वैरिएंट कमजोर करता है इम्यूनिटी, तेजी से फैलता है

JN.1 ओमिक्रॉन के BA2.86 का एक नया स्ट्रेन है, जिसे पहली बार अगस्त 2023 में देखा गया था। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' घोषित किया। इस वैरिएंट में लगभग 30 म्युटेशन होते हैं, जो हमारी इम्यूनिटी को कमजोर कर सकते हैं।

अमेरिका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, JN.1 अन्य वैरिएंट्स से ज्यादा तेजी से फैलता है, लेकिन इससे होने वाली बीमारी ज्यादा गंभीर नहीं होती। अब यह दुनिया के कई हिस्सों में सबसे आम वैरिएंट बन चुका है।

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