भू-अर्जन में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई! वरिष्ठ RTO आनंदरूप तिवारी निलंबित

बिलासपुर
 बिलासपुर जिले में बहुचर्चित अरपा–भैसाझार–चकरभाठा वितरण नहर परियोजना के तहत की गई भूमि-अर्जन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी उजागर होने के बाद छत्तीसगढ़ शासन ने कड़ा कदम उठाया है। तत्कालीन एसडीएम और मौजूदा वरिष्ठ क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी आनंदरूप तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2021-22 के दौरान कोटा में अनुभागीय अधिकारी (रा.) और भू-अर्जन अधिकारी के रूप में पदस्थ रहते हुए नहर निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण के दौरान गंभीर लापरवाही बरती, जिससे शासन को बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि तिवारी की कार्यप्रणाली छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 का उल्लंघन है। इसलिए उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित किया गया है।

निलंबन के दौरान आनंदरूप तिवारी का मुख्यालय बिलासपुर संभाग आयुक्त कार्यालय निर्धारित किया गया है। उन्हें इस अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) मिलेगा, जो मूलभूत नियम 53 के अंतर्गत निर्धारित है।

सूत्रों की मानें तो भूमि-अर्जन घोटाले की जांच में और भी अधिकारियों की भूमिका सामने आ सकती है। शासन इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच कराने की तैयारी में है।

यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सरकार के उस रुख को भी दर्शाती है, जिसके तहत प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मामलों में अब ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। शासन की यह सख्ती भविष्य में अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश भी माना जा रहा है।

3 करोड़ से ज्यादा का घोटाला

बिलासपुर के अरपा भैंसाझार परियोजना में एक ही खसरे का अलग-अलग रकबा दिखाकर मुआवजा बांटने में 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपए की अनियमितता की गई। तब कोटा के तत्कालीन SDM आनंद रूप तिवारी, कीर्तिमान सिंह राठौर समेत अन्य अफसरों को दोषी पाया गया था, लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं की गई थी। राठौर इस वक्त रायपुर में अपर कलेक्टर हैं।

इस मामले में दोबारा जांच के बाद RI मुकेश साहू को बर्खास्त कर दिया है। वहीं, दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए शासन से अनुशंसा की गई है। मामला सामने आने पर तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार की अध्यक्षता में बनी कमेटी ने जांच की थी।

तब तत्कालीन कोटा SDM आनंद रूप तिवारी, कीर्तिमान सिंह राठौर, तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहर साय सिदार, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राहुल सिंह, तत्कालीन पटवारी दिलशाद अहमद, मुकेश साहू के अलावा जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालन अभियंता आरएस नायडु, अशोक तिवारी, तत्कालीन एसडीओ तखतपुर राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, आरपी द्विवेदी, उप अभियंता तखतपुर आरके राजपूत को जिम्मेदार माना गया था।

इन अफसरों पर कार्रवाई के लिए लिखा गया पत्र

    कीर्तिमान सिंह राठौर (तत्कालीन एसडीएम, अब रायपुर में अपर कलेक्टर)
    आनंद रूप तिवारी (वर्तमान आरटीओ, तत्कालीन एसडीएम)
    मोहर साय सिदार (तत्कालीन नायब तहसीलदार), राहुल सिंह (तत्कालीन राजस्व निरीक्षक)
    आरएस नायडू, एके तिवारी (सिंचाई विभाग)
    राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, आरपी द्विवेदी (एसडीओ)
    आरके राजपूत (उप अभियंता)

2013 से अब तक प्रोजेक्ट अधूरा

बिलासपुर के कोटा ब्लॉक के भैंसाझार में अरपा नदी पर 1,141 करोड़ रुपए की लागत से अरपा भैंसाझार प्रोजेक्ट का निर्माण 2013 से चल रहा है। अब तक 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। ठेकेदार की ओर से मुख्य नहर के साथ ही शाखा नहरों का निर्माण किया जा रहा है।

इसके बनते ही जिले के 3 ब्लॉक के 102 गांवों के करीब 25 हजार हेक्टेयर खेतों तक खरीफ फसल के लिए पानी पहुंचेगा। जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का दावा है कि इस साल के अंत तक प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा। परियोजना का शिलान्यास पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी ने 2013 में किया था।

शुरुआत में इसकी लागत 606 करोड़ रुपए थी। निर्माण कार्य जल संसाधन संभाग कोटा के द्वारा अनुबंध क्रमांक डीएल 07/ 13.09.2013 किया गया था। इसकी निर्माण एजेंसी राधेश्याम अग्रवाल/ सुनील अग्रवाल है। योजना का उद्देश्य बिलासपुर जिले के तीन ब्लॉकों के 102 गांवों के 25 हजार हेक्टेयर में पानी पहुंचाना है।

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