सस्ती हुई सब्जियों से घर का भोजन हुआ सस्ता, खाने का खर्च घटा

नई दिल्ली
इस साल मानसून कुछ जल्दी ही आ गया। मानसून आने की वजह से लोगों को तपती गरमी से राहत मिली। साथ ही सब्जियों और फल की भी पैदावार में इजाफा हुआ। यही वजह है कि बीते मई महीने में खाने-पीने की वस्तुएं सस्ती हुईं। तभी तो इस महीने वेज और नॉन-वेज, दोनों तरह की थाली की कीमत में कमी हुई है।
कहां से आई यह रिपोर्ट

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट का नाम है 'रोटी राइस रेट'। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में घर पर बनने वाली वेज और नॉन-वेज थाली की कीमत लगभग 6% तक कम हुई है। यह कमी सब्जियों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण हुई है। पिछले साल सब्जियों के दाम बहुत ज्यादा थे, इसलिए इस साल कीमतें कम लग रही हैं।

टमाटर की कीमतें खूब घटीं

रिपोर्ट में कहा गया है, "टमाटर की कीमतें लगभग 29% गिरकर 23 रुपये/किलो हो गईं, जो मई 2025 में 33 रुपये/किलो थीं। पिछले साल उपज को लेकर चिंता थी, जिसके कारण कीमतें बढ़ गई थीं।" इसका मतलब है कि पिछले साल टमाटर कम होने की आशंका थी, इसलिए दाम बढ़ गए थे। इस साल टमाटर ज्यादा हैं, इसलिए दाम कम हो गए हैं। प्याज और आलू की कीमतों में भी 15% और 16% की गिरावट आई है। पिछले साल आलू की फसल को नुकसान हुआ था। पश्चिम बंगाल में blight infestation और बेमौसम बारिश के कारण आलू की फसल खराब हो गई थी। वहीं, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में पानी की कमी के कारण प्याज की पैदावार कम हुई थी। इसलिए पिछले साल प्याज के दाम बढ़ गए थे।

थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव

क्रिसिल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर पुशान शर्मा ने बताया कि मई 2025 में थाली की कीमतों में थोड़ा बदलाव हुआ है। वेज थाली की कीमत स्थिर रही, लेकिन नॉन-वेज थाली लगभग 2% सस्ती हो गई। टमाटर और आलू के दाम बढ़ गए, लेकिन प्याज के दाम कम होने से वेज थाली की कीमत स्थिर रही। नॉन-वेज थाली की कीमत में कमी ब्रॉयलर (मुर्गी) की कीमतों में गिरावट के कारण आई है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। ऐसा मौसम में बदलाव के कारण होगा। गेहूं और दालों की कीमतों में थोड़ी कमी आ सकती है, क्योंकि इस बार देश में इनका उत्पादन अच्छा हुआ है। चावल की कीमतें बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि वैश्विक बाजार में कीमतें अच्छी होने के कारण निर्यात 20-25% तक बढ़ सकता है।

खाद्य तेल हुए महंगे

क्रिसिल ने यह भी बताया कि वनस्पति तेल की कीमतों में 19% की वृद्धि हुई है। ऐसा आयात शुल्क बढ़ने के कारण हुआ है। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडर की कीमत में भी 6% की वृद्धि हुई है। इन कारणों से थाली की कीमत में ज्यादा कमी नहीं आई।

मुर्गी भी हुई सस्ती

सब्जियों की कीमतों में कमी के साथ-साथ ब्रॉयलर की कीमत में भी लगभग 6% की गिरावट आई है। इस वजह से नॉन-वेज थाली सस्ती हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रॉयलर की कीमतों में गिरावट का कारण इनकी ज्यादा सप्लाई और कम मांग है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बर्ड फ्लू की खबरें आई थीं, जिसके कारण लोगों ने चिकन खाना कम कर दिया था। ब्रॉयलर की कीमत नॉन-वेज थाली की कीमत का लगभग 50% होती है।

थाली में क्या

एक वेज थाली में रोटी, सब्जियां (प्याज, टमाटर और आलू), चावल, दाल, दही और सलाद शामिल होते हैं। एक नॉन-वेज थाली में भी यही चीजें होती हैं, लेकिन दाल की जगह चिकन (ब्रॉयलर) होता है। मई 2025 के लिए ब्रॉयलर की कीमतें अनुमानित हैं। सामग्री का weightage कमोडिटी की कीमत में उतार-चढ़ाव के आधार पर नहीं बदलता है। इसका मतलब है कि अगर किसी चीज की कीमत बढ़ जाती है, तो भी थाली में उसकी मात्रा कम नहीं की जाती है।

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