मध्यप्रदेश का पहला साइबर कमांडो ट्रेनिंग सेंटर ग्वालियर में तैयार हो रहा, 30 साइबर कमांडो होंगे तैयार

ग्वालियर

 साइबर अपराध से निपटने के लिए सरकार विशेष कदम उठा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर(I4C) द्वारा साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। ग्वालियर में प्रदेश का पहला साइबर कमांडो ट्रेनिंग सेंटर तैयार हो रहा है। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (ABV-IIITM Gwalior) में ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाएगा। इसका कोर्स तैयार किया जा चुका है। एबीपी ट्रिपल आईटीएम प्रबंधन ने इसकी पूरी तैयारी कर ली है।

30 साइबर कमांडो होंगे तैयार

प्रबंधन के मुताबिक गृह मंत्रालय से जल्द ही इसकी अनुमति मिल सकती है। पूरे प्रदेश से पहले चरण में 30 पुलिस कर्मियों को साइबर कमांडो के रूप में तैयार किया जाएगा। ट्रेनिंग की अवधि 6 माह की होगी। साइबर कमांडो की ट्रेनिंग के लिए कोर्स IIT कानपुर द्वारा तैयार किया गया है। प्रबंधन के मुताबिक सितंबर से अक्टूबर के बीच पहले चरण की ट्रेनिंग शुरू हो सकती है। इसी हिसाब से यहां तैयारी की जा रही है। ट्रेनिंग में साइबर हमलों से बचने के तरीके सिखाए जाएंगे। इसमें प्रमुख शासकीय संस्थानों, पुलिस और जांच एजेंसियों के गोपनीय डेटा को सुरक्षित रखने के तरीके शामिल रहेंगे। साइबर हमले जैसी स्थिति में निपटने के गुर सिखाए जाएंगे।

साइबर क्राइम की विवेचना में नए साफ्टवेयर, टूल्स का इस्तेमाल।

फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में काम करने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

ऐसे काम करेंगे साइबर कमांडो

    साइबर कमांडो जांच एजेंसियों और पुलिस के साथ मिलकर काम करेंगे।

    देश, प्रदेश के बड़े संस्थानों, जांच एजेंसियों के डेटा, सिस्टम को सुरक्षित रखना।

    बड़े साइबर हमलों या साइबर अपराध की पड़ताल में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।

    साइबर अपराध नियंत्रण के लिए आई4सी के साथ मिलकर गाइडलाइन, एडवाइजरी तैयार करना।

    साइबर अपराध होने पर फर्स्ट रिस्पांडर की भूमिका में भी यह रहेंगे।

6 साइबर कमांडो, 39 पुलिसकर्मी हुए चयनित

अभी प्रदेश में 6 साइबर कमांडो तैयार हो चुके हैं। इन्हें 6 महीने की ट्रेनिंग मिली है। 39 पुलिस कर्मियों का चयन साइबर कमांडो ट्रेनिंग के लिए हुआ है। इसमें ग्वालियर के भी चार पुलिसकर्मी हैं।

दीपा सिंह (जनसंपर्क अधिकारी, एबीपी ट्रिपल आईटीएम) के अनुसार, साइबर कमांडो की ट्रेनिंग के लिए संस्थान में पूरी तैयारी है। पहले चरण में 30 साइबर कमांडो को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसकी अवधि 6 महीने की होगी। जल्द ही अनुमति मिल सकती है। सितंबर या अक्टूबर से पहले बैच की ट्रेनिंग संस्थान में शुरू हो सकती है।

यह होगा फायदा
प्रदेश स्तर पर कमांडो प्रशिक्षण की शुरुआत होने से इसमें प्रशिक्षित होने से साइबर कमांडो की गिनती में तेजी से इजाफा होगा। यह कमांडो बडे औद्योगिक संस्थान, सरकारी संस्थानों के साथ साइबर अपराधों की रोकथाम और साइबर क्रिमनल्स पर कसावट मेंं मददगार साबित होंगे।

दूसरे बैच में 39 पुलिसकर्मियों को भेजा जाएगा

पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि दूसरे बैच में प्रदेश के 39 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। परीक्षा के बाद इनका चयन भी हो चुका है। जल्द ही यह तय हो जाएगा कितने पुलिसकर्मियों को कहां प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। प्रशिक्षण लिए जाने वालों में आरक्षक से लेकर उप पुलिस अधीक्षक स्तर तक के अधिकारी शामिल हैं।

यह काम करेंगे साइबर कमांडो

    साइबर सुरक्षा : साइबर खतरों से नेटवर्क और डाटा को सुरक्षित रखना।

 

    साइबर हमले से सुरक्षा : कमांडो साइबर नेटवर्क या सिस्टम में हैकिंग और वायरस के हमलों से निपटने के लिए काम करेंगे। हमले की स्थिति में त्वरित निराकरण के लिए काम करेंगे। खतरों से आगाह भी करेंगे।

    नेटवर्क की निगरानी : साइबर कमांडो की जिम्मेदारी नेटवर्क की निगरानी करने की रहेगी।

    डेटा सुरक्षित रखने का काम : महत्वपूर्ण संस्थानों का डेटा लीक नहीं होने पाए, इसके लिए भी सुझाव देंगे।

    अपराधों की जांच : बड़े साइबर अपराधों की जांच और डाटा के विश्लेषण में सहयोग करेंगे। साथ ही साइबर सुरक्षा की नीतियां बनाने में सहयोग करेंगे।

दूसरे बैच के लिए भी चयन किया गया

    हमारे छह पुलिसकर्मी साइबर कमांडो का प्रशिक्षण ले रहे हैं, जो शीघ्र आ जाएंगे। इसके अतिरिक्त दूसरे बैच के लिए भी चयन कर लिया गया है। – ए साई मनोहर, एडीजी साइबर

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