PAK का एक और झूठ आया सामने, कभी जिस सैनिक की डेड बॉडी लेने से किया था इनकार; अब उसे बता रहा शहीद

लाहौर 

पाकिस्तान का दोहरा चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। दरअसल, बात शनिवार की है, जब मुल्क के सेना प्रमुख आसिम मुनीर समेत कई बड़े अधिकारियों ने कैप्टन करनाल शेर खान शहीद को श्रद्धांजलि दी। खबरें हैं कि यह वही कैप्टन खान हैं, जिनका शव पाकिस्तान ने स्वीकार तक करने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कैप्टन खान को करगिल युद्ध के दौरान दिए गए योगदान को याद कर रहे थे।

मुनीर समेत बड़े सैन्य अधिकारियों ने 26 वें शहीद दिवस पर कैप्टन खान को याद किया। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जब द्रास सब सेक्टर में टाइगर हिल में कैप्टन खान का शव मिला था, तो पाकिस्तान ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। खास बात है कि भारतीय दूतावास की एक पुरानी विज्ञप्ति से पता चला है कि पाकिस्तान ने करगिल की हिमाकत में मुल्क के नियमित सैनिकों के शामिल होने से इनकार किया था।

इसके तहत ही पाकिस्तान ने भारत की तरफ से जानकारी दिए जाने के बाद भी खान को पहचानने से मना कर दिया था। रिपोर्ट में वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास की तरफ से 15 जुलाई 1999 में जारी की गई विज्ञप्ति के हवाले से यह बात कही गई है। खबर है कि भारत ने 12 जुलाई को पाकिस्तान से संपर्क किया था और कहा था कि वह पाकिस्तान सेना को शव सौंपना चाहते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, दूतावास ने बयान दिया था, 'यह साफ है कि पाकिस्तान इन शवों की पहचान के बारे में जानता है, लेकिन वह इसे स्वीकार नहीं करना चाहता है। क्यों कि इससे उनकी सेना के करगिल में शामिल होने का पर्दाफाश हो जाएगा। ऐसा करने से वो अपने सैनिकों को परिवारों के प्रति और हर जगह सशस्त्र बलों की परंपराओं का अपमान कर रहे हैं।'
कब माना पाकिस्तान

खबर है कि 13 जुलाई को ICRC यानी इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रॉस ने भारत से संपर्क किया और कहा कि पाकिस्तान ने उनसे भारत से बातचीत करने का अनुरोध किया है, ताकि दो अधिकारियों के शव उन्हें सौंपे जा सकें।

तब दूतावास ने बयान जारी किया था, 'पाकिस्तान के पास जानकारी होने के बाद भी उनकी तरफ से किए गए अनुरोध में दो अधिकारियों के नाम और पहचान नहीं बताए गए हैं। इसका कारण स्पष्ट है। पाकिस्तानी अधिकारियों को एहसास हो गया है कि अगर वो इन दो अधिकारियों की पहचान मान लेते हैं, तो उनका झूठ पकड़ा जाएगा कि पाकिस्तानी सेना करगिल में शामिल नहीं थी।'

भारतीय सेना के अफसर की इंसानियत को सलाम

 पाकिस्तान की सेना ने आज कैप्टन कर्नल शेर खान को उनकी 26वीं शहादत के मौके पर श्रद्धांजलि दी है। कैप्टन कर्नल शेर खान, पाकिस्तानी सेना के वही जवान हैं, जिनकी बहादुरी के कायल भारत के अधिकारी हो गये थे और पाकिस्तानी सेना से उन्हें सम्मानित करने की सिफारिश की थी। पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर, संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष, वायु सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और पाकिस्तान के सशस्त्र बल कैप्टन कर्नल शेर खान शहीद को उनकी 26वीं शहादत के मौके पर श्रद्धांजलि दी है। भारतीय अधिकारी की सिफारिश पर उन्हें पाकिस्तानी सेना का सर्वोच्च सम्मान निशान-ए-हैदर दिया गया था। पाकिस्तानी सेना के कैप्टन कर्नल शेर खान की वीरता को उस समय सम्मान मिला, जब भारतीय सेना के ब्रिगेडियर एम. पी. एस. बजवा ने खुद एक सिफारिश-पत्र उनके शव के साथ उनके कपड़ों की जेब में रखकर लौटाया था, ताकि पाकिस्तान सरकार को उनकी वीरता का पता चल सके

कारगिल युद्ध में हार के बाद पाकिस्तान ने अपने मरे हुए सैनिकों को कारगिल की ही पहाड़ी पर छोड़ दिया था। युद्ध में मारे गये कैप्टन खान को भी शुरू में उनके देश ने छोड़ दिया था। क्योंकि पाकिस्तान शुरू में ये मानने के लिए तैयार नहीं था कि कारगिल में पाकिस्तानी सैनिक लड़ रहे हैं। लेकिन फिर पाकिस्तान ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान सेना के जवान ही कारगिल में लड़ रहे हैं, तो उसके बाद कर्नल शेर खान को निशान-ए-हैदर दिया गया। ब्रिगेडियर एम.पी.एस. बाजवा, जो उस वक्त 192 माउंटेन ब्रिगेड की कमान संभाल रहे थे, उन्होंने ही कर्नल शेर खान को सम्मानित करने की सिफारिश की थी।

कारगिल युद्ध में टाइगर हिल की लड़ाई
दिप्रिंट की एक रिपोर्ट में बात करते हुए ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा था कि "उनकी ब्रिगेड को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण टाइगर हिल पर कब्जा करने का काम सौंपा गया था। उन्होंने यह जिम्मेदारी 18 ग्रेनेडियर्स को सौंपी, जो पहले टोलोलिंग की लड़ाई में शामिल थी और जिसमें लगभग 60 लोग हताहत हुए थे और 8वीं बटालियन सिख रेजिमेंट, जो पहले से ही टाइगर हिल के आस-पास के मजबूत बेस में थी, वो पहले की झड़पों में लगभग 25 लोग खो चुकी थी।" उन्होंने कहा कि "मैंने 18 ग्रेनेडियर्स को उनकी घातक प्लाटून और दक्षिण-पश्चिम और पूर्व की अन्य कंपनियों के साथ टाइगर हिल टॉप पर कब्ज़ा करने का काम सौंपा था। मैंने 8 सिख के कमांडिंग ऑफिसर को चेतावनी दी थी कि वे टाइगर हिल टॉप पर किसी भी तरह के जवाबी हमले को रोकने के लिए दक्षिण-पश्चिमी रिज लाइन पर दो अधिकारियों के साथ लगभग 50 कर्मियों को तैनात रखें।"

4 जुलाई 1999 को 18 ग्रेनेडियर्स के कैप्टन बलवान सिंह के नेतृत्व में घातक प्लाटून टाइगर हिल टॉप पर कब्जा करने में कामयाब रही, लेकिन लड़ाई उसके बाद भी जारी थी और 18 ग्रेनेडियर्स के अन्य सैनिकों को प्लाटून का समर्थन करने के लिए भेजा गया था। ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा कि "इस बीच, दक्षिण-पश्चिमी रिज लाइन से संभावित जवाबी हमले की आशंका के चलते, मैंने 8 सिख रेजिमंट को, जिसमें 52 सैनिक थे, उन्हें कब्जा करने का आदेश दिया।"

कर्नल शेर खान के लिए सम्मान की सिफारिश
इस दौरान कैप्टन शेर खान, जिनकी पोस्टिंग कारगिल के टाइगर हिल और बटलिक सेक्टर के बीच थी, उन्होंने अपने आखिरी दम तक अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। जब भारतीय सेना ने उनकी चौकी पर कब्जा किया, तो पता चला कि वे आखिरी सांस तक अपने साथियों के साथ मोर्चे पर डटे रहे। इस वीरता ने ब्रिगेडियर बजवा के मन एक दुश्मन सैनिक के लिए सम्मान पैदा कर दिया और उन्होंने अपने 'दुश्मन' की बहादुरी को सलाम करते हुए पाकिस्तान को संदेश भेजा और लिखा कि "एक ऐसे व्यक्ति को भुलाया नहीं जाना चाहिए जिसने जान देकर देश की रक्षा की।" ब्रिगेडियर बाजवा ने कहा कि 'हिल पर नियंत्रण के लिए कर्नल शेर खान को मारना बहुत जरूरी हो गया था। मौत के बाद उनके शव से उनकी पत्नी का लिखा हुआ एक खत मिला। कैप्टन ने वाकई बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी थी।'

कर्नल शेर खान के शव को दिल्ली भेजने से पहले उन्होंने अपने जनरल ऑफिसर कमांडिंग को खान की बहादुरी के बारे में बताया और प्रशंसा और प्रशस्ति पत्र लिखने की इच्छा जताई, कि कैप्टन खान ने बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी है और उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए। बाजवा ने कहा, "हाथ से लिखे प्रशस्ति पत्र के साथ एक कागज का टुकड़ा उनकी जेब में रखा गया था। शुरुआत में पाकिस्तान ने यह कहते हुए शव लेने से इनकार कर दिया कि उनके सैनिकों ने कभी लड़ाई नहीं लड़ी, लेकिन बाद में शव स्वीकार कर लिया गया।" उन्होंने कहा कि "यह खुशी की खबर थी कि उन्हें निशान-ए-हैदर से सम्मानित किया गया। मुझे उनके पिता से भारतीय सेना के लिए धन्यवाद पत्र मिला।"

More From Author

एसआई भर्ती परीक्षा 2021 को लेकर अंतिम फैसला आज, हाईकोर्ट में सुनवाई

महाकौशल अंचल में 4 दिन से लगातार भारी बारिश, बरगी डैम के नौ गेट खुले, दो दिनों तक स्कूलों की छुट्टी, जबलपुर में रेड अलर्ट जारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13783/138

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.