आखिरकार रूस और पाकिस्तान में समझौता, GDP को जबरदस्त बढ़त मिलने की उम्मीद

मॉस्को
रूस ने आखिरकार पाकिस्तान के साथ एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौता कर लिया है। इसको लेकर कई महीनों से कयास लगाए जा रहे थे। अब शुक्रवार को पाकिस्तान और रूस ने संयुक्त रूप से इस समझौते की घोषणा की है, जिसके तहत कराची में एक अत्याधुनिक स्टील मिल की स्थापना की जाएगी। इस परियोजना को दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक सहयोग के एक नए युग की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। इस सौदे से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अरबों रुपये का लाभ होने की उम्मीद है, साथ ही यह औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।

यह समझौता शुक्रवार को मॉस्को में पाकिस्तान दूतावास में आयोजित एक समारोह में किया गया। पाकिस्तान के उद्योग और उत्पादन मंत्रालय के सचिव सैफ अंजुम और रूस की औद्योगिक इंजीनियरिंग एलएलसी के महानिदेशक वादिम वेलिचको ने इस पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर पाक पीएम के विशेष सहायक हारून अख्तर खान और रूस में पाकिस्तान के राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली भी उपस्थित थे।

क्या है रूस-पाकिस्तान की डील? आइए समझते हैं
पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस ने पहली बार आधिकारिक तौर पर पुष्टि करते हुए कहा है कि उसने कराची में एक नई स्टील मिल स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के साथ समझौते को अंतिम रूप दिया है। यह परियोजना पाकिस्तान स्टील मिल्स (PSM) की बहाली और आधुनिकीकरण का हिस्सा है, जो लंबे समय से आर्थिक और प्रबंधकीय चुनौतियों का सामना कर रही है। एक बयान में, पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारी हारुन अख्तर खान ने कहा, "रूस के साथ यह समझौता पाकिस्तान स्टील मिल्स की प्रगति और औद्योगिक भविष्य के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस परियोजना से न केवल औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।"

इस समझौते के तहत, पीएसएम को न केवल दोबारा खड़ा किया जाएगा, बल्कि कराची में 700 एकड़ भूमि पर एक नया अत्याधुनिक इस्पात संयंत्र भी स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना में रूस की उन्नत इस्पात निर्माण तकनीक का उपयोग किया जाएगा, जिससे पाकिस्तान की इस्पात आयात पर निर्भरता 30% तक कम होने की उम्मीद है। पाकिस्तान हर साल लगभग 2.7 बिलियन डॉलर का इस्पात और लोहा आयात करता है, और देश में इस्पात की मांग और आपूर्ति के बीच 3.1 मिलियन टन का अंतर है। इस नए संयंत्र से न केवल आयात बिल में कमी आएगी, बल्कि स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

पाकिस्तान की GDP को होगा फायदा
इस सौदे की अनुमानित लागत 2.6 बिलियन डॉलर (लगभग 22,000 करोड़ रुपये) है, जो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा निवेश माना जा रहा है। इस परियोजना से न केवल स्थानीय स्तर पर स्टील उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि यह निर्यात क्षमता को भी बढ़ाएगा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में इजाफा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा पाकिस्तान की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को दीर्घकालिक रूप से अरबों रुपये का लाभ पहुंचा सकता है।

इसके अलावा, नई स्टील मिल के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होंगे। खास तौर पर, कराची जैसे औद्योगिक केंद्र में यह परियोजना स्थानीय युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए नए अवसर लेकर आएगी। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में तकनीकी इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, यह समझौता पाकिस्तान और रूस के बीच गहरे होते द्विपक्षीय संबंधों का हिस्सा है। दोनों देश हाल के वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ा रहे हैं, जिसमें पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन और 2023 में शुरू हुई कच्चे तेल की आपूर्ति शामिल है।

रूस-पाकिस्तान संबंधों में नया मोड़
पाकिस्तान स्टील मिल्स को 1973 में तत्कालीन सोवियत संघ के सहयोग से स्थापित किया गया था और यह कभी देश का सबसे बड़ा औद्योगिक परिसर था। यह मिल 1985 में शुरू हुई थी, लेकिन वित्तीय कुप्रबंधन, बुनियादी ढांचे की कमी और अन्य प्रशासनिक समस्याओं के कारण 2015 में इसका परिचालन पूरी तरह बंद हो गया था।

ताजा सौदा रूस और पाकिस्तान के बीच बढ़ते राजनयिक और आर्थिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाल के वर्षों में, दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। रूस के उप-प्रधानमंत्री ने हाल ही में कहा था कि पाकिस्तान रूस का एक स्वाभाविक सहयोगी है और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।

भारत से तनाव के बीच किया समझौता
यह समझौता उस समय हुआ है जब क्षेत्रीय भू-राजनीतिक में तेजी से बदलाव हो रहा है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के सफाए के लिए ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। जिसके बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष छिड़ गया। इस लिहाज से कुछ विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह कदम भारत के साथ उसके पारंपरिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, रूस ने पहले ऐसी खबरों को खारिज किया है जो इसे भारत के साथ अपने संबंधों को कमजोर करने के रूप में देखती हैं।
 

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