मुनीर चूकते रहे, थरूर ने लपकी जीत: पहलगाम अटैक पर भारत का करारा जवाब

नई दिल्ली

पाकिस्तान ने पहलगाम अटैक कराया. आतंकियों को कश्मीर भेजकर हिंदू टूरिस्टों की हत्या करवाई. सोचा कि वो बच जाएगा. मगर ऐसा हुआ नहीं. पहलगाम अटैक के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर उससे बदला लिया. इसके बाद पाकिस्तान को इंटरनेशनल लेवल पर बेइज्जत करने की ठानी. इसके लिए विदेशों में डेलिगेशन भेजा. अब उस ऑपरेशन सिंदूर वाले डेलिगेशन की कोशिशों का परिणाम सामने आया है. अमेरिका ने पाकिस्तानी आतंकी संगठन टीआरएफ यानी द रेजिस्टेंस फ्रंट पर चाबुक चलाया है. अमेरिका ने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित किया है.

अमेरिका के इस कदम से भारत की कूटनीतिक जीत हुई है. यह कदम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक अहम जीत माना जा रहा है. इसमें सबसे बड़ा रोल शशि थरूर का है. जी हां, शशि थरूर ही पीएम मोदी के वो दूत थे, जो ऑपरेशन सिंदूर के डेलिगेशन को लीड कर रहे थे. शशि थरूर ने अमेरिका जाकर सबूत के साथ पाकिस्तान की बैंड बजाई. भारत का पक्ष मजबूती से रखा. इसका असर अब सबके सामने है कि अमेरिका को भी भारत की बात मानने पर मजबूर होना पड़ा. और आखिरकार उसने टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित कर दिया.

थरूर ने मुनीर का गेम बिगाड़ा

वैसे भारत की कोशिशों पर मिट्टी डालने की पाकिस्तान ने कम कोशिश नहीं की. पहलगाम अटैक के बाद आसिम मुनीर ट्रंप के दरबार पहुंचे थे. वह हलाल वाला मांस खाते ही रह गए. उधर कांग्रेस सांसद शशि थरूर भारत की झोली में बड़ी जीत डाल गए. पाकिस्तान ने आसिम मुनीर को भेजकर चतुराई दिखाई थी. उसने सोचा कि अमेरिका उसका साथ देगा, मगर भारत ने जिस मजबूती से अपना पक्ष रखा, उसके सामने पाकिस्तान की सारी चाल फेल हो गई. यहां बताना जरूरी है कि एलटीएफ लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन है. उसने 2019 में जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद कई आतंकी हमलों को अंजाम दिया है.

अमेरिका ने अपने एक्शन में क्या कहा

अमेरिका ने बयान जारी कर कहा, ‘आज विदेश विभाग ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकवादी संगठन (फॉरेन टेररिस्ट ऑर्गनाइजेशन ) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (स्पेशल डेजिग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट) के रूप में नामित किया है. टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक फ्रंट और मुखौटा संगठन है. उसने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले की जिम्मेदारी ली थी. उसमें 26 नागरिक मारे गए थे. यह 2008 के मुंबई हमलों के बाद भारत में नागरिकों पर सबसे घातक हमला था, जिसे लश्कर ने अंजाम दिया था. टीआरएफ ने भारतीय सुरक्षा बलों पर कई हमलों की भी जिम्मेदारी ली है.’

कैसे भारत ने पाकिस्तान को दी एक और चोट

अमेरिका के इस फैसले से भारत की उस बात पर मुहर लगी है कि पहलगाम अटैक के पीछे पाकिस्तान का हाथ है. पाकिस्तान टीआरएफ को संरक्षण देता है. इससे पहले खुफिया रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई थी कि पाकिस्तानी नेता और सैन्य अफसरों ने ही पहलगाम अटैक का आदेश दिया है. बहरहाल, अमेरिका का टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करना भारत की कूटनीति की जीत है. शशि थरूर की अगुवाई में भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन को बेनकाब किया, जबकि आसिम मुनीर की मुलाकात केवल औपचारिकता बनकर रह गई. यह भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक ऐतिहासिक कदम है.

पहलगाम अटैक क्या है

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था. पहलगाम अटैक में 26 टूरिस्टों की हत्या हुई थी. टीआरएफ ने ही पहलगाम आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी. पाकिस्तान से आए इन आतंकियों ने बैसरन घाटी में गोलियों की बौछार की थी. मारने से पहले आतंकियों ने टूरिस्टों से धर्म पूछा था. इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से पहलगाम अटैक का बदला लिया था.

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