तेलंगाना सरकार की बड़ी पहल: 14 मुस्लिम जातियों को आरक्षण देने की तैयारी तेज़

हैदराबाद 

तेलंगाना में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार 14 मुस्लिम जातियों को पिछड़ा वर्ग (BC) के तहत आरक्षण की सुविधा देने की तैयारी कर रही है। इन जातियों में करीब 3 लाख परिवार शामिल हैं, जो लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं। अब तक इन मुस्लिम समूहों को BC (E) श्रेणी के अंतर्गत 4% आरक्षण दिया गया था, लेकिन कानूनी विवादों और धार्मिक आधार पर आरक्षण को लेकर उठे सवालों के कारण यह नीति प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाई। सरकार का मानना है कि इन जातियों को धर्म नहीं, बल्कि पिछड़ेपन के आधार पर लाभ दिया जाना चाहिए।

सरकार द्वारा कराए गए सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार और राजनीतिक जाति (SEEPC) सर्वे की रिपोर्ट फरवरी 2025 में सार्वजनिक हुई थी। इसमें सामने आया कि राज्य की कुल 12.58% मुस्लिम आबादी में से 10.08% पिछड़े मुसलमान हैं और सिर्फ 2.5% मुसलमान अन्य वर्ग में आते हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हैदराबाद के पुराने शहर में कई मुस्लिम महिलाओं ने गणनाकर्ताओं से बातचीत नहीं की, जिससे मुस्लिम आबादी में 1-2% की संभावित कमी आंकी गई है।
आरक्षण बढ़ाकर 42% किया गया

SEEPC सर्वे के आधार पर तेलंगाना विधानसभा ने मार्च में एक विधेयक पारित कर पिछड़ा वर्ग आरक्षण को 27% से बढ़ाकर 42% कर दिया। यह वृद्धि शिक्षा, सरकारी नौकरियों और स्थानीय निकाय चुनावों में लागू होगी। यह विधेयक अब राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा द्वारा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा गया है।
शिया परिवारों को नहीं मिल रहे लाभ

राज्य सरकार के सलाहकार और वरिष्ठ नेता मो. अली शब्बीर के अनुसार, "करीब 3 लाख शिया परिवार न सिर्फ आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं, बल्कि उन्हें किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा।" उन्होंने बताया कि सर्वे के अनुसार, मुस्लिम समुदाय के 10.08% लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं और सहायता के पात्र हैं।

उन्होंने बताया, "सैयद, मुगल, पठान, अरब, कोज्जा मेमन, आगा खानी और बोहरा जैसे मुस्लिम समूह पेशे पर आधारित जातियां हैं, जैसे अन्य पिछड़ी वर्ग की जातियां होती हैं। यह धर्म आधारित आरक्षण नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन पर आधारित प्रस्ताव है।"
भाजपा की आपत्ति पर सरकार का जवाब

भाजपा द्वारा इस प्रस्ताव पर धर्म आधारित आरक्षण का आरोप लगाए जाने पर मो. अली शब्बीर ने कहा, "जब भी मुस्लिम आरक्षण की बात हुई, सरकारों से पूछा गया डेटा कहां है? अब हमारे पास सर्वे के माध्यम से ठोस आंकड़े हैं। अधिकांश गरीब मुसलमान फल-सब्ज़ी विक्रेता, कबाड़ी, ड्राइवर जैसे काम करते हैं। उन्हें भी उतने ही अधिकार मिलने चाहिए जितने अन्य समुदायों को।"
क्या मिल सकते हैं SC-ST जैसी योजनाएं?

शब्बीर ने संकेत दिया कि सरकार अब विचार कर रही है कि इन 14 मुस्लिम जातियों को भी वही लाभ और योजनाएं दी जाएं जो SC, ST और अन्य BC समुदायों को दी जा रही हैं। जैसे कि रोजगार में प्राथमिकता, छात्रवृत्ति, उद्यमिता सहायता और स्थानीय राजनीतिक प्रतिनिधित्व।

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