उज्जैन : फ्रीगंज ब्रिज प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, 2028 सिंहस्थ से पहले होगा पूरा

उज्जैन 

उज्जैन में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बहुप्रतिक्षित फ्रीगंज ओवरब्रिज का निर्माण धरातल पर शुरू हो गया। निर्माण सिंहस्थ-28 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद नए और पुराने शहर को जोड़ने के लिए 21.40 मीटर चौड़ा ब्रिज उपलब्ध हो जाएगा।

उज्जैन के वर्तमान फ्रीगंज ओवरब्रिज के नजदीक 21.40 मीटर चौड़ा नया ब्रिज बनाया जाना है। इसके लिए पूर्व में टेंडर जारी कर निर्माण का ठेका दिया था लेकिन कंपनी ने काम नहीं किया था। दूसरी बार टेंडर जारी कर गुजरात की चेतन कंस्ट्रक्शन को ठेका दिया गया है। निर्माण से पूर्व कंपनी ने अपना कार्यालय और प्लांट स्थापित करने के साथ बोरिंग जैसी प्राथमिक तैयारी तो कर ली थी लेकिन मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।  कंपनी ने अब मौके पर निर्माण शुरू कर दिया है। ब्रिज निर्माण की शुरुआत रिटेनिंग वॉल बनाने से की जा रही है।

सिंहस्थ से पहले बदलेगा उज्जैन! 2 एलिवेटेड ब्रिज मंजूर, 23,000 करोड़ से होंंगे कई प्रोजेक्ट्स

प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य उज्जैन को बेहतर यातायात व्यवस्था से जोड़ना और आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से राहत देना है. मुख्यमंत्री ने कहा, “सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन न केवल आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा, बल्कि ट्रैफिक, सड़कें, सुरक्षा और जनसुविधाओं के लिहाज़ से एक आदर्श मॉडल भी बनेगा. हमारा लक्ष्य है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु सुविधाजनक यात्रा अनुभव ले जाए.” सीएम ने निर्देश दिए हैं कि उज्जैन के सभी धार्मिक स्थलों को ‘देवलोक’ की थीम पर विकसित किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आस्था के साथ अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलें.

उज्जैन कलेक्टर  ने जानकारी दी कि ये दोनों कॉरिडोर उज्जैन की यातायात व्यवस्था को नया रूप देंगे. उन्होंने कहा, “इस बार सिंहस्थ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रस्तुति भी होगा.” पहला एलिवेटेड कॉरिडोर मकोडिया आम चौराहा से शुरू होकर देवासगेट, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज तक जाएगा. दूसरा निकास चौराहा से दौलतगंज होते हुए इंदौर गेट तक बनेगा. ये दोनों मार्ग शहर के सबसे व्यस्त रूट माने जाते हैं, जहां रोजाना ट्रैफिक की भारी भीड़ होती है.इन ब्रिजों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि भविष्य में मेट्रो रेल संचालन भी संभव हो सके. कॉरिडोर के नीचे व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी. निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जिम्मे होगा और जल्द ही फिजिकल सर्वे के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

सिंहस्थ उज्जैन में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर हो रहीं 
सिंहस्थ उज्जैन में हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक मेला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देशभर से आते हैं. यह सिर्फ पूजा-पाठ का आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन की पहचान और आस्था का प्रतीक भी है. भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ 2028 के लिए पूरी तरह से नया रूप दिया जा रहा है. शहर में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर की जा रही हैं. दो नए एलिवेटेड कॉरिडोर भी बनाए जाएंगे. इस बार सिंहस्थ उज्जैन को एक आधुनिक और धार्मिक नगरी के रूप में दुनिया के सामने पेश करेगा.

सिंहस्थ 2028 के लिए 23,332 करोड़ की विकास योजनाएं
अब तक सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए ₹23,332 करोड़ की लागत से 153 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें उज्जैन-मक्सी रोड, सिंहस्थ बायपास, इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग, और इंगोरिया-उन्हेल रोड जैसी प्रमुख सड़कें शामिल हैं. सिंहस्थ उज्जैन 2028 को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में अब तक 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की 150+ परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं. इनमें 2 एलिवेटेड कॉरिडोर, सड़क विस्तार, नए बायपास, धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं का विस्तार शामिल है. उज्जैन को आधुनिक और अध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है. ट्रैफिक जाम से राहत और भविष्य की मेट्रो योजना को ध्यान में रखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो.

प्रमुख प्रगति कार्यों की स्थिति-

  •     सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना का कार्य 20% पूर्ण हो चुका है और तेज गति से जारी है.
  •     खान डायवर्सन योजना की प्रगति 15% के आसपास है और कार्य तेज़ी से चल रहा है.
  •     इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन सड़क परियोजना, जो एमपीआरडीसी द्वारा संचालित है, उसमें भी 15% कार्य पूर्ण हो चुका है.
  •     इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना डीपीआर स्तर पर है, जिसकी निविदा शीघ्र जारी की जाएगी.

नए विकास कार्यों को मिली रफ्तार:

फ्रीगंज ब्रिज का कार्य उल्लेखनीय प्रगति पर है. एजेंसी ऑन बोर्ड हो चुकी है और स्थल पर कार्य जल्द दिखाई देगा.  वहीं, हरि फाटक चौड़ीकरण परियोजना की डीपीआर बन चुकी है, और इसमें कितने भू-अर्जन की आवश्यकता होगी, इसका आकलन किया जा रहा है.  इस योजना की निविदा भी आगामी एक सप्ताह में जारी की जाएगी.

सिंहस्थ सिटी योजना पर सक्रियता
सिंहस्थ सिटी के प्रस्ताव का प्रकाशन हो चुका है, और इसमें दावा-आपत्ति की अवधि 25 मई तक तय की गई है. किसानों को लेआउट दिखाए जा रहे हैं, ताकि कोई भ्रम या शंका न रहे. प्रशासन की टीमें – जिसमें पटवारी, नगर निगम कर्मी और युडीए के अधिकारी शामिल हैं- घर-घर जाकर किसानों को जानकारी दे रही हैं और उनके डाउट्स को मौके पर क्लियर कर रही हैं. कलेक्टर ने बताया कि हर भू-स्वामी के सामने से 18 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत सरकार किसानों की 50% भूमि अधिग्रहित करेगी, जिसमें सड़क, पार्क, सीवरेज और अन्य विकास कार्य शामिल होंगे.

एलिवेटेड कॉरिडोर पर काम
मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित दो एलिवेटेड कॉरिडोर- मकोडिया आम से इंदौर गेट और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक की डीपीआर निर्माणाधीन है और उनकी निविदा भी शीघ्र जारी की जाएगी.

जलप्रदाय योजना में सुधार की दिशा में कदम
हरिया खेड़ी जलप्रदाय योजना की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है. इसके पूर्ण होने पर गर्मी के दिनों में शहर में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की समस्या से राहत मिलेगी. सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना से पेयजल की स्थिति सुधरेगी और शिप्रा नदी को 12 महीने प्रवाहमान रखने की योजना को बल मिलेगा. स

चौड़ीकरण जैसे आंतरिक कार्यों में भी उत्साहजनक प्रगति
स्थानीय रहवासी स्वयं अपने भवन पीछे हटाकर प्रशासन को सहयोग दे रहे हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है. निरीक्षण के बाद कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया गया है.

एयरपोर्ट विस्तार की दिशा में पहल
कलेक्टर ने बताया कि उज्जैन की हवाई पट्टी के विस्तार को लेकर भी कार्य प्रारंभ हो चुका है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा सर्वे किया गया है, और प्रशासन की ओर से भी भूमि व तकनीकी सर्वे किया जा रहा है. यह कार्य भविष्य की हवाई यातायात आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है. कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जो कार्य वर्षों में होते हैं, उन्हें 12 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सभी विभागों को इसके लिए संसाधन और समन्वय बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. 

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