मंदिर न्यास का नया अध्यादेश पास, 2025 से सरकार को संपत्ति और प्रशासन में अधिकार

लखनऊ
यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के तीसरे दिन श्री बांके बिहारी मंदिर निर्माण आर्डिनेंस को मंजूरी मिल गई। सदन में बुधवार सुबह 11 बजे विकसित भारत, विकसित यूपी विजन डॉक्‍युमेंट 2047 पर लगातार 24 घंटे की चर्चा शुरू हुई। इसमें सरकार विभागवार उपलब्धियां और विजन रख रही है जबकि विपक्ष के सवालों का दौर भी जारी है। इस बीच सत्र में बांके बिहारी कॉ‍रिडोर आर्डिनेंस विधेयक भी पास हो गया। सुबह सरकार की तरफ से मथुरा स्थित विश्वप्रसिद्ध श्री बांके बिहारी जी मंदिर के संचालन, संरक्षण और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ‘ श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्यास अध्यादेश , 2025’ विधानसभा के पटल पर रखा गया। सरकार ने कहा कि यह अध्यादेश परंपरागत पूजा-पद्धति और धार्मिक मान्यताओं को बिना छुए, प्रबंधन, सुरक्षा और सेवा-सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस अध्यादेश के लागू होने से श्री बांके बिहारी जी मंदिर न केवल अपनी प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखेगा, बल्कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और आधुनिक अनुभव भी प्रदान करेगा।

अध्यादेश स्पष्ट करता है कि मंदिर के चढ़ावे, दान और सभी चल-अचल संपत्तियों पर न्यास का अधिकार होगा। इसमें मंदिर में स्थापित मूर्तियां, मंदिर परिसर और प्रसीमा के भीतर देवताओं के लिए दी गई भेंट/उपहार, किसी भी पूजा-सेवा-कर्मकांड-समारोह-धार्मिक अनुष्ठान के समर्थन में दी गई संपत्ति, नकद या वस्तु रूपी अर्पण, तथा मंदिर परिसर के उपयोग के लिए डाक/तार से भेजे गए बैंक ड्राफ्ट और चेक तक शामिल हैं। मंदिर की संपत्तियों में आभूषण, अनुदान, योगदान, हुंडी संग्रह सहित श्री बांके बिहारी जी मंदिर की सभी चल एवं अचल संपत्तियां सम्मिलित मानी जाएंगी।

सरकार ने कहा है कि न्यास का गठन स्वामी हरिदास की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है। स्वामी हरिदास के समय से चली आ रही रीति-रिवाज, त्योहार, समारोह और अनुष्ठान बिना किसी हस्तक्षेप या परिवर्तन के जारी रहेंगे। न्यास दर्शन का समय तय करेगा, पुजारियों की नियुक्ति करेगा और वेतन, भत्ते/प्रतिकर निर्धारित करेगा। साथ ही भक्तों और आगंतुकों की सुरक्षा तथा मंदिर के प्रभावी प्रशासन और प्रबंधन की जिम्मेदारी भी न्यास पर होगी। न्यास गठन के बाद श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुख-सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रसाद वितरण, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए अलग दर्शन मार्ग, पेयजल, विश्राम हेतु बेंच, पहुंच एवं कतार प्रबंधन कियोस्क, गौशालाएं, अन्नक्षेत्र, रसोईघर, होटल, सराय, प्रदर्शनी कक्ष, भोजनालय और प्रतीक्षालय जैसी व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।

न्यास में सिर्फ हिंदू ही होंगे सदस्य
न्यास का संचालन 18 सदस्यीय न्यासी बोर्ड करेगा। इसमें 11 मनोनीत सदस्य होंगे, जिनमें 3 वैष्णव परंपरा से, 3 अन्य सनातन परंपराओं से, 3 विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित व्यक्ति, 2 गोस्वामी परंपरा से (राज-भोग व शयन-भोग सेवायत) होंगे। इसके अतिरिक्त 7 पदेन सदस्य होंगे, जिनमें जिलाधिकारी मथुरा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, नगर आयुक्त, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ, धर्मार्थ कार्य विभाग का एक अधिकारी, श्री बांके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के सीईओ और राज्य सरकार द्वारा नामित एक सदस्य सम्मिलित होंगे। मनोनीत न्यासियों का कार्यकाल 3 वर्ष होगा, पुनर्नियुक्ति अधिकतम दो बार हो सकेगी। सभी न्यासी हिंदू और सनातन धर्म मानने वाले होंगे। इसके अलावा यदि कोई पदेन सदस्य सनातन धर्म को नहीं मानने वाला/गैर-हिंदू हुआ तो उसकी जगह उससे कनिष्ठ अधिकारी को नामित किया जाएगा।

बोर्ड की शक्तियां और कर्तव्य
प्रशासनिक, प्रबंधकीय और पर्यवेक्षी शक्तियों का प्रयोग
न्यास निधि का प्रबंधन, निवेश, आय-व्यय की स्वीकृति
चल-अचल संपत्ति का अधिग्रहण या स्वीकृति
20 लाख रुपये तक की संपत्ति की खरीद-फरोख्त की अनुमति, इससे अधिक पर राज्य सरकार की स्वीकृति अनिवार्य
कानूनी मामलों में प्रतिनिधित्व और वकीलों की नियुक्ति
पुजारियों, सेवायतों और कर्मचारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तें व वेतन निर्धारण
आवश्यक कार्यों और शक्तियों का प्रत्यायोजन
तीसरे पक्ष के अधिकारों को रोकना, संपत्ति का विक्रय या पट्टा केवल राज्य सरकार की अनुमति से
मंदिर की संपत्तियों, आभूषणों और मूल्यवान वस्तुओं की सुरक्षा
न्यास का मुख्य उद्देश्य
स्वामी हरिदास के समय से चली आ रही पूजा-पद्धतियों, त्यौहारों और अनुष्ठानों की निर्बाध निरंतरता
श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और सहज दर्शन की व्यवस्था
प्रसाद वितरण, दिव्यांगजनों व वरिष्ठ नागरिकों के लिए पहुंच-सुविधा
पेयजल, विश्राम स्थल, कतार प्रबंधन, गौशाला, अन्नक्षेत्र, यात्रागृह, होटल और प्रदर्शनी कक्ष जैसी आधुनिक सुविधाएं
मंदिर की संरचनात्मक सुरक्षा व दीर्घकालिक संरक्षण हेतु विशेषज्ञ परामर्श
दान, चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन में वित्तीय पारदर्शिता
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और आस-पास क्षेत्र का योजनाबद्ध विकास
 

राज्य सरकार का नहीं होगा कोई दखल
अध्यादेश में स्पष्ट किया गया है कि मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क), 19(1)(6), 25 और 26 के अनुरूप सभी धार्मिक पहलुओं का सम्मान किया जाएगा। राज्य सरकार का उद्देश्य केवल वित्तीय पारदर्शिता और संसाधनों का जवाबदेह उपयोग सुनिश्चित करना है, न कि मंदिर की आस्तियों पर किसी तरह का अधिकार जताना।

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