ट्रंप भारत संग कर रहे थे बड़ी डील की बात, अचानक क्यों बिगड़ गया माहौल?

वाशिंगटन 
भारत पर अमेरिकी टैरिफ की मार जारी है। बुधवार से अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क भी लागू हो गया। इसके साथ ही भारतीय निर्यात पर अब कुल 50 फीसदी शुल्क लगेगा। खास बात है कि भारत और ब्राजील दो ही ऐसे देश हैं, जिनपर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इतना टैरिफ लगाया है। सवाल है कि आखिर कैसे बड़े सहयोगी माने जाने वाले दो देश व्यापार के लिहाज से तकरार का सामना कर रहे हैं।

ट्रंप क्या बताते हैं ज्यादा टैरिफ की वजह
जुलाई में जब ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया तो इसकी वजह ब्रिक्स बताई। तब उन्होंने कहा था, 'हम अभी बातचीत कर रहे हैं और इसमें ब्रिक्स का मसला भी शामिल है। आप जानते हैं, ब्रिक्स अमेरिका विरोधी देशों का एक समूह है और भारत इसका सदस्य है। यह अमेरिकी मुद्रा पर हमला है और हम किसी को भी ऐसा नहीं करने देंगे।'

ट्रंप ने घाटे की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था, 'यह निर्णय आंशिक रूप से ‘ब्रिक्स’ की वजह से लिया गया है और इसमें कुछ हद तक घाटे की भूमिका है। हमें बहुत बड़ा घाटा हुआ है। जैसा कि आप जानते हैं, प्रधानमंत्री मोदी मेरे मित्र हैं लेकिन वे हमारे साथ व्यापार के मामले में बहुत ज्यादा जुड़े नहीं हैं।'

7 महीनों में ऐसा क्या हो गया
फरवरी- भारतीय प्रधानमंत्री ने अमेरिका के साथ सीमित व्यापार समझौते और साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक करने पर सहमत हुए। साथ ही उन्होंने अमेरिका से ऊर्जा खरीद में भी इजाफा का वादा किया था।

मार्च- केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल वॉशिंगटन पहुंचते हैं और ट्रंप सरकार में मंत्री हॉवर्ड लुटनिक से मुलाकात करते हैं। साथ ही उन्होंने अधिकारी जैमिसन ग्रीर से भी चर्चा की। इसके बाद मार्च में ही अमेरिकी अधिकारी बातचीत के लिए दिल्ली पहुंचे थे। तब तक भारत ने कहा था कि अमेरिका के साथ अच्छी चर्चा चल रही है। खबर है कि एक रिपोर्ट में भारत की तरफ से लगाए जाने वाले भारी टैरिफ, डेटा कानून और पेटेंट के मुद्दे का जिक्र किया गया था।

अप्रैल- उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भारत पहुंचे और द्विपक्षीय वार्ता की रूपरेखा तैयार हुई। तब भारतीय अधिकारियों की तरफ से कहा गया था कि 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले डील साइन हो जाएगी।

मई- गोयल ने फिर वॉशिंगटन का दौरा किया और इस बार उनके साथ बड़े वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी थे। कहा जा रहा था कि भारत को अच्छे नतीजों की उम्मीद थी।

जून- अमेरिका के वाणिज्य मंत्री लुटनिक 3 जून को भारत आते हैं। उन्होंने कहा था कि भारत और अमेरिका अच्छी प्रगति कर रहे हैं और जल्द ही डील पर अंतिम मुहर लग सकती है। खुद ट्रंप ने भी कहा था कि भारत के साथ बड़ी डील होने वाली है।

रॉयटर्स से बातचीत में भारतीय अधिकारियों ने बताया था कि खासतौर से कृषि उत्पादों पर इम्पोर्ट ड्यूटी के मामले में असहमति होने के चलते बातचीत रुक गई है। इसके बाद 20 जून को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि उन्होंने ट्रंप का अमेरिका आने का न्योता अस्वीकार कर दिया था।

जुलाई- गोयल ने 4 जुलाई को कहा था कि भारत डेडलाइन के लिए डील नहीं करेगा और राष्ट्र के हित को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इसके बाद 15वें दौर की बातचीत के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर अमेरिका पहुंचा। खास बात है कि उस दौरान ट्रंप लगातार दावा कर रहे थे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रुकवाया।

पीएम मोदी ने जुलाई में संसद में कहा कि 'विश्व के किसी भी नेता ने हमें ऑपरेशन रोकने के लिए नहीं कहा।' इसके बाद 31 जुलाई को ट्रंप ने पहली बार भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

अगस्त- 7 अगस्त को ही नए टैरिफ रेट लागू हुए थे कि कुछ समय बाद ट्रंप ने 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की भी घोषणा कर दी। इससे पहले पीएम मोदी ने कहा था कि भारत किसानों के हित से समझौता नहीं करेगा।

खास बात है कि 25-29 अगस्त के बीच भारत आ रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा रद्द हो गई। इधर, पीएम मोदी ने चीन जाने की तैयारी कर ली थी।
इन मुद्दों पर फंसा पेंच

रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों का कहना है कि कई स्तर पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। खासकर अमेरिका चाहता है कि उसके डेयरी और कृषि से जुड़े उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ती दरों पर बेचे जाएं। इसके लिए बीटीए के तहत भारत आयात शुल्क में रियायत दे, जिस पर भारत सहमत नहीं है। भारत उन उत्पादों को समझौते में शामिल नहीं करना चाहता है या फिर उन उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने को तैयार नहीं है, जिनसे घरेलू बाजार, उद्योग और किसान प्रभावित हों।

क्या चाहता है भारत

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत भारत श्रम-प्रधान क्षेत्रों को लेकर विशेष शुल्क रियायत देने की मांग कर रही है। इनमें वस्त्र, रत्न एवं आभूषण, चमड़े के सामान, परिधान, प्लास्टिक, रसायन, झींगा, तिलहन, अंगूर और केले जैसे उत्पाद शामिल हैं। समझौते के तहत भारत अतिरिक्त शुल्क (26 प्रतिशत) को हटाने की मांग कर रहा है। वहीं, स्टील और एल्युमीनियम (50 प्रतिशत) और ऑटो क्षेत्र (25 प्रतिशत) के शुल्क भी कमी चाहता है।

 

More From Author

महंगाई से मिलेगी राहत? फूड और कपड़ों को 5% GST में लाने की तैयारी

माइकल क्लार्क स्किन कैंसर से जूझे, नाक से गांठ हटाई गई, पोस्ट में किया इमोशनल खुलासा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13766/145

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.