पुरातन काल से, भारतीय शिक्षा पद्धति एवं न्याय पद्धति विश्व में सर्वश्रेष्ठ : मंत्री परमार

मूल्यांकन की पारदर्शिता के लिए "डिजिटल मूल्यांकन" की बना रहे हैं कार्ययोजना
मंत्री श्री परमार ने सुनी विद्यार्थियों के मन की बात, नियमानुरूप क्रियान्वयन का दिया आश्वासन
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा "विद्यार्थी संवाद" कार्यक्रम का हुआ आयोजन

भोपाल 
विद्यार्थियों की परीक्षाओं के मूल्यांकन की पारदर्शिता के लिए, डिजिटल मूल्यांकन की कार्ययोजना बना रहे हैं। इससे विद्यार्थियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक हो सकेगी। साथ ही विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं की सार्वजनिक उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने भोपाल स्थित होटल पलाश रेसीडेंसी के सभाकक्ष में, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित "विद्यार्थी संवाद" कार्यक्रम में सहभागिता कर कही।

उच्च शिक्षा मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय, आवंटित भारतीय भाषाओं जैसे कन्नड़, गुजराती, तमिल, तेलगु, बांग्ला, असमिया आदि को सिखाने की कार्ययोजना पर क्रियान्वयन कर रहे हैं। इससे हिंदी भाषी मध्यप्रदेश से, देश भर में सभी भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान के भाव का संदेश जाएगा। श्री परमार ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 के अनुसरण में, शिक्षा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। श्री परमार ने कहा कि भारत का ज्ञान, सार्वभौमिक था। हमारी संस्कृति में ज्ञान का दस्तावेजीकरण नहीं था। हमारे पूर्वजों ने शोध एवं अध्ययन कर, ज्ञान को परंपरा के रूप में समाजव्यापी बनाया था। अतीत के विभिन्न कालखंडों में, योजनाबद्ध रूप से हमारे ज्ञान को दूषित करने का कुत्सित प्रयास किया गया। श्री परमार ने कहा कि भारतीय समाज में विद्यमान परंपरागत ज्ञान को पुनः शोध एवं अनुसंधान के साथ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के सापेक्ष युगानुकुल परिप्रेक्ष्य में दस्तावेजीकरण से समृद्ध करने की आवश्यकता हैं। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हर क्षेत्र हर विषय में, भारत विश्वमंच पर अग्रणी और सर्वश्रेष्ठ था। हमारे पूर्वजों के पास समृद्ध ज्ञान एवं तकनीक थी। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़े विविध उदाहरण प्रस्तुत कर, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समृद्ध भारतीय ज्ञान पर विस्तृत प्रकाश डाला। मंत्री श्री परमार ने कहा कि हमारे पूर्वजों के ज्ञान पर गर्व का भाव जागृत कर, वर्ष 2047 के विकसित भारत की संकल्पना सिद्धि में सहभागिता करने की आवश्यकता है। मंत्री श्री परमार ने कहा कि पुरातन काल से, भारतीय शिक्षा पद्धति एवं न्याय पद्धति विश्व में सर्वश्रेष्ठ रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारत के दर्शन के आधार पर, भारत केंद्रित शिक्षा की ओर अग्रसर होने का महत्वपूर्ण अवसर दिया है।

मंत्री श्री परमार ने कहा कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं। इसके लिए आवश्यक संसाधनों, शिक्षकों एवं अन्य समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लगातार कार्य हो रहे हैं। मंत्री श्री परमार ने विद्यार्थियों के मन की बात सुनी और उनके सुझावों पर नियमानुरूप क्रियान्वयन के लिए उन्हें आश्वस्त भी किया।

कार्यक्रम में भोपाल एवं नर्मदापुरम संभाग के शासकीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता कर, अपनी जिज्ञासा, अपेक्षाएं एवं महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसरण में पाठ्यक्रम की उपलब्धता, संकाय वृद्धि, स्नातकोत्तर में उन्नयन, कैम्पस प्लेसमेंट, संसाधनों की उपलब्धता, छात्राओं के लिए आवागमन की सुविधा, संस्थान परिसर की सुरक्षा सहित विभिन्न विषयों पर अपने सुझाव साझा किए। इस दौरान छात्रा सुश्री रोशनी मालवीय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के परिप्रेक्ष्य में आयोजित कार्यशाला में सीखी ब्राम्ही लिपि में, स्वलिखित रचना भेंट की।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा श्री अनुपम राजन ने कार्यक्रम के उद्देश्य से विद्यार्थियों को अवगत कराया एवं उनके सुझावों को सुना। श्री राजन ने कहा कि विद्यार्थियों के समस्त सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार मंथन कर, आवश्यक क्रियान्वयन करेंगे। श्री राजन ने कहा कि उच्च शिक्षा के परिवेश को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए, विद्यार्थियों से संवाद का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

कार्यक्रम में आयुक्त उच्च शिक्षा श्री प्रबल सिपाहा सहित छात्र प्रतिनिधि के रूप में छात्र अक्षत राजौरिया एवं छात्रा दिशा शिवहरे मंचासीन थे। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारीगण एवं प्राध्यापकगण भी उपस्थित थे।

 

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