एसआईआर को लेकर बड़ा दावा, मतदाता सूची पुनरीक्षण में अधिकांश राज्यों में नहीं चाहिए दस्तावेज़

नई दिल्ली

बीते लगभग दो महीने में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जमकर आरोप-प्रत्यारोप हुए। बिहार से उपजा यह मामला इतना गंभीर हो चुका है कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा हुआ और अदालत को सख्त टिप्पणी में कहना पड़ा कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो कोर्ट पूरी एसआईआर प्रक्रिया को निरस्त कर देगा। अब ताजा घटनाक्रम में एसआईआर को लेकर निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बड़ा दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक अधिकांश राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के वक्त दस्तावेजों की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। अधिकारियों ने इस दावे के समर्थन में तर्क भी दिए हैं। जानिए अधिकारियों ने और क्या कहा…

दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही मौजूद
बुधवार को चुनाव आयोग (EC) के अधिकारियों ने कहा, देश के अधिकांश राज्यों में आधे से अधिक मतदाताओं को आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। इसका कारण है कि दस्तावेज और मतदाताओं का ब्योरा पहले से ही उन राज्यों की पिछली गहन पुनरीक्षण सूची के दौरान दर्ज हो चुके हैं।

दस्तावेजों की जरूरत क्यों नहीं? इस उदाहरण से समझिए
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश राज्यों में पिछली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2002 से 2004 के बीच हुआ था। उसी वर्ष की मतदाता सूची के आधार पर आगामी एसआईआर कराई जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि बिहार में 2003 की मतदाता सूची का उपयोग इस साल के विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए किया गया। दिल्ली में पिछला SIR 2008 और उत्तराखंड में 2006 में हुआ था। इन राज्यों की उस समय की मतदाता सूचियां संबंधित CEO (मुख्य निर्वाचन अधिकारी) की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

मतदाताओं के लिए प्रावधान
बिहार में जारी निर्देशों के अनुसार, 2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण में सूचीबद्ध लगभग 4.96 करोड़ मतदाताओं (कुल वोटर्स का 60%) को जन्मतिथि या जन्मस्थान साबित करने के लिए कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। उन्हें केवल उसी सूची का संबंधित हिस्सा दिखाना होगा। हालांकि, लगभग 3 करोड़ मतदाताओं (40%) के लिए जन्मस्थान या जन्मतिथि साबित करने के लिए 12 निर्धारित दस्तावेजों में से एक देना अनिवार्य होगा।

नया घोषणा प्रपत्र
एसआईआर को लेकर जारी गहमागहमी के बीच निर्वाचन आयोग ने एक अतिरिक्त घोषणा प्रपत्र (declaration form) भी लागू किया है। यह उन आवेदकों के लिए है जो पहली बार मतदाता बनना चाहते हैं या किसी अन्य राज्य से पता बदलकर आए हैं। इसमें उन्हें यह घोषणा करनी होगी कि उनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले भारत में हुआ था। ऐसे मतदाता भी अपने जन्म से संबंधित कोई दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे। अगर किसी शख्स का जन्म 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच हुआ हो, तो ऐसे मामले में उन्हें अपने माता-पिता के जन्म संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत करने होंगे।

एसआईआर पर विवाद और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
गौरतलब है कि बिहार में हो रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। विरोध कर रहे दलों की दलील है कि चुनाव से चंद महीने पहले जल्दबाजी में कराए जा रहे SIR को लेकर आयोग की टाइमिंग संदिग्ध है। ऐसा करने के कारण करोड़ों योग्य नागरिकों मताधिकार से वंचित हो सकते हैं। विवाद को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए।

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