राज कुंद्रा पर ED की शिकंजा, ₹150 करोड़ के बिटकॉइन घोटाले में दाखिल हुई चार्जशीट

मुंबई 
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा के खिलाफ 150 करोड़ के बिटकॉइन के मालिकाना हक मामले में चार्जशीट दायर की है. ED का दावा है कि कुंद्रा सिर्फ एक बिचौलिये की भूमिका में नहीं थे, बल्कि वो खुद 285 बिटकॉइन के एक्चुअल लाभार्थी हैं, जिसकी मौजूदा कीमत 150 करोड़ रुपये है. PMLA कोर्ट में दायर आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा को बिटकॉइन, जिनकी वर्तमान कीमत ₹150.47 करोड़ है, क्रिप्टो घोटाले के दिवंगत मास्टरमाइंड अमित भारद्वाज से मिले थे.

कुंद्रा ने सबूत छुपाए : ED

ED के मुताबिक, कुंद्रा लेन-देन के महत्वपूर्ण डिटेल बताने में विफल रहे हैं. आरोपपत्र में कहा गया है कि कुंद्रा ने जानबूझकर बिटकॉइन वॉलेट के एड्रेस सहित महत्वपूर्ण सबूत छुपाए और भारद्वाज से मिले बिटकॉइन भी नहीं लौटाए. आरोपपत्र में कहा गया है, '2018 से कई मौकों के बावजूद कुंद्रा लगातार उन वॉलेट के एड्रेस नहीं दे पाए हैं जहाँ 285 बिटकॉइन ट्रांसफर किए गए थे. कुंद्रा ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि उनके शुरुआती बयान के तुरंत बाद वॉलेट डिटेल वाला उनका iPhone X खराब हो गया था. 

बिटकॉइन पोंजी स्कैम से जुड़ा लिंक

ये मामला महाराष्ट्र पुलिस और दिल्ली पुलिस द्वारा वेरिएबल टेक प्राइवेट, अमित भारद्वाज और अन्य सहयोगियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR से सामने आया. भारद्वाज ने कथित तौर पर क्रिप्टो माइनिंग के जरिए निवेशकों को ऊंचे रिटर्न का लालच दिया, लेकिन इसके बजाय उन्हें 'धोखा' दिया और 'गलत तरीके से कमाए गए बिटकॉइन को अज्ञात ऑनलाइन वॉलेट में छिपा दिया गया था.'

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला क्रिप्टो दुनिया के कुख्यात नाम अमित भारद्वाज से जुड़ा है.  जिसे ‘गेन बिटकॉइन’ पोंजी स्कैम का मास्टरमाइंड कहा जाता था. ED का आरोप है कि भारद्वाज से राज कुंद्रा को 285 बिटकॉइन मिले थे. जांच एजेंसी के मुताबिक, कुंद्रा ने लगातार जांच को गुमराह करने की कोशिश की. 

ED ने कहा- सिर्फ बिचौलिये नहीं, मालिक थे राज कुंद्रा

राज कुंद्रा ने ये तर्क दिया कि वो इस मामले में केवल मध्यस्थ थे और उनके पास कोई प्रत्यक्ष स्वामित्व नहीं था, लेकिन ED का कहना है कि समझौते की शर्तों और लगातार लेन-देन की जानकारी रखने के कारण ये साफ है कि राज ही वास्तविक लाभार्थी थे।

    इतना ही नहीं, 7 साल पुराने लेन-देन को लेकर उनका स्पष्ट विवरण देना यह साबित करता है कि बिटकॉइन उन्हीं के पास थे।

गेन बिटकॉइन घोटाला क्या है?

इस घोटाले में हजारों निवेशकों से पैसे जुटाए गए थे। वादा किया गया था कि बिटकॉइन माइनिंग से उन्हें मोटा मुनाफा मिलेगा, लेकिन इसके बजाय निवेशकों का पैसा गायब कर दिया गया और बिटकॉइन गुप्त वॉलेट्स में छिपा दिए गए।

    महाराष्ट्र और दिल्ली पुलिस ने इस धोखाधड़ी को लेकर कई शिकायते दर्ज की थीं, जिसके आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। चार्जशीट में राज के अलावा कारोबारी राजेश सतीजा का नाम भी सामने आया है।
    

 

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