भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ

  • एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों में रास्ते खोलेंगे : यूएस टैरिफ पर बोले सीएम योगी
  •  भदोही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ
  •  मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमियों से कहा- यूएस टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं, चुनौतियां अवसर लेकर आती हैं
  • यूएई, यूके और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से खुलेंगे नये बाजार के द्वार : मुख्यमंत्री 
  •  भदोही, मीरजापुर और वाराणसी को जोड़कर बनाया जाएगा विशेष कार्पेट डेवलपमेंट रीजन
  • मुख्यमंत्री ने कहा : भदोही को छोटा मत समझिए, यह प्रदेश की आर्थिक ताकत है
  •  88 देशों में पहुंच रही हैं भदोही की कालीनें : सीएम योगी
  •  मुख्यमंत्री ने कालीन उद्यमियों और बायर्स से किया संवाद 
  • कार्पेट उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने हाई लेवल कमेटी का गठन किया : मुख्यमंत्री
  •  कालीन उद्योग 17 हजार करोड़ का निर्यात और 30 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है
  •  दीपावली पर सभी जिलों के स्वदेशी मेलों में अपना जलवा बिखेर रही है भदोही की कालीनें

 

भदोही
 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को भदोही में 49वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला और चौथे कार्पेट एक्सपो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए कालीन उद्यमियों और निर्यातकों के साथ संवाद करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार हर स्थिति में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह हमारे लिए नए अवसरों के द्वार खोलने का समय है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि “जब भी चुनौतियां आती हैं, वे अपने साथ अवसर भी लाती हैं। अमेरिका ने टैरिफ लगाया है, लेकिन यह केवल एक देश का निर्णय है। हम यूएई, यूके और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में ये समझौते हमारे उद्योगों के लिए नए बाजार खोलेंगे।” उन्होंने बताया कि सरकार ने इस विषय पर हाई लेवल कमेटी का गठन किया है जो टैरिफ से उत्पन्न स्थिति पर लगातार काम कर रही है।

ग्लोबल मार्केट में बढ़ी है भदोही के कालीन की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि 11 वर्ष पहले कार्पेट उद्योग बंदी के कगार पर था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भदोही, मीरजापुर और वाराणसी के कार्पेट क्लस्टर को नई ऊर्जा मिली। भदोही को केंद्र बनाकर कार्पेट एक्सपो मार्ट की स्थापना की गई। जब पहला एक्सपो हुआ था, तब विदेशी खरीदारों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन आज 88 देशों से तीन से चार सौ फॉरेन बायर्स यहां आ रहे हैं। यह बताता है कि ग्लोबल मार्केट में आपके कालीनों की मांग कितनी बढ़ी है। योगी आदित्यनाथ ने अपने उद्बोधन में कहा कि यूपी सरकार ने कार्पेट सेक्टर सहित एमएसएमई और ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रॉडक्ट) योजना के तहत प्रत्येक जिले में विशिष्ट उद्योगों को प्रोत्साहित किया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल, फिरोजाबाद के ग्लास और वाराणसी के सिल्क को नई पहचान मिली है। 2017 में जब हमने ओडीओपी योजना शुरू की थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यूपी दो लाख करोड़ से अधिक का निर्यात करेगा, यह अब वास्तविकता बन चुकी है।

कार्पेट उद्योग महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम
मुख्यमंत्री ने बताया कि कार्पेट उद्योग केवल व्यापार नहीं है, यह हमारे कारीगरों और हस्तशिल्पियों की जीवंत परंपरा है। आज यह उद्योग 25 से 30 लाख लोगों को रोजगार देता है और हर साल करीब 17 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है। महिला स्वावलंबन का यह सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। सरकार का प्रयास है कि इस उद्योग को और अधिक महिलाओं से जोड़ा जाए ताकि वे घर पर रहकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकें। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि भदोही को छोटा मत समझिए, यह प्रदेश और देश की आर्थिक ताकत का प्रतीक है। 2014 से पहले यह उद्योग लगभग मृतप्राय हो चुका था, लेकिन आज यह यूपी की पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में स्वदेशी मेले का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भदोही की कालीनों के विशेष स्टॉल लगाए गए हैं।

कार्पेट उद्यमियों से मुख्यमंत्री ने किया संवाद
रवि पाटेरिया ने कहा कि “कालीन उद्योग हाथों का जादू है। हमने विश्व का सबसे बड़ा कालीन बनाकर कजाकिस्तान भेजा है। इस कला को विशेष दर्जा मिलना चाहिए।” इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विचार समिति के गठन पर सरकार विचार कर रही है, ताकि उद्यमियों के सुझावों को नीतिगत निर्णयों में शामिल किया जा सके।

हाजी हमीद ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “आपकी प्रतिबद्धता ने कालीन उद्योग को नया जीवन दिया है। भदोही और प्रदेश दोनों को इस उद्योग के माध्यम से वन ट्रिलियन इकॉनमी में सहभागी बनाया जा सकता है।”

अनिल सिंह ने मीरजापुर-विंध्य कॉरिडोर के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि आसपास के क्षेत्रों को भी एनसीआर की तरह विकसित किया जाए, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “भदोही, वाराणसी और मीरजापुर को जोड़कर विकास क्षेत्र के रूप में तैयार करने की दिशा में कार्य चल रहा है।”

आदर्श पूर्णिमा, जो चार दशकों से इस उद्योग से जुड़ी हैं, ने कहा कि “आध्यात्म और राजनीति का संगम हो तो सफलता निश्चित है।” वहीं निर्यातक आलोक बरनवाल ने बुनकरों की कमी और श्रमिकों के पलायन की समस्या उठाई, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि “हम उद्योग को महिलाओं और स्थानीय श्रमिकों से जोड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहे हैं।“

मुख्यमंंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल उद्योग को बचाना नहीं, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाना है। जब एक देश टैरिफ लगाएगा तो हम 10 नए देशों के लिए अपने रास्ते खोलेंगे। यही आत्मनिर्भर भारत की भावना है। चुनौतियों से घबराना नहीं है, बल्कि उन्हें अवसर में बदलना है। सरकार आपके साथ है, आपका भविष्य उज्ज्वल है।

इस अवसर पर सांसद डॉ विनोद बिंद, विधायकगण दीनानाथ भास्कर, विपुल दुबे, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, विकास आयुक्त हस्तशिल्प भारत सरकार अमृत राज, सीपीसी के चेयरमैन कुलदीप, पद्मश्री डॉ रजनीकांत, भदोही कार्पेट उद्योग से जुड़े पदाधिकारीगण, स्टेक होल्डर्स सहित कई गणमान्य मौजूद रहे। 

मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों को किया सम्मानित, प्रदान किया ऋण
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को ऋण प्रदान किया। इनमें अमित कुमार को ओडीओपी के अंतर्गत कालीन उद्योग के लिए दो करोड़ का ऋण प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के अंतर्गत शिवम जायसवाल को 60 लाख रुपए का ऋण, पुनीत प्रताप सिंह को वॉलपेपर उद्योग के लिए 15 लाख का ऋण, रामजी विश्वकर्मा को ऑटोपार्ट्स उद्यम के लिए 10 लाख का ऋण, विकास विश्वकर्मा को पांच लाख का ऋण आयरन वर्क के लिए, सौरभ कुमार पाठक को पांच लाख का ऋण स्टेबलाइज़र उद्योग के लिए, ज्योति मौर्य को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत टेलरिंग कार्य एवं लॉन्ड्रिंग कार्य के लिए शमशेर को टूलकिट वितरण, स्वयं सहायता समूह की कविता राय को 1 करोड़ 44 लाख रुपए का डेमो चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने 55 वर्षों से कालीन उद्योग की सेवा करने वाले रवि पाटेरिया को भी सम्मानित किया, जिनकी कंपनी 145 वर्ष से कालीन निर्माण का कार्य कर रही है। रवि पाटेरिया का नाम विश्व की सबसे बड़ी कालीन बनाने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल है। 

 

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