बिलासपुर में भव्य छठघाट की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं की उम्मीद, 25 ट्रक मलबा हटाया गया

 बिलासपुर 

 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में दिवाली के बाद अब आस्था के महापर्व छठ पूजा की धूम मचने वाली है. देश के सबसे बड़े स्थाई छठ घाट के तौर पर मशहूर तोरवा छठ घाट पर तैयारियां ज़ोरों पर हैं. यह घाट करीब 7.5 एकड़ में फैला हुआ है. आयोजन समिति ने बताया है कि इस घाट पर 1 किलोमीटर के एरिया में पूजा और अर्घ्य देने के लिए प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं, जहां एक ही समय में 50,000 से ज़्यादा भक्त सूर्य को अर्घ्य दे सकते हैं. बिहार और उत्तर प्रदेश जहां से छठ पूजा की शुरुआत हुई वहां भी इतना बड़ा और स्थाई घाट नहीं है.

दिवाली के बाद छठ पूजा की तैयारी, 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गा माता की प्रतिमा विसर्जन के बाद अब छठ पूजा की धूम मचने वाली है। आयोजन समिति ने इस महापर्व की तैयारी शुरू कर दी है। यहां देश के सबसे बड़े छठ घाट में एक साथ 50,000 से अधिक लोग सूर्य देव को अर्घ्य देंगे। इस बार यह पर्व 25 नवंबर से 28 नवंबर तक मनाया जाएगा।
बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का महापर्व अब छत्तीसगढ़ में भी

छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का पर्व है, लेकिन पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ में भी इसका उत्साह बढ़ा है। शहर में बसे पूर्वांचल के लोगों के साथ ही स्थानीय लोग भी इस पर्व को मनाने लगे हैं। बिलासपुर का घाट 7 एकड़ में फैला है, जो कि देश में सबसे बड़ा घाट माना जाता है। यहाँ एक किलोमीटर के क्षेत्र में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जा रही है।
घाट की सफाई में जुटी समिति, मलबा हटाने का काम जारी

दुर्गा विसर्जन के दौरान घाट पर इकट्ठे हुए मलबे को हटाने का काम तेजी से जारी है। अब तक 25 ट्रक मलबा निकाल लिया गया है। घाट से निकलने वाले मलबे में लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, रंग-बिरंगे कागज और प्लास्टिक की थैलियां शामिल हैं। इससे न केवल घाट की सफाई प्रभावित हुई है, बल्कि नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है।
महापर्व की शुरुआत नहाय खाय से

छठ पूजा की शुरुआत 25 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ होगी। आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत अन्य पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठ घाट की सफाई और रंग-रोगन के काम में जुटे हुए हैं। समिति ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए सभी को जिम्मेदारियां सौंपी हैं।
छठ घाट का महत्व और श्रद्धालुओं की भागीदारी

पर्व मनाने के लिए घाटों, नदियों या तालाबों का विशेष महत्व होता है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए श्रद्धालु छठी मैया की पूजा-अर्चना करते हैं। बिलासपुर के छठ घाट का आकार इसे विशेष बनाता है, जो कि बिहार के कई घाटों से भी बड़ा है।
साफ-सफाई का काम और घाट का दृश्य

घाट में सफाई का काम तेजी से चल रहा है। सफाई मशीनों के साथ कर्मचारी भी इस काम में जुटे हुए हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम के साथ मिलकर घाट से मलबा निकालने का कार्य किया है, ताकि पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
छठ पूजा कार्यालय की स्थापना

दुर्गा पूजा के बाद अब बिलासपुर में छठ महापर्व की तैयारी जोरों पर है। यहां तोरवा स्थित छठ घाट में छठ पूजा कार्यालय की स्थापना की गई है, जहां समिति के पदाधिकारी और सदस्य घाट पर व्यवस्था बनाने के लिए जुटे हुए हैं। इस कार्यालय के माध्यम से सभी व्यवस्थाओं का संचालन किया जाएगा।
पर्व के दौरान श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

छठ महापर्व पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की पूरी संभावना है। पिछले साल की तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि इस पर्व के दौरान अरपा नदी के तट पर भीड़ काफी बढ़ जाती है। लोग उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपने व्रत को पूरा करते हैं।
समापन

छठ पूजा की तैयारी तेज हो चुकी है और सभी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। बिलासपुर का छठ घाट इस बार और भी सुंदर और व्यवस्थित नजर आएगा, जिससे श्रद्धालुओं को एक अद्भुत अनुभव प्राप्त होगा। सभी भक्तों को इस महापर्व की शुभकामनाएं।

नहाय खाय के साथ 25 अक्टूबर से पर्व की शुरुआत

शहर में छठ पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष प्रवीण झा समेत पदाधिकारी अरपा नदी के तट पर बने छठघाट की साफ-सफाई और रंग-रोगन के काम में जुट गए हैं। समिति के पदाधिकारियों ने महापर्व के सफल आयोजन के लिए तैयारियों का निरीक्षण कर सभी को जिम्मेदारियां सौंपी है।

7 एकड़ में बना छठघाट, 50 हजार श्रद्धालु होंगे शामिल

पर्व मनाने घाटों, नदी या तालाब के घाटों का विशेष महत्व है। यहां डूबते और फिर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठी मैया की पूजा-अर्चना की जाती है। छठ पूजा के लिए बिहार में सैकड़ों घाट हैं। बिलासपुर जैसा स्थायी और बड़ा घाट तो पर्व के उद्गम स्थल बिहार में भी नहीं है।

छठ मुख्य रूप से बिहार प्रांत का पर्व है। बिलासपुर के तोरवा स्थित छठ घाट साढ़े 7 एकड़ में फैला हुआ है। यहां एक किलोमीटर एरिया में पूजा और अर्घ्य के लिए बेदी बनाई जाती है। जिसमें 50 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ सूर्य देव को अर्घ्य दे सकते हैं।

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद 25 ट्रक निकला मलबा

शहर सहित आसपास के क्षेत्रों की दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन के लिए छठघाट में व्यवस्था की गई थी। नदी को गंदा होने से बचाने के लिए यहां कोई अलग से इंतजाम नहीं किया गया था। लोगों ने मनमाने तरीके से नदी में घाट के पास ही प्रतिमा विसर्जन कर दिया, जिससे वहां गंदगी का अंबार लग गया है।

जगह-जगह फैली गंदगी से नदी का जल भी प्रदूषित हो रहा है। प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद स्थिति और बदहाल हो गई है। कहीं लकड़ी के टुकड़े, बांस की बल्लियां, मिट्टी के टूटे हुए बर्तन, पानी में भीगे रंग-बिरंगी कागज, प्लास्टिक की थैलियां, मां की प्रतिमाओं पर चढ़ाई गई लाल और हरे रंग की चुनरी पड़ी हुई हैं। आयोजन समिति ने नगर निगम की मदद से घाट से 25 ट्रक मलबा निकलवाया है।

अरपा नदी के तट पर बना छठ पूजा कार्यालय

दुर्गा पूजा के बाद अब बिलासपुर में छठ महापर्व की तैयारी जोरों से चल रही है। यहां तोरवा स्थित छठ घाट में छठ पूजा कार्यालय बनाया गया है, जहां समिति के पदाधिकारी और सदस्य घाट पर व्यवस्था बनाने के लिए जुटे हुए हैं।

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