कृषि संकट: MP में बेमौसम बारिश से धान, सरसों, मटर और तिल की फसल प्रभावित

भोपाल 

वर्तमान समय प्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि अपना कहर बरपा रही है। प्रदेश  में कहीं भारी बारिश तो कहीं ओलावृष्टि हो रही है, इसके चलते किसान अपनी फसलों को लेकर बहुत चिंतित है। तेज हवा, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की लाखों रूपये की फसल बर्बाद हो गयी है। वर्तमान समय में रबी फसलों की कटाई का दौर चल रहा है। किसानों के सामने इस समय बहुत बड़ा संकट यह है 

बेमौसम बारिश ने राज्य के कई क्षेत्रों में किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। आगर मालवा, ग्वालियर-चंबल व विंध्य महाकोशल से फसलों के नुकसान की खबरें हैं। खेत खलिहानों में रखी कटी फसल और खेतों में खड़ी फसल को खासा नुकसान पहुंचा है। खंडवा में इस बार मौसम (MP Rains) ने पहले सोयाबीन की फसल को प्रभावित किया और अब फसल भीगने से मक्का में अंकुरण शुरू हो गया है। सूखने के लिए रखी उपज भीगने से काली भी पड़ रही है। 50 से 60 प्रतिशत नुकसान हुआ है।

चक्रवात (Cyclone Montha) की वजह से रतलाम जिले में पांचवें दिन बुधवार को भी मावठे का असर बना रहा। इससे मटर की फसल खराब हो रही है, वहीं ज्यादातर किसान खेतों में जलजमाव, अत्यधिक नमी के चलते रबी की तैयारी व बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। बुरहानपुर जिले की खकनार तहसील के 20 से ज्यादा गांवों में मक्का, सोयाबीन, कपास फसल भीगी है। किसानों को फसल सुखाने का मौका नहीं मिल रहा है।

आलीराजपुर में मक्का, सोयाबीन और उड़द की फसलों को नुकसान की आशंका जताई जा रही है। उज्जैन के नागदा, बड़नगर और खाचरौद में खेतों में पानी भर गया है। गेहूं और मटर की फसल प्रभावित हुई है। धार के बदनावर क्षेत्र में चार घंटे में 76 मिमी बारिश हुई है। इससे खेतों में जलभराव की स्थिति बनी। खुले में पड़ी सोयाबीन और मक्का की फसल भीग गई। तेज हवा से पपीता के पौधे टूटकर गिर गए। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश मटर के फूल और फलियों दोनों के लिए हानिकारक है। गुणवत्ता और उपज दोनों पर असर पड़ेगा।
महाकोशल-विंध्य में भी नुकसान

महाकोशल-विंध्य के जिलों में भी फसलों को असमय बारिश से नुकसान पहुंचा है। डिंडौरी जिले में बारिश होने से सोयाबीन की फसल अधिक प्रभावित हुई है। दाने काले पड़ गए हैं। पककर तैयार धान की फसल भी प्रभावित हो रही है। बारिश से सोयाबीन,उड़द की फसल पहले ही खराब हो चुकी है। खेत में कटकर रखी धान की फसल भीग गई है, जिसमें अंकुरण होने का अंदेशा बना हुआ है। अभी बारिश के आसार बने हुए हैं, जिससे धान सहित अन्य फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। अनूपपुर में खेतों में पानी भरने से फसलों को काफी नुकसान हुआ है। हालांकि कृषि विभाग के अनुसार 15 प्रतिशत से कम क्षति हुई है, जिसे नुकसान के दायरे में नहीं माना जाएगा। जल्द ही सर्वे शुरू होगा।
ग्वालियर चंबल अंचल में बारिश ने रबी फसलों पर बरसाया कहर

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खरीफ के समय बारिश से फसल बर्बादी की बाद अब रबी के मौसम में तीन दिन की बारिश ने खेतों में खड़ी धान, बाजरा, मटर, तिल, ज्वार आदि की फसलों में करीब 50 से 60 प्रतिशत नुकसान कर दिया है। सरसों की बुवाई हो चुकी है, खेतों में पानी भरने से फसल खराब हो गई है। ग्वालियर, दतिया, श्योपुर आदि जिलों में धान की फसल को अधिक नुकसान पहुंचा है। ग्वालियर जिले में ही एक लाख 10 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। अभी तक 15 प्रतिशत फसल ही कट सकी है।

ऐसे में बारिश से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिरने इसे सबसे अधिक नुकसान हो रहा है। खेतों में पानी भरने से धान की बालियां काली पड़ने और अंकुरण का खतरा बढ़ गया है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड में बाजरा भी खेतों में पका हुआ खड़ा है। बारिश से बाली के दाने काले पड़ने की आशंका है। कई आलू व मटर जैसी फसलों के पौधे सड़ गए हैं।

इन फसलों में 60 से 70 प्रतिशत तक नुकसान होने की आशंका जताई गई है। मुरैना में बाजरे की जो फसल में 50 प्रतिशत से अधिक के नुकसान की आशंका जताई गई है। दतिया में करीब पांच सौ से अधिक गांवों में धान की फसल खेतों में बिछ गई है। श्योपुर में धान की फसल में 30 से 50 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
सरसों पूरी तरह नष्ट हो गई

    यदि बारिश के साथ-साथ हवा भी चलेगी तो यह नुकसान अधिक होगा। आलू, सरसों, मटर एवं चना तथा मसूर में भी नुकसान है। सरसों की जो 10 दिन के अंदर बोई गई थी वह पूरी तरह नष्ट हो गई है। बारिश से धान की चमक कम होगी और गिरने की वजह से उत्पादन कम हो जाएगा। – डॉ. शैलेंद्र सिंह कुशवाह, वरिष्ठ विज्ञानी कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर।

 

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