जिस मिसाइल से कांपता था पाकिस्तान, अब वही हथियार खरीदने जा रहा इस्लामिक दुनिया का सबसे बड़ा देश

नई दिल्ली

दक्षिण एशिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में खूब तबाही मचाई थी। मई में भारतीय वायुसेना ने इस सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया, जिससे दुश्मन की हवाई क्षमता ध्वस्त हो गई। अब इसी मिसाइल को दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने खरीदने का फैसला किया है। लगभग 45 करोड़ डॉलर की इस डील से इंडोनेशिया न केवल अपनी नौसेना को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने में भी सक्षम हो जाएगा। यह डील भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है।

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि वार्ता की लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल रूसी पक्ष से अंतिम स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए जा सकेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच यह सौदा लंबे समय से चर्चा में है। इस वर्ष जनवरी में इंडोनेशिया के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हुई थी।

भारत पहले ही ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री फिलीपींस को कर चुका है और अब इस अनोखी हथियार प्रणाली के लिए नए बाजार तलाश रहा है। विशेष रूप से मई महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान इस मिसाइल प्रणाली ने खुद को युद्ध के मैदान में साबित भी किया है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने इंडोनेशिया का दौरा किया था। उनका यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की जनवरी में हुई भारत यात्रा ने भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा दी थी।

भारत ने कुछ वर्ष पहले फिलीपींस के साथ लगभग 3,500 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा किया था। भारत ने न केवल मिसाइलें बल्कि आवश्यक लॉन्चिंग और समर्थन प्रणाली भी वहां पहुंचाई हैं। यह सौदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित करने वाला रहा, क्योंकि इसे फिलीपींस द्वारा अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

ब्रह्मोस का जन्म: भारत-रूस की साझेदारी का कमाल

ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा नदी और रूस की मॉस्को नदी से लिया गया है। यह मिसाइल भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyeniya के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। 1998 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मकसद था एक ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाना जो दुश्मन के जहाजों और जमीन के ठिकानों को चंद सेकंडों में नेस्तनाबूद कर दे। रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल पर आधारित यह हथियार 2005 से भारतीय सेनाओं में शामिल हो चुका है।

ब्रह्मोस की खासियत यह है कि यह जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसका वजन 3,000 किलोग्राम (शिप/ग्राउंड वर्जन) है, लंबाई 8.2 मीटर और व्यास 0.67 मीटर। यह 300 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाती है, जो दुश्मन के कवच को चीर सकता है। सबसे बड़ी ताकत? इसकी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक- एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद ही टारगेट पर पहुंच जाती है, बिना किसी अतिरिक्त मार्गदर्शन के।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंडोनेशिया के साथ यह समझौता होता है, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा और स्वदेशी ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगा। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित की गई है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ने वाली, अत्यंत सटीकता वाली मिसाइल है, जो जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च की जा सकती है। अगर सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल भारत की रक्षा कूटनीति की बड़ी सफलता होगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी एक नया वैश्विक मुकाम दिलाने में मदद करेगा।

पाकिस्तान में तबाही: ऑपरेशन सिंदूर का 'फायर एंड फॉरगेट' हमला

ब्रह्मोस का असली जलवा तब दिखा जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया। 10 मई को शुरू हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी एयरबेस पर कई ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ ने भोलारी एयरबेस पर सीधा निशाना साधा, जहां एक AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान तबाह हो गया। पाकिस्तानी रिटायर्ड एयर मार्शल ने खुद माना कि चार ब्रह्मोस मिसाइलों ने उनके हैंगर को उड़ा दिया।

यह ऑपरेशन पाकिस्तान के आतंकी हमलों का जवाब था। ब्रह्मोस ने न केवल एयरबेस को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तानी रडार सिस्टम (जैसे चाइनीज HQ-9) को भी चकमा दिया। स्रोतों के मुताबिक, लगभग 15 ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई लॉन्च क्षमता को ठप कर दिया, जिससे वे काउंटर-अटैक की योजना डालने को मजबूर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2025 को कानपुर में भाषण देते हुए इसकी पुष्टि की।

इंडोनेशिया की सैन्य आधुनिकीकरण यात्रा: ब्रह्मोस से नई ताकत

इंडोनेशिया, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप राष्ट्र और आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वह अपनी नौसेना को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता, खासकर नटुना द्वीपों पर दावे, ने जकार्ता को चिंतित कर दिया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, जो पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके हैं, उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है। 2025 में इंडोनेशिया ने BRICS में शामिल होकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की।

ब्रह्मोस खरीद इसकी कड़ी है। जनवरी 2025 में प्रबोवो की भारत यात्रा के दौरान (जहां वे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि थे) बातचीत तेज हुई। इंडोनेशियाई नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने ब्रह्मोस मुख्यालय का दौरा किया। डील में शोर-बेस्ड और शिप-माउंटेड वर्जन शामिल हैं, जो नटुना सागर में 290 किमी रेंज से चीनी जहाजों को निशाना बना सकेंगे। भारत ने CAATSA (रूस से हथियार खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध) से मुक्त होने का आश्वासन दिया, क्योंकि ब्रह्मोस के मुख्य पार्ट्स भारत में बने हैं।

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