राष्ट्रीय जल पुरस्कार से सम्मानित कलेक्टर भव्या मित्तल, खरगोन की सफलता पर एक्सपर्ट्स खुश

खरगोन
 जिले को जल संरक्षण के क्षेत्र में पश्चिम क्षेत्र का सर्वश्रेष्ठ जिला चुना गया है। कलेक्टर भव्या मित्तल को 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है। उन्होंने जिले में 4.21 लाख जल संरचनाएं बनाकर 2.31 करोड़ घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ाई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में कलेक्टर को यह सम्मान दिया।

25 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि मिली
इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सीईओ आकाश सिंह को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने 'जल संचय जनभागीदारी 1.0' के तहत उत्कृष्ट काम करने के लिए सम्मानित किया। खरगोन जिले को पश्चिमी क्षेत्र में श्रेणी 3 के तहत 13वां स्थान मिला है, जिसके लिए उसे 25 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी मिली है। जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जांच भी हो चुकी है।

नदियों को बचाने के लिए किया काम
खरगोन जिले ने नदियों को बचाने और उनके किनारों को सुधारने के लिए भी बहुत अच्छा काम किया है। नर्मदा, नानी, वंशावली और बोराड़ नदियों के 8000 हेक्टेयर खराब हो चुकी जमीन को स्टॉप डैम, चेक डैम, खेत तालाब और लूस बोल्डर स्ट्रक्चर जैसी चीजों से ठीक किया गया है। जो छोटी नदियां पहले नवंबर या दिसंबर तक सूख जाती थीं, वे अब अप्रैल तक बहती रहती हैं। कुंदा नदी के आसपास से 627 जगहों पर अवैध कब्जे हटाए गए हैं।

सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराए सभी जल स्त्रोत
इन कब्जों से खाली हुई 106 एकड़ जमीन पर 'निधिवन' नाम का एक पर्यटन स्थल बनाया गया है। जिले में कुल 4,21,182 कृत्रिम जलभरण संरचनाएं बनाई गई हैं, जैसे काउंटर ट्रेंच, चेक डैम, पर्काेलेशन टैंक, गली प्लग और गैबियन। इनसे भूजल स्तर बढ़ा है। जिले के सभी जल स्रोतों की जानकारी इकट्ठा करके सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई है और 45 पुरानी बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया गया है। जिले में सूक्ष्म सिंचाई के तहत 48,975 हेक्टेयर जमीन आती है, जिसमें इस साल 3,290 हेक्टेयर नई जमीन जोड़ी गई है। इससे 37,042 किसानों को फायदा हो रहा है।

केंद्र की योजनाओं में भी आगे
जिले में 156 नए अमृत सरोवर बनाए गए हैं, जिससे कुल 2,31,75,828 घनमीटर पानी जमा करने की क्षमता बढ़ी है। इन कामों को ग्रामीण विकास विभाग की वाटरशेड विकास- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 और मनरेगा के तहत किया गया है।

जिले में क्या क्या हुआ
जिले में गंदे पानी को फिर से इस्तेमाल करने के लिए 15 इकाइयां, 4 मलजल उपचार संयंत्र और 94 अपशिष्ट स्थिरीकरण कुंड चालू हैं। 5400 हेक्टेयर जमीन पर 30 लाख पेड़ लगाए गए हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत पेड़ जीवित हैं। मनरेगा के तहत 3,80,000 पौधे और निजी बागों में 2,66,412 अमरूद के पौधे लगाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर बढ़ा है। जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए 2,277 सफाई अभियान चलाए गए, 605 क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, 200 ग्राम पंचायतों में कलश यात्रा निकाली गई और 147 जल चौपाल का आयोजन किया गया। इससे लोगों और सरकारी कर्मचारियों को जल संरक्षण के बारे में जागरूक किया गया।

जल सरंक्षण काम की जियो टैगिंग भी की
'जल संचय जनभागीदारी 1.0' अभियान के तहत 1 अप्रैल 2024 से 31 मई 2025 तक जिले में 5606 जल संरक्षण के काम पूरे हो चुके हैं और उनकी जियो-टैगिंग करके पोर्टल पर जांच की गई है। इनमें खेत तालाब, स्टॉप डैम, कंटूर-ट्रेंच, सोकपिट, चेकडैम, कपिलधारा जैसी जल संरचनाएं शामिल हैं। इन संरचनाओं से लोगों की मदद से बारिश का पानी जमा करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों को भी ठीक किया गया है। इस अभियान के तहत जिले में 757 जल संरक्षण के काम अभी चल रहे हैं।

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