भारत की वंदना ठाकुर ने इंडोनेशिया में लहराया तिरंगा, वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग में गोल्ड मेडल

इंदौर 

मध्य प्रदेश की बेटियों ने कई बार देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है, और इस सूची में अब एक और सुनहरा नाम जुड़ गया है। इंदौर की वंदना ठाकुर ने इंडोनेशिया में आयोजित 16वीं वर्ल्ड बॉडी बिल्डिंग और फिजिक स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उनकी इस शानदार उपलब्धि से न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि पूरा देश गौरवान्वित हुआ है। वंदना ठाकुर ने 55+ किग्रा श्रेणी में दमदार प्रदर्शन कर दुनिया भर के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए गोल्ड अपने नाम किया। मंच पर उनकी फिटनेस, पॉज़िंग और परफॉर्मेंस ने सभी को प्रभावित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी बधाई

उनकी इस जीत पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी बधाई दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- “World Bodybuilding & Physique Sports Championships 2025 (55+ किग्रा श्रेणी) में इंदौर की बेटी वंदना ठाकुर जी को स्वर्ण पदक अर्जित करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

मध्यप्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाली यह उपलब्धि हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।” वंदना की यह जीत साबित करती है कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता। उनकी सफलता से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को भी नया उत्साह मिला है।

11 से 17 नवंबर 2025 तक इंडोनेशिया के बाटम शहर (रियाउ प्रांत) में आयोजित 16वीं वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग एंड फिज़िक स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में वंदना ठाकुर ने वह कारनामा कर दिखाया जिसकी कल्पना भी साहस माँगती है। विश्व के दिग्गज बॉडीबिल्डर्स के बीच अकेले भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने करोड़ों देशवासियों का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। अपने कंधों पर पूरे राष्ट्र की उम्मीदों का भार उठाकर उन्होंने उसे सुनहरे मुक़ाम तक पहुँचाया।

मंच पर उनकी जीत जितनी चमकदार थी, उस तक का सफ़र उतना ही पथरीला। कड़कड़ाती ठंड में सुबह चार बजे उठना, घंटों की हैरतअंगेज़ ट्रेनिंग, चोटों से जूझना, फिर भी हँसते हुए आगे बढ़ना; यही वंदना की कहानी है। वे बस एक बात पर अड़ी थीं, “रार नहीं ठानूँगी, हार नहीं मानूँगी।” यह जीत केवल उनके मज़बूत शरीर की नहीं, उनके अटूट इरादे, कठोर अनुशासन और देशप्रेम की जीत है।

जीत को लेकर भावुक वंदना ठाकुर ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, "जब मैं मंच पर गई, तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था और इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की ज़िद के साथ तैयारी कर दी थी। मैं हर महिला से, हर बालिका से यही कहना चाहती हूँ कि कुछ भी हासिल करने की ललक यदि मन में हो, तो उसे पूरा करने की ज़िद पर अड़ जाओ, तुम्हें जीतने से कोई भी नहीं रोक सकता, खुद तुम भी नहीं। यह गोल्ड मैडल सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस महिला का है, जिसे कभी बताया गया था कि वह कुछ नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी उसने कर दिखाया। मैं चाहती हूँ कि यह मेडल भारत की हर एक बेटी के सपनों में सुनहरा रंग भरे और उन्हें सबसे आगे रहने की प्रेरणा दे।"

वंदना ठाकुर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि वे भारत की पहली महिला बॉडीबिल्डर बन गई हैं, जिन्होंने महिला बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में भारत के लिए गोल्ड जीतकर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। वंदना की इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, बल्कि करोड़ों महिलाओं को यह भरोसा भी दिया है कि सपनों के साथ चलने वाले कदम कभी व्यर्थ नहीं जाते। ऐसे में, वंदना आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है। बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है।

'तिरंगे के लिए जीतना है'

जीत को लेकर भावुक वंदना ठाकुर ने अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए कहा, "जब मैं मंच पर गई, तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था और इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की जिद के साथ तैयारी कर दी थी। मैं हर महिला से, हर बालिका से यही कहना चाहती हूँ कि कुछ भी हासिल करने की ललक यदि मन में हो, तो उसे पूरा करने की जिद पर अड़ जाओ, तुम्हें जीतने से कोई भी नहीं रोक सकता, खुद तुम भी नहीं। यह गोल्ड मेडल सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि हर उस महिला का है, जिसे कभी बताया गया था कि वह कुछ नहीं कर सकती, लेकिन फिर भी उसने कर दिखाया। मैं चाहती हूँ कि यह मेडल भारत की हर एक बेटी के सपनों में सुनहरा रंग भरे और उन्हें सबसे आगे रहने की प्रेरणा दे।"

खास है उपलब्धि

वंदना ठाकुर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि वे भारत की पहली महिला बॉडीबिल्डर बन गई हैं, जिन्होंने महिला बॉडीबिल्डिंग कैटेगरी में भारत के लिए गोल्ड जीतकर दुनिया भर में देश का नाम रोशन किया है। वंदना की इस उपलब्धि ने न सिर्फ भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा है, बल्कि करोड़ों महिलाओं को यह भरोसा भी दिया है कि सपनों के साथ चलने वाले कदम कभी व्यर्थ नहीं जाते। ऐसे में, वंदना आज सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की प्रेरणा, उम्मीद और साहस की प्रतीक बन चुकी हैं। सिल्वर और गोल्ड की कहानी से परे, असल में वंदना जैसी महिलाएँ ही भारत का गोल्ड है।

घंटोंं की कड़ी मेहनत और अनुशासन वंदना का रोज सुबह जल्द उठना, घंटों की कड़ी ट्रेनिंग, चोटों से लड़ना और फिर भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ना उनके इस संकल्प ने उन्हें यह गौरव दिलाया।

जीत को लेकर भावुक हुई वंदना ठाकुर ने फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि जब मैं मंच पर गई तो मेरे दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी, तिरंगे के लिए जीतना। भारत का तिरंगा इस मंच पर लहराना है, यही मेरा लक्ष्य था। इसे सच करने के लिए जो भी करना पड़े, उसके लिए मैं तैयार थी। मैंने कई महीनों पहले से ही देश के लिए गोल्ड लाने की जिद के साथ तैयारी कर दी थी।

वंदना ने कहा कि बचपन से अब तक के कठिन परिश्रम के बाद आज वो सपना पूरा हुआ है। उन्होंने अपनी कोच गीतांजली विश्वकर्मा को दिल से धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं आज उनके सहयोग से ही विश्व चैम्पियन हूं। इसके साथ अतुल मलिकराम सर, नेहा गौर और स्वामी रमेश सर का आभार जाताया।

इसके पूर्व वंदना 2024 में एशियन चैंपियनशिप में भारत के लिए सिल्वर जीत चुकी है। इसके साथ ही नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड जीत चुकी है। वह इंदौर स्वच्छता अभियान की ब्रांड एम्बेसेडर हैं।

 

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