लैंड यूज़ हेराफेरी का बड़ा मामला: गंगानगर में इंडस्ट्रियल जमीन को बनाया रिहायशी, जांच के आदेश

श्रीगंगानगर
श्रीगंगानगर के मास्टर प्लान में गंभीर अनियमितताएं करके भूमाफिया को अधिकारियों द्वारा मोटा फायदा पहुंचाए जानेे को लेकर बड़ा बवाल हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) झाबर सिंह खर्रा ने एक शिकायत पर संज्ञान लेते हुए स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव को तत्काल प्रभाव से इसकी जाँच करवाकर टिप्पणी प्रस्तुत करने को कहा है। यह शिकायत में श्रीगंगानगर के मुकेश शाह को संगठित और बड़ा भूमाफिया बताते हुए उस पर यूआईटी और स्थानीय निकायों के अधिकारियों से मिलीभगत करके मास्टर प्लान में गंभीर हेराफेरी करवाने और करोड़ों रुपए की जमीन का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है। अखबारों के अनुसार, मुकेश शाह ने रिद्धि-सिद्धि नाम से 19 कॉलोनियों में 7-10 हजार भूखंड बेचे हैं। शिकायत में कहा गया है कि मुकेश शाह ने पिछले वर्षों में कॉलोनाइज़र के नाम पर लाखों वर्गफुट जमीन पर आवासीय और व्यावसायिक भूखंड काटकर अरबों रुपये का नेटवर्क खड़ा किया है। आरोप है कि शाह ने नगर योजना अधिकारी राकेश के साथ सांठगांठ करके मास्टर प्लान में औद्योगिक उपयोग वाली महत्वपूर्ण भूमि को पहले "विशेष क्षेत्र" चिन्हांकित कराया। बाद में उसी विशेष क्षेत्र को गुपचुप तरीके गलत तथ्या दर्शाकर आवासीय उपयोग में परिवर्तित करवा लिया। जबकि विशेष क्षेत्र प्रयोजन की जमीन का इस तरह आवासीय उपयोग दर्शाया जाना कानूनन गलत है।
शिकायत के अनुसार, यह प्रत्यक्ष रूप से राजस्व चोरी, योजना में धोखाधड़ी का गंभीर मामल है। इस एक परिवर्तन से उक्त भूमि के मूल्य में कई गुणा वृद्धि हुई है और राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का सीधे तौर पर नुकसान हुआ है। शिकायत में जे.सी.टी. कपड़ा मिल से जुड़ी औद्योगिक भूमि को भी स्वामित्व सुनिश्चित किए बिना ही आवासीय उपयोग दर्शित करने में गंभीर अनियमितताएं होने का उल्लेख किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग दोनों की जांच के घेरे में आ चुका यह व्यक्ति इन दिनों विदेश (दुबई) भागा हुआ है।
ED और आयकर विभाग की जांच के दायरे में है मुकेश शाहः शिकायत में बताया गया है कि मुकेश शाह अवैध तरीके से लाभ कमाने की गतिविधियों में संलिप्त है। वह दो बार ईडी और आयकर विभाग जैसी जांच एजेंसियों की छापेमारी में पकड़ा जा चुका है। पहली कार्रवाई उस पर वर्ष 2021 में आयकर विभाग ने की थी। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी उसके यहां छापेमारी की है। दोनों बार भारी नकद तथा संपत्ति का पता चला है। इसका उल्लेख राजस्थान से प्रकाशित एक प्रमुख समाचार पत्र की खबर में भी हुआ है।
तत्काल जाँच और कार्रवाई की मांगः शिकायतकर्ता ने नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री को भेजी गई शिकायत में मांग की है कि इस संगठित राजस्व अपराध की जाँच अपराध शाखा तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा उच्च स्तर पर कराई जाए। साथ ही, भविष्य में राज्य को और हानि न हो, इसके लिए मास्टर प्लान को उक्त परिसरों हेतु तत्काल प्रभाव से पुनर्विचार में लिया जाए। जांच में भूमि स्वामित्व, भूमि उपयोग परिवर्तन फाइलें, जारी पट्टों और करोड़ों रुपये के रिश्वत के आदान-प्रदान की गहन जाँच की मांग की गई है।

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