वीजा मामले में पुलिस की चूक, अब शहर में रह रहे विदेशी नागरिकों की फाइलें खंगाली जाएंगी

इंदौर 

 इंदौर के एमआईजी इलाके के गायत्री नगर में रहने वाले केन्याई नागरिक रिचर्डसन का मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। सुबह वरिष्ठ अधिकारियों को इस संबंध में जानकारी मिली, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने रिचर्डसन से पूछताछ शुरू कर दी।एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने माना कि इस पूरे मामले में स्थानीय पुलिस की ओर से गंभीर लापरवाही हुई है। अब शहर में रह रहे सभी विदेशी नागरिकों का रिकॉर्ड फिर से जांचा जा रहा है।

वीजा 1996 में खत्म, एफआईआर दर्ज

एडिशनल डीसीपी दंडोतिया ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है। मगर, उसका वीजा 1996 में खत्म हो चुका था। इसके आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित तौर पर अदालत में पेश होता रहा।

शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई

उसने 'युगांडा भले ही चारों ओर से घिरा हुआ है, लेकिन हिंद महासागर भी हमारा है' जैसी बातें लिखी पोस्ट साझा की है। कुछ तस्वीरों पर खून-खराबा दिखाया गया है। पुलिस के अनुसार रिचर्ड 1991 से इंदौर में निवासरत है। 2018 में शिवशक्ति नगर में कन्हैयालाल गौर के मकान में रहता था। उस दौरान जांच में पता चला था कि वीजा 1998 तक था। उसे गिरफ्तार कर पासपोर्ट व अन्य दस्तावेज जब्त कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से शहर न छोडने की शर्त पर जमानत मिल गई।

वीजा 1996 में ही हुआ था समाप्त, FIR दर्ज एडिशनल डीसीपी दंडोतिया के अनुसार जांच में पाया गया कि रिचर्डसन का पासपोर्ट वैध है, लेकिन उसका वीजा वर्ष 1996 में खत्म हो चुका था। इसी आधार पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। कोर्ट की सख्ती के चलते उसे इंदौर छोड़ने की अनुमति नहीं थी, इसलिए वह यहीं रहकर नियमित रूप से अदालत में पेश होता था।

2018 में हुई थी पहली कार्रवाई रिचर्डसन पर 2018 में पहली बार कार्रवाई की गई थी। तब यह सामने आया कि वह वीजा समाप्त होने के बाद भी वर्षों से इंदौर में रह रहा है। उसके खिलाफ फेमा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था, जबकि उसके पूर्व मकान मालिक पर धारा 188 में केस बना। पुराने घर से निकलने के बाद वह गायत्री नगर में शेखर कुशवाहा के यहां किराए से रहने लगा। पुलिस की जांच में यह पुष्टि हुई कि शेखर ने नियम अनुसार उसकी जानकारी थाने में दी थी।

पड़ोसी बोले-कोरोना काल में कई का इलाज किया रिचर्डसन पेशे से डॉक्टर हैं। जब पुलिस उसके घर पहुंची और इलाके में पूछताछ की तो कई पड़ोसियों ने बताया कि उसका स्वभाव अच्छा है और वह सभी से सौहार्दपूर्वक बात करता है। कोरोना काल में उसने कई लोगों को प्राथमिक उपचार भी दिया था। लोग इलाज के बदले उसे थोड़ी-बहुत आर्थिक मदद भी कर देते थे। उसके परिवारजन समय–समय पर केन्या से आर्थिक सहायता भेजते हैं।

पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पाया रिचर्डसन ने दावा किया कि उसने पासपोर्ट रिन्यू कराने की कोशिश की, लेकिन जरूरी दस्तावेज अदालत में जमा होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं हुआ। कोर्ट में लंबित मामले के कारण नया वीजा और पासपोर्ट दोनों बनना संभव नहीं था।

पासपोर्ट भी निरस्त, अब बनना मुश्किल सूत्रों के अनुसार भारतीय कानून के प्रावधानों के तहत रिचर्डसन का पासपोर्ट निरस्त हो चुका है। ऐसे में कोर्ट से दस्तावेज वापस मिलने के बावजूद वह भारत से नया पासपोर्ट या वीजा आवेदन नहीं कर सकता, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं है। पुलिस इस मामले में हुई अपनी पुरानी लापरवाही को लेकर कई तथ्य दबाने की कोशिश कर रही है।

पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए

फिलहाल, जिला कोर्ट में मामला विचाराधीन है। 28 अप्रैल 2026 को सुनवाई होनी है। केनियन के वकील वाजिद खान ने बताया कि आरोपित द्वारा 2019 में जब्तशुदा पासपोर्ट न्यायालय से सुपुर्दगी पर प्राप्त किए गए हैं। वीजा और पासपोर्ट की अवधि बढ़ाने के प्रयास उसने किए हैं, लेकिन अवधि नहीं बढ़ सकी। वर्तमान में वह शेखर कुशवाह के घर में रह रहा है। थाने में सूचना दी गई है।

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