आज से बाघों की गणना, STR सफारी का नया समय 7:30 बजे; 450 स्टाफ और 8 राज्यों के वॉलिंटियर्स जुटे

भोपाल 

अखिल भारतीय बाघ गणना 2026 आज 1 दिसंबर से शुरू हो गई है। यह गणना सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) समेत पूरे प्रदेश और देश में 7 दिसंबर तक चलेगी। चार साल में एक बार होने वाली इस गणना में पहली बार टाइगर रिजर्व के साथ-साथ सामान्य वन मंडल के जंगलों में भी टाइगर की गणना की जाएगी। 

पहले 3 दिन मांसाहारी, अगले 3 दिन शाकाहारी जीवों की गिनती सात दिवसीय वन्यप्राणी गणना के तहत पहले तीन दिन मांसाहारी और बाद के 3 दिन शाकाहारी वन्यप्राणियों की गणना की जाएगी।

    मांसाहारी: इनमें बाघ, पैंथर, जंगली डॉग सहित अन्य जानवर शामिल होंगे।
    शाकाहारी: इनमें बारहसिंघा, सांभर, चीतल, नीलगाय, बायसन, जंगली सूअर सहित अन्य वन्यजीव शामिल होंगे।

सफारी का समय बदला, अब 7:30 बजे खुलेंगे गेट वन्यप्राणी गणना के कारण मढ़ई और चूरना में पहली शिफ्ट में शुरू होने वाली सुबह की जंगल सफारी का समय एक घंटे बढ़ा दिया गया है।

    नया समय: सफारी सुबह 6:30 बजे के बजाय 7:30 बजे से शुरू होगी। यह 11:30 के बजाय दोपहर 12 बजे तक चलेगी।
    शाम की शिफ्ट: दूसरी शिफ्ट की सफारी का समय यथावत रहेगा।

450 कर्मचारी और 8 राज्यों के 35 वॉलिंटियर्स तैनात डिप्टी डायरेक्टर ऋषभा नेताम ने बताया कि एसटीआर में गिनती के लिए करीब 450 अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा 35 वॉलिंटियर को भी बुलाया गया है, जो गुजरात, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, कर्नाटक समेत 8 राज्यों से आए हैं। जिन बीट में स्टाफ कम है, वहां इन वॉलिंटियर्स का उपयोग होगा।

वॉलिंटियर्स को दी गई है स्पेशल ट्रेनिंग रेंजर राहुल उपाध्याय ने बताया कि वन विभाग की विशेषज्ञ टीम ने वॉलिंटियर्स को ट्रांसेक्ट वॉक, कैमरा ट्रैपिंग, पगमार्क रिकॉर्डिंग और आधुनिक डेटा संग्रह तकनीकों का प्रशिक्षण दिया है। 1 दिसंबर से 7 दिसंबर तक रिजर्व के विभिन्न रेंजों में वैज्ञानिक पद्धति से गणना की जाएगी। प्रशिक्षित वॉलिंटियर वनकर्मियों के साथ मिलकर क्षेत्रीय सर्वेक्षण में भाग लेंगे।

संख्या 75 के पार जाने की उम्मीद फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि अखिल भारतीय बाघ गणना चार साल में एक बार होती है। साल 2022 की गणना के अनुसार एसटीआर में बाघों की संख्या 62 थी। अब 2025-26 में गणना हो रही है, इस बार यह संख्या 75 के पार जाने की उम्मीद है। जो शावक 1 साल के हो गए हैं, उन्हें भी गणना में शामिल किया जाएगा। बाघों की पहचान उनके शरीर के पट्टे (स्ट्राइप्स) और पगमार्क के आधार पर की जाती है।

800 कैमरों से हो रही निगरानी अखिल भारतीय बाघ गणना से पहले साक्ष्य जुटाने के लिए 'फेस थ्री कैमरा ट्रैपिंग' गणना 15 नवंबर से जारी है। इसके लिए सतपुड़ा की पांच बीट- चूरना, बोरी, बागड़ा बफर, तवा बफर और मढ़ई रेंज में 800 कैमरे लगाए गए हैं। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने बताया कि कैमरा ट्रैपिंग का दूसरा चरण 20 दिसंबर से शुरू होगा, जिसमें पिपरिया, मटकुली, देलाखारी, पूर्व और पश्चिम पचमढ़ी में कैमरे लगेंगे।

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