ट्रंप का भरोसेमंद बना पाक सेना प्रमुख! आसिम मुनीर की ‘तरक्की’ से भारत क्यों सतर्क

वाशिंगटन 
आज यानी 31 दिसंबर, साल 2025 का आखिरी दिन है। इस साल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने भारत के लिए गहरी चिंता खड़ी कर दी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की बार-बार सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की, उन्हें 'माई फेवरिट फील्ड मार्शल' कहा है, और कई मौकों पर ग्रेट फाइटर व हाइली रिस्पेक्टेड जनरल जैसी उपाधियां दी हैं। यह निकटता न केवल पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों को नई ऊंचाई दे रही है, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों में दरार डालने की क्षमता रखती है। भारत के एंगल से देखें तो यह ट्रंप की ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी का नतीजा है, जहां पाकिस्तान ने चापलूसी, झूठे नैरेटिव और आर्थिक लालच देकर अमेरिकी राष्ट्रपति को अपने पक्ष में कर लिया है। लेकिन क्या इसके पीछे की हकीकत भारत के लिए खतरे की घंटी है? आइए समझते हैं कि आखिर कैसे पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर 2025 में ट्रंप के पसंदीदा फील्ड मार्शल बन गए।
 
सबसे पहले समझिए कि यह निकटता कैसे शुरू हुई। अप्रैल 2025 में पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिसमें 26 लोग मारे गए। भारत ने इसका जवाब 'ऑपरेशन सिंदूर' से दिया- पाकिस्तान के एयरबेस और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई का दावा किया, लेकिन सैटेलाइट इमेजेस से साफ हुआ कि उसे ही भारी नुकसान हुआ। चार दिन के संघर्ष के बाद पाकिस्तानी सेना अधिकारी के अनुरोध पर दोनों देशों के DGMO स्तर पर सीधे संपर्क से सीजफायर हुआ। ट्रंप ने इसमें अपना क्रेडिट लिया- दावा किया कि उन्होंने फोन कॉल्स और टैरिफ के जरिए परमाणु युद्ध टाला और एक करोड़ से ज्यादा जिंदगियां बचाईं। भारत ने इसे सिरे से खारिज किया, लेकिन पाकिस्तान ने मौके का फायदा उठाया।

भारत लंबे समय से यह तर्क देता रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच किसी भी विवाद को केवल द्विपक्षीय रूप से हल किया जा सकता है। लेकिन मई से, ट्रंप ने बार-बार इस संघर्ष का जिक्र किया है, चार दर्जन से अधिक मौकों पर जोर देकर कहा है कि उन्होंने युद्धविराम में मध्यस्थता की। उन्होंने विभिन्न मौकों पर विमानों को मार गिराने के दावों को भी दोहराया है।

पाक पीएम शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज पार्टी के एक सदस्य ने अल-जजीरा को बताया- भारत के ट्रंप को सीजफायर का श्रेय देने से इनकार करने से एक ऐसा मौका मिला, जिसका आर्मी चीफ मुनीर और PM शरीफ ने तुरंत फायदा उठाया। पूर्व पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर ने भी मई के संघर्ष को निश्चित मोड़ बताया।

अमेरिका के लिए कभी सहयोगी, तो कभी खतरनाक देश था पाक
पाकिस्तान कभी अमेरिका का एक अहम सहयोगी था और 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका में हुए हमलों के बाद उसे एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी देश का दर्जा दिया गया था। अगले कुछ सालों में रिश्ते खराब हो गए, क्योंकि अमेरिकी अधिकारियों ने अमेरिका के तथाकथित आतंक पर युद्ध में इस्लामाबाद पर धोखे का आरोप लगाया। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, ट्रंप ने पाकिस्तान पर अमेरिका को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं देने और हथियारबंद ग्रुप्स को पनाह देने का आरोप लगाया। उनके उत्तराधिकारी, जो बाइडेन ने बाद में पाकिस्तान को सबसे खतरनाक देशों में से एक बताया।

इसी समय, अमेरिकी पॉलिसी तेजी से भारत की तरफ मुड़ गई, जिसे वॉशिंगटन में चीन के संभावित मुकाबले के तौर पर देखा गया, जो पाकिस्तान का सबसे करीबी रणनीतिक पार्टनर है। फिर भी, अपने दूसरे कार्यकाल के सिर्फ दो महीने बाद ही ट्रंप का रुख बदल गया। मार्च में कांग्रेस के एक जॉइंट सेशन को संबोधित करते हुए, उन्होंने अगस्त 2021 में काबुल एयरपोर्ट पर एबे गेट बम धमाके के कथित दोषियों में से एक को गिरफ्तार करने के लिए पाकिस्तान को धन्यवाद दिया। इस हमले में 13 अमेरिकी सैनिक और दर्जनों अफगान नागरिक मारे गए थे, जब अमेरिका अफगानिस्तान से जल्दबाजी में निकल रहा था।

फिर शुरू हुआ पाक का चापलूसी वाला दौर
भारत के साथ मई में हुए संघर्ष के बाद, मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया, जो पाकिस्तान के इतिहास में यह रैंक पाने वाले दूसरे अधिकारी थे। उसी साल बाद में, एक संवैधानिक बदलाव से चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज (CDF) का पद बनाया गया, जिसे चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) एक साथ संभालेंगे। ऑपरेशन सिंदूर में मार खाने के बावजूद मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को शांति का दूत बताया और नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया। यही वह मीठी गोली थी जिसने ट्रंप को प्रभावित किया। जून 2025 में मुनीर को वाइट हाउस में अकेले लंच के लिए बुलाया गया- पाकिस्तानी आर्मी चीफ के लिए ऐतिहासिक पल था। वहां मुनीर ने ट्रंप की चापलूसी की, रेयर अर्थ मिनरल्स, क्रिप्टो डील और ट्रेड ऑफर्स दिए।

इसके बाद ट्रंप की प्रशंसा का सिलसिला चला: सितंबर में दूसरी मीटिंग (शरीफ के साथ), अक्टूबर में गाजा पीस समिट में ट्रंप ने मुनीर को फेवरिट फील्ड मार्शल कहा और दिसंबर तक 10 से ज्यादा बार तारीफ की। पाकिस्तान ने इसे अपनी डिप्लोमेटिक कमबैक बताया।

पाकिस्तान की रणनीति: चापलूसी और ट्रांजेक्शनल डील्स
    पाकिस्तान के लिए मुनीर सोल्जर-डिप्लोमैट बन गए। उन्होंने ट्रंप को:नोबेल का लालच दिया।
    बलूचिस्तान के रेयर अर्थ मिनरल्स का ऑफर।
    क्रिप्टो और ट्रेड डील्स का वादा।
    आतंकवाद विरोध में सहयोग (ISIS-K गिरफ्तारियां)।
    गाजा स्टेबलाइजेशन फोर्स में ट्रूप्स भेजने की संभावना (जो अब दबाव बन रहा है)।

ट्रंप, जो डील्स के शौकीन हैं, इससे प्रभावित हुए। पाकिस्तान को बेहतर ट्रेड टैरिफ मिले, जबकि भारत पर 50% टैरिफ लगाए गए।

क्षेत्रीय और मध्य-पूर्वी संतुलन
इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि पाकिस्तान ने 2025 में बांग्लादेश, मध्य एशिया और मध्य-पूर्व में कूटनीतिक सक्रियता बढ़ाई है। सऊदी अरब में मोहम्मद बिन सलमान के साथ हुई रक्षा संधि को वर्ष की सबसे अहम उपलब्धियों में माना जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान ने गाजा में युद्ध को लेकर ट्रंप द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल में शामिल होने की इच्छा भी जताई है।

घरेलू राजनीति और आलोचनाएं
जहां विदेशी मोर्चे पर पाकिस्तान की सक्रियता बढ़ी, वहीं देश के भीतर आलोचनाएं भी तेज हुईं। मई संघर्ष के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा मिला और संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना प्रमुख को अभूतपूर्व अधिकार सौंपे गए। ये सब तब हुआ जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाक को करारी हार मिली थी। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने लोकतंत्र के क्षरण और मीडिया दमन के आरोप लगाए। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की कैद, बलूचिस्तान में हिंसा और 27वें संशोधन पर उठे सवालों के बीच आलोचकों का कहना है कि कथित अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक सफलता ने इन मुद्दों को हाशिये पर धकेल दिया है।

भारत के लिए खतरे और चिंताएं
भारत-अमेरिका संबंधों में दरार: ट्रंप का पहला कार्यकाल भारत के साथ मजबूत था (मोदी-ट्रंप बॉन्डिंग)। अब पाकिस्तान को प्राथमिकता मिल रही है। कांग्रेस ने इसे बेहद चिंताजनक कहा। भारत को चीन के खिलाफ काउंटर के रूप में देखा जाता था, लेकिन ट्रंप की पॉलिसी में पाकिस्तान को मिडिल पावर मल्टी-अलाइनर के रूप में जगह मिल रही है। पाकिस्तान की सैन्य ताकत बढ़ना: मई संघर्ष में हार के बाद मुनीर को फील्ड मार्शल बनाया गया। संवैधानिक संशोधन से उन्हें सभी सशस्त्र बलों पर कमांड, लाइफटाइम इम्युनिटी और 2030 तक एक्सटेंशन मिला। अमेरिकी समर्थन से पाकिस्तान की हिम्मत बढ़ी – अफगानिस्तान पर ड्रोन स्ट्राइक्स, भारत में प्रॉक्सी टेरर ग्रुप्स को सपोर्ट, और न्यूक्लियर थ्रेट्स।

क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा: ट्रंप का पाकिस्तान से निकटता आतंकवाद निरोधक सहयोग बढ़ा सकती है, लेकिन पाकिस्तान का ट्रैक रिकॉर्ड (ओसामा बिन लादेन छिपाना) संदेहास्पद। गाजा में पाक ट्रूप्स भेजने का दबाव मुनीर के लिए घरेलू बैकलैश का कारण बन सकता है, लेकिन अगर भेजे गए तो पाकिस्तान की ग्लोबल रिलेवंस बढ़ेगी- भारत के लिए नेगेटिव।

ट्रंप की अनप्रेडिक्टेबल पॉलिसी: ट्रंप टैक्टिकल रोमांस कर रहे हैं। भारत ने मध्यस्थता के दावे खारिज किए, लेकिन पाकिस्तान ने नैरेटिव सेट किया। इससे क्वाड, इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटजी प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए यह सबक है कि ट्रंप की डिप्लोमेसी पर्सनल और ट्रांजेक्शनल है। भारत को मजबूत रहना होगा- सैन्य तैयारी, डिप्लोमेटिक आउटरीच और आर्थिक ताकत बढ़ानी होगी। पाकिस्तान की यह तथाकथित जीत अस्थायी हो सकती है, क्योंकि ट्रंप के वादे अक्सर बदलते हैं, और पाकिस्तान की आर्थिक हालत कमजोर है। लेकिन फिलहाल, मुनीर की ट्रंप-भक्ति भारत की सुरक्षा और कूटनीति के लिए चुनौती है। 2026 में देखना होगा कि यह फेवरिट रिश्ता कितना टिकता है।

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