नक्सली बारसे देवा का तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर

सुकमा.

नए साल की शुरुआत होते ही लाल आतंक को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष नक्सली हिड़मा के करीबी और पीएलजीए कमांडर बारसे देवा ने आज शनिवार, 3 दिसंबर 2026 को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली कमांडर बारसे देवा के सरेंडर के बाद की सबसे पहली तस्वीर सामने आई है।

तेलंगाना पुलिस जल्द ही देवा के सरेंडर की आधिकारिक घोषणा करने वाली है। आपको बता दें कि कल पीएलजीए कमांडर बारसे देवा के सरेंडर करने की सूचना मिली थी। बताया गया था कि आज वह तेलंगाना के डीजीपी के सामने हैदराबाद में आत्मसमर्पण करेंगे। बारसे देवा पर 50 लाख रुपये से अधिक का इनाम घोषित था। वह नक्सल संगठन के भीतर एक प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। हिड़मा के एनकाउंटर के बाद बारसे देवा को पीएलजीए का कमांडर बनाया गया था। इसके बाद से वह संगठन की सैन्य गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे थे।

2025 में तेलंगाना में घुसा देवा
सूत्रों के अनुसार, यह समूह अक्टूबर 2025 में तेलंगाना के जंगलों में घुसा था और वरिष्ठ माओवादी बारे चोक्का राव उर्फ दामोदर के नेतृत्व वाली राज्य समिति के साथ मिलकर काम कर रहा था। तेलंगाना की खास ग्रेहाउंड्स फोर्स और खुफिया अधिकारियों द्वारा लगातार की गई घेराबंदी और तलाशी अभियानों ने उनकी गतिविधियों को सीमित कर दिया था। साथ ही, पुलिस के शीर्ष अधिकारियों द्वारा लगातार की गई अपीलें भी देवा के आत्मसमर्पण का कारण बनीं। बारसे देवा ने 2000 में माओवादी आंदोलन में कदम रखा था। 2003 तक, उसने छत्तीसगढ़ के पुव्वारथी में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ के लिए काम किया। दिसंबर 2022 में, वह दंडकारण्य विशेष ज़ोनल समिति के सदस्य बने और जून 2023 में उन्हें PLGA का बटालियन कमांडर नियुक्त किया गया।

सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था देवा
देवा का सीपीआई (Maoists) के साथ 25 साल का जुड़ाव मध्य भारत के कुछ सबसे खूंखार हमलों से जुड़ा था। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार, उस पर 2013 में झीरम घाटी नरसंहार का आरोप है, जिसमें बस्तर में 27 कांग्रेस नेताओं की जान चली गई थी। इसके अलावा, अप्रैल 2021 में बीजापुर के टेकलगुडेम में हुए हमले में 22 पुलिसकर्मी मारे गए थे। 2006 से 2019 के बीच कम से कम पांच बड़े IED हमलों में भी उनका हाथ माना जाता है, जिसमें बीजेपी विधायक भीमा मंडावी की मौत वाला धमाका भी शामिल था। जांचकर्ताओं का मानना है कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 16 जनवरी 2025 को तेलंगाना के कुमारम भीम आसिफाबाद जिले में धर्माराम बेस पर हमला और 30 जनवरी को छत्तीसगढ़ के जीरमगुडा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले का नेतृत्व किया था।
 

बारसे देवा माओवादी पार्टी की सैन्य टुकड़ियों (सशस्त्र बलों) की गतिविधियों को संभाल रहा था। नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है, और इसका कमांडर बारसे देवा है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन तीन जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। माओवादी पार्टी को हथियारों की सप्लाई में बारसे देवा की भूमिका बेहद अहम मानी जाती रही है।

हिड़मा और बारसे देवा दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे

हिड़मा पूवर्ती गांव का रहने वाला था। वहीं बारसे देवा भी सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला है। करीब 2 साल पहले जब हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में शामिल किया गया तो उसने ही बारसे देवा को PLGA बटालियन नंबर 1 का कमांडर बनाया था।

देवा के साथ बड़ी संख्या में नक्सली थे। लेकिन अब पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद से बटालियन भी लगभग टूट गई है।

3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव

नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 को नक्सल संगठन की सबसे खतरनाक टीम माना जाता है। दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा इन 3 जिलों में बटालियन का ज्यादा प्रभाव रहा है। हालांकि, अब फोर्स ने इस टीम को काफी बैकफुट कर दिया है। इस टीम में AK-47, इंसास, SLR, स्नाइपर गन जैसे हथियारों से लैस सैकड़ों नक्सली थे।

टेकलगुडेम, बुरकापाल, मिनपा, ताड़मेटला, टहकवाड़ा में नक्सलियों की इसी टीम ने बड़े हमले किए थे। जिसमें सैकड़ों जवानों की शहादत हुई है। हालांकि, अब ये टीम भी कमजोर हो गई है। अब देवा सरेंडर करना चाह रहा है।

जानकारी ये भी है कि किसी माध्यम से उसने अपना संदेश बाहर भी भिजवाया है। देवा सरेंडर करता है तो उसकी बटालियन टूट जाएगी। इसका नेतृत्व करने वाला कोई नक्सली नहीं रहेगा।

गृह मंत्री ने मां से की थी मुलाकात

दरअसल, छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा कुछ दिन पहले पूवर्ती गांव गए थे। वहां उन्होंने देवा और हिड़मा इन दोनों की मां से मुलाकात की थी। इनके माध्यम से उनसे सरेंडर करने की अपील की थी।

वहीं हिड़मा नहीं माना और आंध्र प्रदेश के जंगल में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में पत्नी राजे समेत 6 साथियों के साथ मारा गया। जिसके बाद अब देवा बारसे छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने की कोशिश कर रहा है।

15 में से 7 एरिया कमेटी बची, डिवीजन भी खत्म

बस्तर IG सुंदरराज पी के मुताबिक बस्तर में नक्सलियों की कुल 7 डिवीजन और 15 एरिया कमेटी सक्रिय थी। माड़ डिवीजन, केशकाल और दरभा डिवीजन में नक्सली लगभग खत्म हो गए हैं।

पश्चिम बस्तर डिवीजन में कुछ नक्सली हैं। लेकिन अब 7 एरिया कमेटी में कुछ छिटपुट नक्सली ही बचे हैं। दंडकारण्य इलाके में महज 120 से 150 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय हैं। ये नक्सली खत्म हुए तो नक्सलवाद लगभग खत्म हो जाएगा।

More From Author

विभागीय जांच में पकड़े गए 4 कथित कर्मचारी

दो चरणों में योजनाओं की पड़ताल से अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने की रणनीति

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13695/1

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.