इंदौर में हुई मौतों के मामले में CM मोहन यादव की कड़ी प्रतिक्रिया, ‘सीवर पानी वाले बैक्टीरिया’ की जांच जारी

इंदौर 
देश के सबसे साफ और स्‍वच्‍छ शहर इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो गई. शौचालय मिश्रित पानी पीने के कारण बीमार पड़े लोगों में से 200 अभी भी अस्‍पताल में भर्ती हैं, जबकि 32 आईसीयू में हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने इंदौर के नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया और अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई इंदौर के भगीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई त्रासदी के मामले में सरकार की पहली बड़ी कार्रवाई है. इस घटना में 29 दिसंबर से लोग बीमार पड़ने लगे थे. स्‍थानीय लोगों ने इसके खिलाफ स्‍थानीय प्रशासन से शिकायत भी की थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई न होने से कई परिवार उजड़ गए.

इंदौर के भगिरथपुरा क्षेत्र में पानी की सप्लाई दूषित होने के कारण डायरिया और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलीं. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी से चार लोगों की मौत हुई है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को गंभीर लापरवाही मानते हुए इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने का आदेश दिया. साथ ही अतिरिक्त नगर आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. दूसरी तरफ, इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सरकार ने हाई कोर्ट में 40 पन्नों की स्‍टेटस रिपोर्ट पेश की है. सरकार ने अदालत को बताया कि हालात अब नियंत्रण में हैं और नए मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हो रही . साथ ही मिनट-टू-मिनट निगरानी की व्यवस्था लागू की गई है.

 जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी – CM मोहन यादव

 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से पैदा हुए संकट को लेकर अधिकारियों की लापरवाही की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार दूषित पेयजल के कारण इंदौर के भागीरथपुरा में हुई घटना में किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कड़े फैसले लिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने बताया कि इस घटना के बाद दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त रोहित सिसोनिया और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है. इसके साथ ही इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार यादव को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं.

इंदौर में हुई मौतों के पीछे 'सीवर पानी वाले' बैक्टीरिया, अब तक क्या पता चला

इंदौर में एक ऐसी त्रासदी सामने आई है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल ने कहर बरपाया है, जहां सीवर जैसी गंदगी वाले बैक्टीरिया पानी में घुस गए। इस पानी को पीने से कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। हजारों लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

सब कुछ शुरू हुआ 25 दिसंबर से, जब लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जांच में पता चला कि मुख्य पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया कि पानी में वो बैक्टीरिया मिले जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि शुरुआती टेस्ट में असामान्य बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है, लेकिन पूरी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'पिछले कई हफ्तों से समस्या थी, लेकिन 25 दिसंबर को हालात बिगड़ गए। पानी पीते ही पेट में आग सी लगती थी।'

इंदौर जल त्रासदी

मौतों का बढ़ता आंकड़ा और मरीजों की तादाद

आधिकारिक तौर पर मौतें 4 बताई जा रही हैं, लेकिन मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने खुद माना कि उन्हें 10 मौतों की जानकारी है। स्थानीय लोग तो 14 तक का दावा कर रहे हैं। अब तक 2456 से ज्यादा लोग उल्टी-दस्त के शिकार हुए, 162 से अधिक अस्पताल में भर्ती। कई मरीज ICU में हैं, और इलाका लगभग खाली हो चुका है। परिवार वाले अपनों का इलाज कराने अस्पतालों में डेरा डाले हुए हैं।
सरकार पर उठे सवाल, NHRC और हाईकोर्ट की सख्ती

लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करने का खामियाजा अब भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वत: संज्ञान लिया और मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस थमा दिया। दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने कहा, 'निवासियों ने कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।' इंदौर बेंच ऑफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भी सरकार से घटना की पूरी डिटेल्स मांगी हैं। कोर्ट ने साफ पानी की सप्लाई और मरीजों का इलाज सुनिश्चित करने के आदेश दिए।

सीएम की मदद और कार्रवाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है।

दूषित पानी पीने से बीमार पड़े लोगों का क्‍या है हाल
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक कुल 294 मरीजों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया. इनमें से 93 मरीजों का सफल इलाज कर उन्हें छुट्टी दे दी गई है. बाकी 200 मरीजों में से 32 अभी भी आईसीयू में भर्ती हैं. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सभी मरीजों को जरूरी इलाज दिया जा रहा है. जमीनी स्तर पर जिला प्रशासन, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं. इन टीमों का उद्देश्य नए मरीजों की पहचान करना और बीमारी को फैलने से रोकना है. लोगों को ओआरएस के पैकेट और जिंक की गोलियां मुफ्त बांटी जा रही हैं ताकि लक्षण गंभीर न हों.

मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता

राज्य सरकार ने माना कि किसी भी राशि से इंसानी जान की भरपाई नहीं हो सकती, फिर भी तात्कालिक राहत के तौर पर मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई है. इसे शुरुआती सहायता बताया गया है.

प्राइवेट अस्‍पतालों में मुफ्त इलाज का आदेश

 सरकार ने 30 दिसंबर को निर्देश जारी कर सभी निजी अस्पतालों को प्रभावित मरीजों का पूरी तरह मुफ्त इलाज करने को कहा. इसमें जांच, दवाइयां और भर्ती सभी शामिल हैं. किसी भी मरीज को भर्ती से इनकार नहीं किया जा सकता है. निजी अस्पतालों का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी. सरकार ने बताया कि पीड़ितों को बिना मदद के छोड़े जाने का आरोप गलत है.

 

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