देसी F-35 की धमाकेदार एंट्री, दुश्‍मनों का आसमान में मुकाबला करने के लिए एयर डिफेंस सिस्‍टम पर पड़ेगा दबाव

बेंगलुरु 

देश के साथ ही दुनियाभर में सामरिक हालात लगातार बदल रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध हो या इजरायल का ईरान पर अटैक या फिर भारत का ऑपरेशन सिंदूर, इन सब घटनाओं से ग्‍लोबल लेवल पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हुई है. कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने एक हाइपर-सीक्रेट ऑपरेशन को अंजाम देते हुए वेनेजुएला के राष्‍ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. वॉशिंगटन के इस कदम ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. सबके दिल-दिमाग में एक ही सवाल चल रहा है- क्‍या अब जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति पैदा हो गई है? क्‍या कमजोर देश की संप्रभुता की कोई अहमियत नहीं है? इन सबको देखते हुए दुनिया के तमाम देशों ने अपने डिफेंस सिस्‍टम को अपग्रेड करने की मुहिम शुरू कर दी है. मिसाइल, एयर ड‍िफेंस सिस्‍टम, ड्रोन और कटिंग एज फाइटर जेट पर हजारों-लाखों करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍ट किया जा रहा है. सुरक्षा के लिहाज से भारत की स्थिति काफी संवेदनशील है. एक तरफ पाकिस्‍तान तो दूसरी तरफ चीन जैसा देश स्थित है. पाकिस्‍तान आतंकवादियों को पालने-पोसने के लिए दुनियाभर में कुख्‍यात है.

पाकिसतान की सरजमीं पर ही ओसामा बिन लादेन जैसा दुर्दांत आतंकवादी मिला था. दूसरी तरफ, चीन की आक्रामक विस्‍तारवादी नीतियों से हर कोई वाकिफ है. ऐसे में भारत के लिए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करना अनिवार्य हो गया है. विदेशी तकनीक पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता है. यही वजह है कि भारत ने मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम और फाइटर जेट डेवलप करने में आत्‍मनिर्भर बनने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं. अग्नि-5, ब्रह्मोस, आकाश मिसाइल सिस्‍टम आदि उसके परिणाम है. भारत अब 5th जेनरेशन फाइटर जेट बनाने की दिशा में भी अहम कदम उठा चुका है. इसको ध्‍यान में रखते हुए एडवांस्‍ड मीडियम कॉम्‍बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है, जिसके तहत पांचवीं पीढ़ी के स्‍टील्‍थ जेट्स डेवलप किया जाना है. आनेवाले तीन से चार साल इसके लिए काफी अहम होने वाले हैं.

जानकारी के अनुसार, भारत के सबसे महत्वाकांक्षी सैन्य विमानन कार्यक्रम एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने पुष्टि की है कि देश का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट AMCA प्रोजेक्‍ट पर पूरी तरह तय समय पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि इस अत्याधुनिक लड़ाकू विमान का पहला प्रोटोटाइप 2028 के अंत तक रोलआउट किया जाएगा, जबकि इसकी पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) 2029 की शुरुआत में होने की योजना है.

डॉ. कामत ने यह अहम जानकारी बेंगलुरु में आयोजित ‘तेजस-25’ नेशनल सेमिनार के दौरान साझा की. इस कार्यक्रम का आयोजन एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा किया गया था, जो स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस की पहली उड़ान के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ. हालांकि, यह आयोजन तेजस की उपलब्धियों को याद करने के लिए था, लेकिन चर्चा का केंद्र भारत के भविष्य के सैन्य विमानन रोडमैप और खास तौर पर AMCA प्रोग्राम रहा. इसके तहत फाइटर जेट डेवलप होने के बाद भारत अमेरिका, रूस और चीन श्रेणी में आ जाएगा. बता दें कि मौजूदा समय में पांचवीं पीढ़ी के जेट्स में अमेरिकी F-35 और Su-57 टॉप पर हैं.

AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट्स इस वजह से खास

    स्टील्थ टेक्‍नोलॉजी: इस विमान में खास तरह की बनावट और रडार से निकलने वाली किरणों को अब्‍जॉर्ब यानी अवशोषित करने वाली टेक्‍नोलॉजी को शामिल किया गया है. इससे दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे.

    इंटरनल वेपन बे: पुराने लड़ाकू विमानों में मिसाइलें पंखों यानी विंग्‍स पर लगाई जाती हैं, जिससे रडार पर उनकी पकड़ बढ़ जाती है. इसके विपरीत AMCA के तहत डेवलप किए जाने वाले जेट में हथियार विमान के अंदर रखे जाएंगे, ताकि उसकी स्टील्थ क्षमता बनी रहे.

    मॉडर्न सेंसर: इसमें आधुनिक एवियोनिक्स और सेंसर फ्यूज़न तकनीक होगी, जिससे पायलट दुश्मन के खतरों को बहुत पहले देख और ट्रैक कर सकेगा, उससे पहले कि दुश्मन उसे पहचान पाए.

    पावरफुल इंजन: शुरुआती स्क्वाड्रन (AMCA Mk1) में अमेरिकी GE F414 इंजन लगाए जाने की उम्मीद है, जबकि भविष्य के संस्करण (Mk2) में इससे ज्यादा ताकतवर, संयुक्त रूप से विकसित इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

कहां तक पहुंचा AMCA प्रोजेक्‍ट?

DRDO प्रमुख के अनुसार, AMCA प्रोग्राम अब केवल डिजाइन और कॉन्‍सेप्‍ट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वास्तविक विकास के चरण में प्रवेश कर चुका है. उन्होंने बताया कि यह परियोजना भारतीय वायुसेना (IAF) की जरूरतों के अनुसार एक सख्त और समयबद्ध योजना के तहत आगे बढ़ रही है. साल 2028 में प्रोटोटाइप और 2029 में पहली उड़ान के बीच का कम अंतर यह दर्शाता है कि इस परियोजना पर कई मोर्चों पर एक साथ काम किया जा रहा है. इसे पैरेलल डेवलपमेंट रणनीति कहा जाता है, जिसमें डिजाइन को अंतिम रूप देने के साथ-साथ प्रोडक्‍शन की तैयारी और विभिन्न सिस्टम्स की टेस्टिंग भी एक साथ की जाती है. इससे जटिल रक्षा परियोजनाओं में अक्सर होने वाली देरी से बचने में मदद मिलती है. AMCA को लेकर DRDO का भरोसा काफी हद तक तेजस कार्यक्रम से मिले अनुभव पर आधारित है. शुरुआती वर्षों में तेजस परियोजना को कई तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन इसी प्रक्रिया ने भारत को एक मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक ढांचा तैयार करने में मदद की. तेजस के जरिए देश में आधुनिक फ्लाइट टेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की टीम तथा मजबूत सप्लाई चेन विकसित हुई. अब DRDO और ADA इन सभी अनुभवों और सीख को AMCA परियोजना में लागू कर रहे हैं. इसके अलावा, निजी उद्योगों को शुरुआती चरण से ही निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है, ताकि जोखिम कम हों और समयसीमा बनी रहे.

AMCA प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट प्रोजेक्ट है. इसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करना, आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को मजबूत करना और भविष्य की हवाई चुनौतियों का सामना करना है.

AMCA प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति क्या है?
डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत के अनुसार AMCA प्रोग्राम तय समय पर आगे बढ़ रहा है. इसका पहला प्रोटोटाइप 2028 तक तैयार करने और 2029 में पहली उड़ान (मेडन फ्लाइट) कराने का लक्ष्य रखा गया है.

AMCA में कौन-कौन सी खास तकनीकें होंगी?
AMCA में स्टील्थ डिजाइन, सुपरक्रूज क्षमता, एडवांस्ड एवियोनिक्स, एआई आधारित सिस्टम, इंटरनल वेपन बे और अत्याधुनिक रडार सिस्टम शामिल होंगे. ये सभी खूबियां इसे दुश्मन के रडार से बचने और लंबी दूरी तक प्रभावी हमला करने में सक्षम बनाएंगी.

भारतीय वायुसेना के लिए AMCA कितना अहम है?
यह विमान वायुसेना की भविष्य की जरूरतों के लिहाज से बेहद अहम है. AMCA के शामिल होने से भारत की हवाई ताकत में बड़ा इजाफा होगा और चीन जैसे देशों के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी.

AMCA प्रोजेक्ट का भारत की रक्षा नीति पर क्या असर होगा?
AMCA प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मजबूती देगा. इससे रक्षा क्षेत्र में विदेशी निर्भरता घटेगी, स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भारत वैश्विक रक्षा निर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरेगा.
एयरफोर्स के लिए क्‍यों अहम?

अगर AMCA कार्यक्रम तय समय के अनुसार आगे बढ़ता है, तो भारत इस दशक के अंत तक उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जो स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का उड़ान परीक्षण कर रहे हैं. साल 2029 में पहली उड़ान भारतीय वायुसेना की दीर्घकालिक योजना के अनुरूप मानी जा रही है. इससे 2030 के दशक में विमान के व्यापक परीक्षण, प्रमाणन और बाद में सीरियल प्रोडक्शन के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि AMCA न केवल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति का भी एक मजबूत स्तंभ बनेगा. इससे भविष्य में लड़ाकू विमानों के लिए विदेशी निर्भरता कम होगी और देश की रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
2047 के विजन की ओर बड़ा कदम

जस-25 सेमिनार में भविष्य की ओर देखते हुए 2047 तक भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर सैन्य शक्ति बनाने की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई. AMCA को इस विजन का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है. डॉ. समीर कामत के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत अब उन्नत सैन्य विमानन तकनीक के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और AMCA इस दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है.

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