V2V टेक्नोलॉजी से सड़क पर आपस में बात करेंगी गाड़ियां, सरकार का हादसों को रोकने का प्लान

नई दिल्ली

कल्पना कीजिए कि आप घने कोहरे में गाड़ी चला रहे हैं, सामने कुछ दिख नहीं रहा है, लेकिन आपकी कार आपको पहले ही बता दे कि आगे खड़ी गाड़ी कितनी दूर है. या पीछे से तेज रफ्तार वाहन आ रहा है और सिस्टम आपको अलर्ट कर दे. सरकार अब इसी तरह की एक ख़ास तकनीकी को वाहनों में देने की योजना पर काम कर रही है. भारत सरकार 2026 के अंत तक देश में व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी में है. इसका सीधा मकसद है सड़कों पर हादसों की संख्या को कम करना और यात्रियों की जान बचाना है.

क्या है V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी

V2V टेक्नोलॉजी के तहत गाड़ियां आपस में सीधे बातचीत करेंगी. इसके लिए किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी. जब दो वाहन एक-दूसरे के ज्यादा करीब आएंगे तो सिस्टम तुरंत सिग्नल भेजेगा और ड्राइवर को अलर्ट कर देगा. इससे किसी भी संभावित टक्कर की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी और आप सेफ ड्राइविंग का आनंद ले सकेंगे.

यह तकनीक खास तौर पर उन हादसों को रोकने में मदद करेगी, जो सड़कों पर खड़ी गाड़ियों और पीछे से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के बीच होते हैं. सर्दियों में घने कोहरे के कारण होने वाले बड़े हादसों और कई गाड़ियों की टक्कर को भी यह सिस्टम रोक सकता है. जब विजिबिलिटी लगभग जीरो हो जाती है, तब यह टेक्नोलॉजी ड्राइवर के लिए तीसरी आंख का काम करेगी.

नितिन गडकरी ने क्या कहा

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ हुई सालाना बैठक के बाद इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में इस टेक्नोलॉजी पर विस्तार से चर्चा हुई है और इसे जल्द लागू किया जाएगा. उनके मुताबिक यह सिस्टम खास तौर पर पार्क की गई गाड़ियों और कोहरे में होने वाले हादसों को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा.

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने इसे रोड सेफ्टी की दिशा में बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. भारत में इसे लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5000 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

कैसी होगी यह टेक्नोलॉजी

यह सिस्टम एक खास डिवाइस के जरिए काम करेगा, जो सिम कार्ड जैसी होगी और गाड़ी में लगाई जाएगी. यह डिवाइस आसपास मौजूद अन्य वाहनों से सिग्नल लेकर जानकारी साझा करेगी. ताकि सड़क पर मौजूद सभी वाहनों में कम्युनिकेशन सिस्टम डेवलप हो सके. हालांकि इस सिस्टम के एक्टिव होने के बाद चालक को इससे मिलने वाले किसी भी तरह के अलर्ट पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी होगा.

कैसे मददगार होगी यह तकनीक

यह टेक्नोलॉजी सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करेगी. साथ ही सड़क किनारे खड़ी या रुकी हुई गाड़ियों के बारे में भी ड्राइवर को चेतावनी देगी. यह सिस्टम 360 डिग्री काम करेगा. यानी आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाले वाहनों के सिग्नल ड्राइवर तक पहुंचेंगे.
क्या देने होंगे पैसे

इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये आंकी गई है. उपभोक्ताओं से भी इसके लिए शुल्क लिया जाएगा, लेकिन इसकी कीमत अभी तय नहीं की गई है. इसके बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा भी नहीं की गई है.

कब से लागू होगी तकनीक

परिवहन मंत्रालय 2026 के अंत तक इस टेक्नोलॉजी को नोटिफाई करने की तैयारी में है. इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से इसे सभी वाहनों में लागू किया जाएगा. शुरुआत में यह सिस्टम सिर्फ नई गाड़ियों में लगाया जाएगा. V2V सिस्टम एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS के साथ मिलकर काम करेगा. अभी कुछ महंगी एसयूवी में इस तरह की तकनीक मौजूद है, लेकिन वह सेंसर पर आधारित है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन गाड़ियों को भी नए सिस्टम के हिसाब से अपडेट किया जाएगा.

सरकारी अधिकारियों का मानना है कि V2V टेक्नोलॉजी आने वाले समय में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक सेफ्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2026 के बाद भारतीय सड़कों पर गाड़ियां सिर्फ चलेंगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे से बात भी करेंगी.
 

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