सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, ED अफसरों पर दर्ज FIR पर ममता सरकार को झटका

नई दिल्ली

 बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सियासी पारा हाई है. पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक पर छापेमारी के बाद ये केस सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है, जिसपर आज शीर्ष न्यायालय में सुनवाई हुई. इस सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के अधिकारी पर दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगाने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारी नजर में यह गम्भीर मामला है. कोर्ट ने कहा कि ये केंद्रीय जांच एजेंसी के काम मे स्टेट एजेंसी के काम मे दखल का गम्भीर मामला है. लोकतंत्र में व्यवस्था जा हर अंग अपना काम कर सके, हमारे लिए इस मसले पर सुनवाई ज़रूरी है ताकि क़ानून का उल्लंघन करने वाले न बचे. SC ने ममता बनर्जी और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया. 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, ये केस कैसे सुनवाई योग्य हैं ? इस पर ED की तरफ से SG मेहता ने कहा, यह केस बहुत ही चौंकाने वाली स्थिति दिखाता है.⁠CM ममता बनर्जी उस जगह पर घुस गईं, जहां PMLA केस में रेड हो रही थी. CM ने ‘कानून हाथ में लेने का एक पैटर्न बना लिया है'. बंगाल पुलिस का गलत इस्तेमाल किया है. ED को जानकारी मिली थी कि एक ऑफिस में आपत्तिजनक सामान पड़ा है. CM बिना इजाज़त के घुसीं और फाइलें, डिजिटल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ले गईं. इसमें ED अधिकारी का फोन भी शामिल था. डायरेक्टर, पुलिस कमिश्नर उनके साथ थे. अधिकारी राजनीतिक नेताओं के साथ धरने पर बैठे थे.⁠CBI के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव किया गया और पत्थर फेंके गए.

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी को हटाए जाने की मांग की है.प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है. अर्जी में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की.

SG तुषार मेहता की बड़ी दलीलें…

    ED के अधिकारियों ने पुलिस को बताया था कि PMLA की धारा 17 के तहत IPAC की जांच करनी है

    पुलिस अधिकारियों और CM ममता बनर्जी ने जबरन सारी फाइलें ले लीं.

    ⁠यह चोरी है, ⁠उन्होंने एक ED अधिकारी का फोन भी ले लिया.⁠इससे सेंट्रल फोर्स का मनोबल गिरेगा

    ⁠दूसरे राज्यों को लगेगा कि वे भी ऐसा कर  सकते हैं और फिर धरने पर बैठ सकते हैं.

    ⁠जो अधिकारी वहां मौजूद थे, उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए

बंगाल के डीजीपी को हटाने की मांग

ईडी ने अपनी नई अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT), भारत सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए. अर्जी में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे.

डीजीपी राजीव कुमार और पुलिस कमिश्नर पर आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के साथ डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार को पक्षकार बनाया है. उन पर FIR दर्ज करने की मांग की है.

प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि Indian Political Action Committee के खिलाफ कोलकाता में छापेमारी के दौरान बंगाल की पुलिस प्रशासन की मशीनरी पर जांच में रुकावट का आरोप लगाया है. साथ ही साक्ष्यों से छेड़छाड़ और उन्हें खत्म करने का आरोप लगाया है. ED अफसरों को डराने धमकाने और उनके पास अहम फाइलों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड छीने गए.
सुप्रीम कोर्ट में दलीलें

सुप्रीम कोर्ट में ईडी ने कहा है कि निष्पक्ष जांच के एजेंसी के अधिकार में बाधा डालने का काम किया गया. इस घटना की CBI जांच कराने की मांग रखी गई है. कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 'CM और उनके समर्थकों के प्रभाव' का इस्तेमाल कर कोर्ट में हंगामा किया गया.इससे जज को सुनवाई तक टालनी पड़ी. जांच एजेंसी ने कहा कि CM, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर बीएनसी की 17 गंभीर  धाराओं के तहत आरोप लगाए जा सकते हैं.

IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था- कपिल सिब्बल

वहीं, ममता सरकार की ओर से कोर्ट में पेश हुए सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि IPAC के पास पार्टी का बहुत सारा डेटा था। जब ED वहां गई, तो उसे पता था कि संवेदनशील पार्टी की जानकारी वहां मौजूद होगी।

उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को पहले इस मामले की सुनवाई करनी चाहिए और अपना फैसला देना चाहिए, जिसके बाद पार्टियां अपीलीय फोरम में जा सकती हैं। उन्होंने दलील दी कि अब समानांतर कार्यवाही शुरू कर दी गई है, जबकि हाई कोर्ट के पास आर्टिकल 226 के तहत अधिकार क्षेत्र है, और यही सही क्रम है जिसका पालन किया जाना चाहिए।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में राज्य और DGP की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट अभिषेक सिंघवी ने याचिका की स्वीकार्यता पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर नोटिस जारी किया जाता है, तो यह साफ किया जाना चाहिए कि यह स्वीकार्यता पर उनकी आपत्ति के अधीन होगा। सिंघवी ने तर्क दिया कि ED की ओर से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जाना केवल असाधारण स्थितियों में ही स्वीकार्य है, जहां कोई प्रभावी उपाय उपलब्ध न हो।

'चुनावी काम में ईडी को दखल देने का अधिकार नहीं…'

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की बात सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और दूसरी केंद्रीय एजेंसियों की जांच और राज्य अधिकारियों द्वारा कथित दखल के बारे में एक गंभीर मुद्दा उठाती है. कोर्ट ने ज़ोर दिया कि कानून का राज बनाए रखने और हर एजेंसी को आज़ादी से काम करने देने के लिए, इस मामले की जांच होनी चाहिए, जिससे यह पक्का हो सके कि किसी भी राज्य की सुरक्षा की आड़ में अपराधियों को बचाया न जाए.

बेंच ने कहा कि इसमें कानून के बड़े सवाल शामिल हैं, और उन्हें बिना सुलझाए छोड़ने से स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे एक या ज़्यादा राज्यों में अराजकता फैल सकती है. कोर्ट ने ज़ोर दिया कि किसी भी एजेंसी को चुनाव के काम में दखल देने का अधिकार नहीं है, लेकिन जब कोई केंद्रीय एजेंसी किसी गंभीर अपराध की जांच के लिए ईमानदारी से काम कर रही हो, तो पार्टी के काम की आड़ में गतिविधियों को उसकी शक्तियों में रुकावट नहीं डालनी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया और निर्देश दिया कि तीन दिनों के अंदर जवाब दाखिल किया जाए.

कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई थी सुनवाई

इससे पहले I-PAC रेड मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। ईडी ने कहा था कि ममता बनर्जी ने पुलिस की मदद से छापेमारी में एजेंसी की कब्जे में मौजूद संवेदनशील दस्तावेज अपने पास ले लिए। हाईकोर्ट ने ईडी की याचिका की सुनवाई स्थगित कर दी और टीएमसी की एक याचिका को खारिज भी किया, जिसमें उसने अपने डेटा की सुरक्षा मांगी थी।

दरअसल, पूरा मामला 8 जनवरी का है, जब कोयला घोटाले की जांच के तहत ईडी की टीम ने कई जगह छापे मारे। इसी सिलसिले में आई-पैक और प्रतीक जैन के घर और ऑफिस पर भी रेड पड़ी। जैसे ही पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को छापेमारी की सूचना मिली, वो तुरंत I-PAC कार्यालय पहुंचीं। वो इस दौरान छापेमारी के बीच से ही कुछ दस्तावेज अपने साथ लेकर निकल गई।

 

More From Author

मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों के लिए UPPSC और PSC तैयारी, 2 नए छात्रावास बनाने की योजना

CM यादव का ऐलान: एआई को कुशल शासन और पारदर्शिता के लिए अहम बनाती है राज्य सरकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13695/1

RO No. 13379/55

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.