यूपी में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा, गोरखपुर और संतकबीर नगर में बन रहीं पायलट परियोजनाएं

  • गोरखपुर व संतकबीर नगर में राप्ती और कुवानो नदी क्षेत्र में माइक्रो इरिगेशन का विकास
  • जल संरक्षण के साथ किसानों को मिलेगा कम लागत में अधिक उत्पादकता का लाभ

लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं व जल उपयोग दक्षता का विस्तार करने के उद्देश्य से माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। इस दिशा में विभाग केंद्र सरकार की मॉडर्नाइजेशन ऑफ कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वाटर मैनेजमेंट (एमसीएडीडब्लूएम) परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर जिलों में माइक्रो इरिगेशन की पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है।

ये पायलट परियोजनाएं गोरखपुर में कलपईचा/रामगढ़ ताल व राप्ती नदी क्षेत्र में, जबकि संतकबीर नगर में कुवानो नदी क्षेत्र में बनाई जा रही हैं, जो माइक्रो इरिगेशन की पीपीआईएन (प्रेशराइज्ड पाइप्ड इरिगेशन नेटवर्क) तकनीक के जरिए जल उपयोग की दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि लाएंगी। पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर इसका विस्तार प्रदेश के अन्य जनपदों में भी किया जाएगा, जो किसानों के लिए लाभप्रद होने के साथ प्रदेश में कृषि क्षेत्र में सतत विकास सुनिश्चित करेगी।

गोरखपुर और संतकबीर नगर में हो रहा निर्माण
सिंचाई विभाग केंद्रीय परियोजना के तहत गोरखपुर और संत कबीर नगर में कुल छह पायलट परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है। इनमें चार परियोजनाओं  के फाइनल डीडीआर तैयार हो चुके हैं, जबकि शेष दो परियोजनाओं के कमांड एरिया को लेकर विचार चल रहा है, जिस पर जल्द ही स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है। परियोजनाओं का कुल सीसीए (कल्चरेबल कमांड एरिया) 2149 हेक्टेयर है, जिसमें गोरखपुर के बांसगांव, मलांव व मझगवां, राजधनी, बरगदवां, जंगल गौरी-1 तथा संतकबीर नगर जिले में प्रजापतिपुर क्लस्टर शामिल हैं। इनमें से गोरखपुर के बांसगांव और जंगलगौरी-1 क्लस्टरों के कमांड एरिया को स्वीकृति मिलते ही, फरवरी 2026 के अंत तक सभी क्लस्टरों में परियोजनाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। इससे क्षेत्र के हजारों किसान प्रत्यक्ष तौर पर लाभान्वित होंगे। उन्हें रबी व खरीफ, दोनों फसलों के उत्पादन में लाभ मिलेगा।

जल उपयोग दक्षता में होगी 75 प्रतिशत वृद्धि
माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं पीपीआईएन तकनीक के जरिए पानी को जलस्रोत से सीधे खेतों तक पहुंचाती है, जिससे पानी की बर्बादी में कमी आने के साथ जल उपयोग दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होगी। परियोजना के तहत पीपीआईएन के जरिए क्षेत्र के सभी जलस्रोतों का एकीकरण कर उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही किसानों को माइक्रो इरिगेशन के यंत्र, ड्रिप और स्प्रिंकलर के लिए सहायता भी प्रदान की जाएगी। प्रत्येक क्लस्टर में गठित वाटर यूजर सोसाइटी सिंचाई नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेंगी। इन पायलट परियोजनाओं के सफल संचालन के आधार पर परियोजना का विस्तार प्रदेश के अन्य जिलों में भी किया जाना है, जो प्रदेश में माइक्रो इरिगेशन के विकास से पीडीएमसी (पर ड्राप मोर क्रॉप) अवधारणा को सफल बनाएंगी। माइक्रो इरिगेशन की ये परियोजनाएं एक ओर किसानों को कम लागत पर बेहतर उत्पादकता और दीर्घकालिक जल-सुरक्षा प्रदान करेंगी, साथ ही मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप प्रदेश में सतत कृषि के विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

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