13 से 36 लाख करोड़ तक पहुँची यूपी की अर्थव्यवस्था, बिना नया टैक्स लगाए विकास की रफ्तार तेज: मुख्यमंत्री

विधानसभा में सीएम योगी (भाग-9)

कांग्रेस और सपा ने किया किसानों को कर्जदाता बनाने का महापाप: सीएम योगी

13 से 36 लाख करोड़ तक पहुँची यूपी की अर्थव्यवस्था, बिना नया टैक्स लगाए विकास की रफ्तार तेज: मुख्यमंत्री

ओडीओपी से ई-केसीसी तक, यूपी का ग्रामीण उत्थान बना राष्ट्रीय मिसाल: विधानसभा में सीएम योगी

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि औपनिवेशिक काल ने जिस किसान को उत्पादक से उपभोक्ता बनाया, उसी किसान को बाद की कांग्रेस और सपा सरकारों ने कर्जदाता बना देने का पाप किया। उन्होंने कहा कि जिस कारीगर में उद्यमी बसता था, उसे निराश-हताश कर पलायन के लिए मजबूर कर दिया गया। जो व्यापारी उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक देश को जोड़ने वाला सेतु था, उसे भय और अव्यवस्था में धकेल दिया गया। परिणामस्वरूप प्रदेश में हताशा-निराशा, किसानों की दुर्दशा और एमएसएमई की बंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में राज्य ने इस परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। स्पष्ट कृषि नीति ने परिस्थितियाँ पलट दी हैं। पहले लागत अधिक और उत्पादन कम था, बिचौलियों का वर्चस्व था। आज लागत कम, उत्पादन अधिक और उपज का पूरा लाभ डीबीटी के माध्यम से सीधे किसान को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की इस यात्रा में उत्तर प्रदेश ने अन्नदाता को फिर से केंद्र में स्थापित किया है और कृषि-अर्थव्यवस्था को दोहरी गति से आगे बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब नई ऊँचाइयों पर पहुँच चुकी है, जहाँ कभी प्रदेश की जीएसडीपी 13 लाख करोड़ रुपये थी, वहीं आज यह 36 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर तक पहुँच गई है। देश की कुल जीडीपी में उत्तर प्रदेश का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। फिस्कल डेफिसिट को 3 प्रतिशत से नीचे लाने में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है और यह टैक्स चोरी तथा रेवेन्यू लीकेज पर प्रभावी नियंत्रण का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में बिना कोई नया टैक्स लगाए प्रदेश के विकास को गति दी गई है।

नेता प्रतिपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत किसानों और कारीगरों की सृजनशीलता के बल पर खड़ा हुआ देश है। ग्राम स्वराज की यह परंपरा सदैव हमारी पहचान रही है। औपनिवेशिक काल ने हमारे उत्पादक किसानों को उपभोक्ता बनने पर विवश किया और बाद में पूर्ववर्ती सरकारों ने उन्हें कर्ज में डुबो दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की सरकारों ने अन्नदाता को कर्जदाता बनाने का पाप किया, जबकि कारीगरों और उद्यमियों को हताशा-निराशा के अंधकार में धकेल दिया। उस समय प्रदेश में पलायन, बेरोज़गारी और एमएसएमई के पतन का माहौल था, निवेशकों की धारणा पूरी तरह नकारात्मक थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले आठ-नौ वर्षों में किसानों के हित में किए गए कार्य अभूतपूर्व हैं। स्पष्ट कृषि नीति के परिणामस्वरूप अन्नदाता को कम लागत में अधिक उत्पादन का लाभ मिला है। बिचौलियों को हटाकर डीबीटी के माध्यम से किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में उपलब्ध कराया जा रहा है। कृषि उत्पादों में गुणवत्ता सुधार पर विशेष बल दिया गया है। इसी का परिणाम है कि आज उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम है, दुग्ध उत्पादन में अग्रणी है और गन्ना उत्पादन में भी दोगुनी क्षमता पर पहुँच चुका है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 16 लाख निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जो प्रति गोवंश 1500 रुपये प्रति माह की सहायता प्रदान कर रहा है। आज देश के कुल गन्ना उत्पादन का 55 प्रतिशत उत्तर प्रदेश से आता है। 2000 से 2017 तक मात्र 2.14 हजार करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ था, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में 3 लाख 05 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा गया है—यानी आधे समय में 90,000 करोड़ रुपये से अधिक अतिरिक्त राशि किसानों को प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आज 122 चीनी मिलें संचालित हैं और किसान को 400 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य का भुगतान किया जा रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर हो गया है, जिसमें भी उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। आज चीनी मिलें घाटे का क्षेत्र नहीं, बल्कि लाभकारी उद्योग बन चुकी हैं। छाता और बागपत की चीनी मिलों को इंटीग्रेटेड परिसर के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य में 89 कृषि विज्ञान केंद्र संचालित हैं। एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स के माध्यम से किसानों की उपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। कृषि वैल्यू चेन, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर व्यापक कार्य हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘हर खेत को पानी’ के संकल्प के तहत नहरों, पाइपलाइन और माइक्रो इरिगेशन के माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रदेश की 31 बड़ी सिंचाई परियोजनाएँ पूरी की जा चुकी हैं। निजी नलकूपों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई गई है और डीजलचालित नलकूपों के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय और लखनऊ में चौधरी चरण सिंह सीड पार्क का निर्माण प्रदेश के कृषि विकास को नई दिशा देगा। ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड की प्रक्रिया को सरल बनाकर पाँच मिनट में पूरा किए जाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

एक जिला–एक उत्पाद योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडीओपी ने कारीगरों, शिल्पकारों और किसानों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से एमएसएमई सेक्टर लोकल-टू-ग्लोबल की अवधारणा को साकार कर रहा है, जिसका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को मिल रहा है। सिद्धार्थनगर के काला नमक चावल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ओडीओपी के कारण आज इसकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मांग अत्यधिक बढ़ी है। प्रदेश के 77 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जिससे उनके लिए वैश्विक बाजार में प्रमाणन की आवश्यकता समाप्त हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष एक जिला-एक व्यंजन (ओडीओसी) योजना शुरू की है, जिसके माध्यम से प्रत्येक जिले के विशेष व्यंजन को बढ़ावा दिया जा रहा है और इसे भी व्यापक आर्थिक गतिविधि से जोड़ा जा रहा है।

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